Class 10 Science · Chapter 4 · हिंदी माध्यम
संक्षिप्त उत्तर:
NCERT कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 4 कार्बन एवं उसके यौगिक में कुल 13 इन-टेक्स्ट प्रश्न (4 पेज-वार सेट) और 15 अभ्यास प्रश्न हैं — सभी के विस्तृत समाधान यहाँ हिंदी में दिए गए हैं। अध्याय में शामिल है: कार्बन का सहसंयोजक बंधन (चतुःसंयोजकता + श्रृंखलन), संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन, संरचनात्मक समावयवता, फंक्शनल ग्रुप, समजातीय श्रेणी, IUPAC नामकरण, कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण (दहन, ऑक्सीकरण, योगात्मक, प्रतिस्थापन), दो महत्वपूर्ण यौगिक — एथेनॉल (C2H5OH) और एथेनोइक एसिड (CH3COOH), और अंत में साबुन, डिटर्जेंट और मिसेल की सफाई क्रिया।
कार्बन के पास 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए वह इलेक्ट्रॉन साझा करता है — आयनिक बंध नहीं बनाता। एक परमाणु होने के बावजूद कार्बन के 1 करोड़ से भी ज़्यादा यौगिक बन चुके हैं, और इसकी वजह सिर्फ दो गुण हैं — चतुःसंयोजकता (4 बंध बना सकता है) और श्रृंखलन (कार्बन-कार्बन की लंबी शृंखलाएँ बना सकता है)। यही अध्याय का मूल है — इसी एक विचार से इसमें सब कुछ निकलता है: समावयवी (isomers), समजातीय श्रेणी, फंक्शनल ग्रुप, और एथेनॉल/एथेनोइक एसिड की अभिक्रियाएँ।
अध्याय 4 सारांश — 5 मिनट रिवीजन
1. कार्बन में बंधन — सहसंयोजक बंध क्यों?
- कार्बन की परमाणु संख्या 6, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,4। बाहरी कोश में 4 इलेक्ट्रॉन।
- उत्कृष्ट गैस (noble gas) विन्यास पाने के लिए 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करे या 4 त्यागे — दोनों असंभव हैं:
- 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना: 6 प्रोटॉन के लिए 10 इलेक्ट्रॉन धारण करना मुश्किल है।
- 4 इलेक्ट्रॉन त्यागना: इतनी ज़्यादा ऊर्जा चाहिए कि C4+ बनाना व्यावहारिक रूप से नहीं होता।
- इसलिए कार्बन इलेक्ट्रॉन साझा करता है — यानी सहसंयोजक बंध बनाता है।
2. सहसंयोजक यौगिकों के गुण
- गलनांक और क्वथनांक कम (अंतराआण्विक बल कमज़ोर होते हैं — बंध खुद मज़बूत है, पर अणुओं के बीच का आकर्षण कमज़ोर)।
- बिजली का चालन नहीं करते — क्योंकि आयन या मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होते।
- अधिकतर पानी में अघुलनशील, कार्बनिक विलायकों में घुलनशील।
3. कार्बन के दो सुपरपावर गुण
- श्रृंखलन (catenation) — कार्बन अपने ही परमाणुओं से लंबी शृंखला, शाखित शृंखला और वलय बना लेता है। C–C बंध बहुत मज़बूत होने की वजह से ये शृंखलाएँ स्थिर रहती हैं।
- चतुःसंयोजकता (tetravalency) — 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की वजह से कार्बन 4 अन्य परमाणुओं (C, H, O, N, S, Cl) से बंध बना सकता है।
4. हाइड्रोकार्बन
| प्रकार | बंध | सामान्य सूत्र | उदाहरण | लौ (flame) |
|---|---|---|---|---|
| एल्केन (संतृप्त) | एकल C–C | CnH2n+2 | CH4, C2H6 | स्वच्छ नीली लौ |
| एल्कीन (असंतृप्त) | द्वि-बंध C=C | CnH2n | C2H4 | पीली धुएँदार लौ |
| एल्काइन (असंतृप्त) | त्रि-बंध C≡C | CnH2n-2 | C2H2 | पीली धुएँदार लौ |
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चक्रीय (ring) हाइड्रोकार्बन भी होते हैं — जैसे साइक्लोहेक्सेन C6H12, बेंज़ीन C6H6।
5. संरचनात्मक समावयवी (structural isomers)
- समान आण्विक सूत्र, अलग संरचनात्मक व्यवस्था = संरचनात्मक समावयवी।
- ब्यूटेन C4H10 → 2 समावयवी। पेंटेन C5H12 → 3 समावयवी। हेक्सेन C6H14 → 5 समावयवी।
- पहले 3 एल्केन (मीथेन, एथेन, प्रोपेन) के कोई संरचनात्मक समावयवी नहीं बनते।
6. फंक्शनल ग्रुप
| फंक्शनल ग्रुप | सूत्र | सफिक्स / प्रीफिक्स | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| हैलो (क्लोरो/ब्रोमो) | –Cl, –Br | प्रीफिक्स: chloro-, bromo- | CH3Cl क्लोरोमीथेन |
| एल्कोहॉल | –OH | सफिक्स: -ol | C2H5OH एथेनॉल |
| एल्डिहाइड | –CHO | सफिक्स: -al | CH3CHO एथेनल |
| कीटोन | –CO– | सफिक्स: -one | CH3COCH3 प्रोपेनोन |
| कार्बोक्सिलिक एसिड | –COOH | सफिक्स: -oic acid | CH3COOH एथेनोइक एसिड |
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नामकरण नियम: अगर सफिक्स स्वर (a, e, i, o, u) से शुरू हो रहा है, तो मूल शृंखला के नाम से अंतिम 'e' हटा दो। जैसे propane + -one = propanone (propaneone नहीं)।
7. समजातीय श्रेणी (homologous series)
- समान फंक्शनल ग्रुप वाले यौगिकों की श्रेणी जिसमें हर सदस्य से अगला सदस्य –CH2 इकाई से बढ़ता है।
- आण्विक द्रव्यमान का अंतर 14 u।
- रासायनिक गुण समान, भौतिक गुण (गलनांक, क्वथनांक, विलेयता) धीरे-धीरे बदलते हैं।
8. कार्बन यौगिकों के रासायनिक गुण
(a) दहन (combustion)
संतृप्त हाइड्रोकार्बन स्वच्छ नीली लौ देता है; असंतृप्त पीली धुएँदार लौ।
CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + heat & light
(b) ऑक्सीकरण
एल्कोहॉल को क्षारीय KMnO4 या अम्लीकृत K2Cr2O7 के साथ गर्म करने पर कार्बोक्सिलिक एसिड बनता है। ये ऑक्सीकारक कहलाते हैं।
CH3CH2OH Alkaline KMnO4 + Heat→ CH3COOH
(c) योगात्मक अभिक्रिया (addition reaction)
असंतृप्त यौगिक में निकल/पैलेडियम उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जुड़ता है — इसे हाइड्रोजनीकरण कहते हैं।
C2H4 + H2 Ni→ C2H6
(d) प्रतिस्थापन अभिक्रिया (substitution reaction)
संतृप्त हाइड्रोकार्बन सूर्य के प्रकाश में क्लोरीन के साथ प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं।
CH4 + Cl2 Sunlight→ CH3Cl + HCl
9. एथेनॉल (C2H5OH)
- कमरे के तापमान पर तरल, पानी में हर अनुपात में घुलनशील।
- सोडियम के साथ: हाइड्रोजन गैस निकलती है (यह एल्कोहॉल का टेस्ट है)।
2Na + 2C2H5OH → 2C2H5ONa + H2↑
- निर्जलीकरण (dehydration): सांद्र H2SO4 के साथ 443 K पर एथीन बनता है।
C2H5OH Conc. H2SO4, 443 K→ CH2=CH2 + H2O
एथेनॉल दवाओं और टिंक्चर में विलायक है, पर शुद्ध एथेनॉल पीने से स्वास्थ्य पर गंभीर नुकसान होता है। मेथेनॉल तो बहुत ज़्यादा विषैला है — लीवर में मेथेनल बनाकर अंधापन और मृत्यु तक कर सकता है।
10. एथेनोइक एसिड (CH3COOH)
- एसिटिक एसिड — 5–8% विलयन को सिरका (vinegar) कहते हैं।
- शुद्ध एथेनोइक एसिड 290 K पर जम जाता है, इसलिए इसे ग्लेशियल एसिटिक एसिड कहते हैं।
- यह एक दुर्बल अम्ल (weak acid) है (खनिज अम्लों जैसे HCl से कमज़ोर)।
एस्टरीकरण: एसिड उत्प्रेरक के साथ एल्कोहॉल से एस्टर बनता है — मीठी गंध।
CH3COOH + C2H5OH Conc. H2SO4→ CH3COOC2H5 + H2O
साबुनीकरण (saponification): एस्टर + NaOH → एल्कोहॉल + एसिड का सोडियम लवण (साबुन बनाने की अभिक्रिया)।
CH3COOC2H5 + NaOH → CH3COONa + C2H5OH
क्षार के साथ:
CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O
कार्बोनेट / हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ: तेज़ बुलबुले, CO2 निकलती है — यही कार्बोक्सिलिक एसिड का टेस्ट है।
2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2↑
CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑
11. साबुन, डिटर्जेंट और मिसेल
- साबुन = लंबी शृंखला वाले कार्बोक्सिलिक एसिड का सोडियम/पोटैशियम लवण। अणु के दो सिरे होते हैं:
- हाइड्रोफिलिक (आयनिक –COO–Na+ सिर) — पानी में घुलता है।
- हाइड्रोफोबिक (हाइड्रोकार्बन पूँछ) — तेल/चिकनाई में घुलती है।
- पानी में साबुन के अणुओं का गुच्छा (cluster) बन जाता है जिसमें पूँछ अंदर तेल की ओर और सिर बाहर पानी की ओर होता है — इसे मिसेल कहते हैं।
- मिसेल तैलीय गंदगी को घेर लेता है, रगड़ने से गंदगी कपड़े से अलग हो जाती है और पानी में इमल्शन बनाकर बह जाती है।
- कठोर जल में Ca2+ और Mg2+ आयन होते हैं जो साबुन के साथ अघुलनशील लवण (स्कम) बना देते हैं — झाग नहीं बनता और साबुन बर्बाद होता है।
- डिटर्जेंट अमोनियम/सल्फोनेट लवण होते हैं — इनके कैल्शियम/मैग्नीशियम लवण भी घुलनशील रहते हैं, इसलिए कठोर जल में भी झाग देते हैं।
इन-टेक्स्ट प्रश्न — हल
प्रश्न 1. कार्बन डाइऑक्साइड, जिसका सूत्र CO2 है, की इलेक्ट्रॉन डॉट संरचना क्या होगी?
CO2 में कार्बन के पास 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं और हर ऑक्सीजन के पास 6। कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉनों को दो ऑक्सीजन परमाणुओं के साथ साझा करता है — हर ऑक्सीजन के साथ 2 इलेक्ट्रॉन जोड़े, यानी द्वि-बंध।
O = C = O
इलेक्ट्रॉन डॉट रूप में: कार्बन और हर ऑक्सीजन के बीच दो साझा इलेक्ट्रॉन जोड़े (4 बिंदु) दिखाए जाते हैं, और हर ऑक्सीजन परमाणु पर 2 अकेले जोड़े (4 बिंदु) बचते हैं। इस तरह कार्बन के पास 8 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं और हर ऑक्सीजन के पास भी 8 — दोनों का अष्टक (octet) पूरा।
प्रश्न 2. आठ सल्फर परमाणुओं से बने सल्फर अणु की इलेक्ट्रॉन डॉट संरचना क्या होगी? (संकेत: आठों सल्फर परमाणु एक रिंग के रूप में जुड़े होते हैं।)
सल्फर का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2,8,6 है — यानी हर S परमाणु के पास 6 संयोजकता इलेक्ट्रॉन। अष्टक पूरा करने के लिए हर सल्फर परमाणु को सिर्फ 2 और इलेक्ट्रॉन चाहिए।
S8 में आठ सल्फर परमाणु एक रिंग (क्राउन आकार) में जुड़े होते हैं। हर सल्फर अपने दोनों पड़ोसी सल्फर परमाणुओं के साथ एक-एक एकल सहसंयोजक बंध बनाता है (हर बंध में 1 साझा जोड़ा), और उसके पास 2 अकेले जोड़े (4 बिंदु) बचते हैं।
S–S–S–S–S–S–S–S (आठ परमाणुओं की बंद रिंग)
कुल 8 एकल S–S बंध। हर परमाणु: 2 बंधन जोड़े + 2 अकेले जोड़े = 8 इलेक्ट्रॉन = अष्टक पूरा।
प्रश्न 3. पेंटेन के कितने संरचनात्मक समावयवी (structural isomers) बनाए जा सकते हैं?
पेंटेन का सूत्र C5H12 है और इसके 3 संरचनात्मक समावयवी बनते हैं:
- n-पेंटेन — सीधी शृंखला: CH3–CH2–CH2–CH2–CH3
- आइसो-पेंटेन (2-मेथिलब्यूटेन) — 4 कार्बन की शृंखला, दूसरे कार्बन पर एक CH3 शाखा।
- नियो-पेंटेन (2,2-डाइमेथिलप्रोपेन) — 3 कार्बन की शृंखला, बीच वाले कार्बन पर दो CH3 शाखाएँ।
तीनों का आण्विक सूत्र समान C5H12 है, केवल कार्बन कंकाल (skeleton) की व्यवस्था अलग है।
प्रश्न 4. कार्बन के वे कौन-से दो गुण हैं जिनके कारण हमारे आसपास कार्बन यौगिकों की इतनी बड़ी संख्या दिखाई देती है?
दो गुण हैं:
- श्रृंखलन (catenation) — कार्बन अपने ही दूसरे कार्बन परमाणुओं के साथ बंध बनाकर लंबी शृंखलाएँ, शाखित शृंखलाएँ और वलय (rings) बना लेता है। C–C बंध बहुत मज़बूत होने के कारण ये संरचनाएँ स्थिर रहती हैं। कोई और तत्व इतनी लंबी स्थिर शृंखलाएँ नहीं बना पाता।
- चतुःसंयोजकता (tetravalency) — कार्बन के पास 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए यह 4 अन्य परमाणुओं (कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हैलोजन) के साथ सहसंयोजक बंध बना सकता है। इससे बहुत ज़्यादा संयोजन संभव हो जाते हैं।
प्रश्न 5. साइक्लोपेंटेन का सूत्र और इलेक्ट्रॉन डॉट संरचना क्या होगी?
साइक्लोपेंटेन एक चक्रीय संतृप्त हाइड्रोकार्बन है जिसमें 5 कार्बन एक वलय में जुड़े हैं। वलय वाले संतृप्त हाइड्रोकार्बन का सामान्य सूत्र CnH2n होता है, तो n = 5 पर:
सूत्र = C5H10
संरचना: पाँच कार्बन परमाणु एक बंद पंचकोण (pentagon) वलय बनाते हैं। हर कार्बन अपने दो पड़ोसी कार्बन परमाणुओं के साथ एक-एक एकल बंध बनाता है और बचे दो बंधों से दो हाइड्रोजन परमाणु जोड़ता है।
इलेक्ट्रॉन डॉट में: हर C–C और हर C–H बंध को एक साझा इलेक्ट्रॉन जोड़े (दो बिंदु) से दिखाया जाता है। हर कार्बन के पास कुल 4 साझा जोड़े = 8 इलेक्ट्रॉन, अष्टक पूरा। कोई अकेला जोड़ा नहीं।
प्रश्न 6. निम्न यौगिकों की संरचना बनाइए। (i) एथेनोइक एसिड (ii) ब्रोमोपेंटेन (iii) ब्यूटेनोन (iv) हेक्सेनल। क्या ब्रोमोपेंटेन के लिए संरचनात्मक समावयवी संभव हैं?
(i) एथेनोइक एसिड — CH3COOH
दो कार्बन; दूसरे कार्बन पर –COOH समूह (C का O के साथ द्वि-बंध और –OH समूह)।
CH3 – COOH
(ii) ब्रोमोपेंटेन — C5H11Br
पाँच कार्बन की शृंखला, एक हाइड्रोजन की जगह –Br।
CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – CH2Br (1-ब्रोमोपेंटेन)
हाँ, संरचनात्मक समावयवी संभव हैं। सीधी शृंखला में ही Br की स्थिति बदलने से तीन समावयवी मिलते हैं — 1-ब्रोमोपेंटेन, 2-ब्रोमोपेंटेन और 3-ब्रोमोपेंटेन (और शाखित शृंखला लेने पर और भी बनते हैं)।
(iii) ब्यूटेनोन — CH3COCH2CH3
चार कार्बन, दूसरे कार्बन पर कीटोन (>C=O) समूह।
CH3 – CO – CH2 – CH3
(iv) हेक्सेनल — CH3CH2CH2CH2CH2CHO
छह कार्बन, शृंखला के एक सिरे पर एल्डिहाइड (–CHO) समूह।
CH3 – CH2 – CH2 – CH2 – CH2 – CHO
प्रश्न 7. निम्न यौगिकों का नामकरण कैसे करेंगे? (i) CH3—CH2—Br (ii) HCHO (एक-कार्बन एल्डिहाइड) (iii) H—C≡C—CH2—CH2—CH2—CH3
(i) CH3—CH2—Br → ब्रोमोएथेन
दो कार्बन = eth-, संतृप्त = -ane, और हैलोजन प्रत्यय (prefix) के रूप में = bromo। इसलिए ब्रोमोएथेन।
(ii) HCHO → मेथेनल
एक कार्बन = meth-, एल्डिहाइड समूह –CHO का सफिक्स = -al। 'मीथेन' से अंतिम 'e' हटाकर मेथेनल।
(iii) H—C≡C—CH2—CH2—CH2—CH3 → हेक्साइन (हेक्स-1-आइन)
छह कार्बन = hex-, त्रि-बंध है = -yne। त्रि-बंध पहले कार्बन पर है, इसलिए हेक्स-1-आइन।
प्रश्न 8. एथेनॉल का एथेनोइक एसिड में परिवर्तन ऑक्सीकरण अभिक्रिया क्यों है?
जब एथेनॉल को क्षारीय KMnO4 या अम्लीकृत K2Cr2O7 के साथ गर्म करते हैं तो एथेनोइक एसिड बनता है:
CH3CH2OH Alkaline KMnO4 + Heat→ CH3COOH
इस अभिक्रिया में एथेनॉल (C2H6O) में ऑक्सीजन जुड़ता है और हाइड्रोजन हटता है। किसी यौगिक में ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का हटना — दोनों ही ऑक्सीकरण कहलाते हैं। इसलिए यह एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया है।
यहाँ KMnO4 / K2Cr2O7 ऑक्सीकारक (oxidising agent) का काम करते हैं।
प्रश्न 9. वेल्डिंग के लिए ऑक्सीजन और एथाइन का मिश्रण जलाया जाता है। क्या आप बता सकते हैं कि एथाइन और वायु का मिश्रण क्यों उपयोग नहीं किया जाता?
एथाइन (C2H2) एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है। वायु में ऑक्सीजन केवल लगभग 21% होती है, इसलिए वायु के साथ जलाने पर अपूर्ण दहन होता है — पीली धुएँदार लौ बनती है और तापमान कम रहता है। साथ ही कालिख (कार्बन कण) निकलती है।
शुद्ध ऑक्सीजन के साथ जलाने पर पूर्ण दहन होता है और बहुत ही उच्च तापमान की स्वच्छ नीली लौ (ऑक्सी-एसिटिलीन लौ) मिलती है, जो धातुओं को पिघलाकर वेल्ड करने के लिए ज़रूरी है।
2C2H2 + 5O2 → 4CO2 + 2H2O + heat
इसलिए वेल्डिंग में एथाइन + वायु नहीं, बल्कि एथाइन + ऑक्सीजन का मिश्रण उपयोग होता है।
प्रश्न 10. एल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक एसिड को प्रायोगिक रूप से कैसे अलग करेंगे?
दो सरल परीक्षण हैं:
(a) सोडियम कार्बोनेट / सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट परीक्षण (सबसे अच्छा टेस्ट):
दोनों को अलग-अलग परखनली में NaHCO3 या Na2CO3 विलयन के साथ मिलाइए।
- कार्बोक्सिलिक एसिड — तेज़ बुलबुले (brisk effervescence) देता है, CO2 गैस निकलती है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।
- एल्कोहॉल — कोई अभिक्रिया नहीं, कोई गैस नहीं।
CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑
(b) लिटमस परीक्षण:
कार्बोक्सिलिक एसिड नीले लिटमस को लाल कर देता है; एल्कोहॉल लिटमस पर कोई असर नहीं करता (वह उदासीन है)।
प्रश्न 11. ऑक्सीकारक (oxidising agents) क्या हैं?
वे पदार्थ जो दूसरे पदार्थों को ऑक्सीजन देते हैं या उनसे हाइड्रोजन छीन लेते हैं — यानी दूसरे को ऑक्सीकृत करते हैं और खुद अवकृत (reduce) हो जाते हैं — उन्हें ऑक्सीकारक कहते हैं।
सामान्य उदाहरण: क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट (KMnO4), अम्लीकृत पोटैशियम डाइक्रोमेट (K2Cr2O7)।
CH3CH2OH Alkaline KMnO4 + Heat→ CH3COOH
यहाँ KMnO4 एथेनॉल को ऑक्सीजन देता है, इसलिए वह ऑक्सीकारक है।
प्रश्न 12. क्या डिटर्जेंट का उपयोग करके यह जाँचा जा सकता है कि पानी कठोर है या नहीं?
नहीं। डिटर्जेंट से कठोर जल की जाँच नहीं की जा सकती।
डिटर्जेंट अमोनियम या सल्फोनेट लवण होते हैं और इनके कैल्शियम और मैग्नीशियम लवण भी पानी में घुलनशील रहते हैं। इसलिए डिटर्जेंट कठोर जल और मृदु जल — दोनों में अच्छी तरह झाग (lather) देता है और कोई फर्क नहीं दिखता।
कठोर जल की जाँच करने के लिए साबुन का उपयोग करते हैं: मृदु जल में साबुन अच्छा झाग देता है, जबकि कठोर जल में झाग के बजाय स्कम (सफेद अघुलनशील परत) बनता है।
प्रश्न 13. कपड़े धोने के लिए लोग कई तरीके अपनाते हैं। आमतौर पर साबुन लगाने के बाद वे कपड़ों को पत्थर पर पीटते हैं, या डंडे से पीटते हैं, ब्रश से रगड़ते हैं या वॉशिंग मशीन में मिश्रण को घुमाते हैं। कपड़े साफ करने के लिए रगड़ना (agitation) क्यों ज़रूरी है?
साबुन के अणुओं का हाइड्रोफोबिक (पूँछ) सिरा तैलीय गंदगी में घुस जाता है और हाइड्रोफिलिक (सिर) सिरा पानी की ओर रहता है — इस तरह गंदगी के चारों ओर मिसेल बन जाता है।
लेकिन यह मिसेल में फँसी गंदगी अभी भी कपड़े के रेशे से चिपकी हुई रहती है। इसे कपड़े से अलग करने के लिए यांत्रिक ऊर्जा चाहिए।
पीटना, रगड़ना या वॉशिंग मशीन में घुमाने से वही यांत्रिक बल मिलता है, जिससे गंदगी कपड़े से उखड़कर पानी में इमल्शन के रूप में तैरने लगती है और पानी के साथ बह जाती है। इसीलिए रगड़ना ज़रूरी है।

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अभ्यास प्रश्न — हल (Q1–Q15)
प्रश्न 1. एथेन, जिसका आण्विक सूत्र C2H6 है, में कितने सहसंयोजक बंध (covalent bonds) होते हैं? (a) 6 (b) 7 (c) 8 (d) 9
उत्तर: (b) 7 सहसंयोजक बंध
एथेन में 1 C–C बंध और 6 C–H बंध होते हैं (हर कार्बन 3 हाइड्रोजन से जुड़ा है)। कुल = 1 + 6 = 7 सहसंयोजक बंध।
प्रश्न 2. ब्यूटेनोन एक चार-कार्बन यौगिक है जिसका फंक्शनल ग्रुप है (a) कार्बोक्सिलिक एसिड (b) एल्डिहाइड (c) कीटोन (d) एल्कोहॉल।
उत्तर: (c) कीटोन
नाम के अंत में सफिक्स '-one' कीटोन ग्रुप (>C=O, चेन के बीच में) को दर्शाता है। ब्यूटेनोन की संरचना CH3–CO–CH2–CH3 है।
प्रश्न 3. खाना पकाते समय अगर बर्तन का पेंदा बाहर से काला हो जाए, तो इसका मतलब है (a) खाना पूरी तरह नहीं पका है (b) ईंधन पूरी तरह नहीं जल रहा (c) ईंधन गीला है (d) ईंधन पूरी तरह जल रहा है।
उत्तर: (b) ईंधन पूरी तरह नहीं जल रहा
ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने पर ईंधन का अपूर्ण दहन (incomplete combustion) होता है, जिससे बिना जले कार्बन कण (कालिख) निकलते हैं और बर्तन का पेंदा काला पड़ जाता है। गैस बर्नर के हवा वाले छेद बंद हो जाएँ तो ऐसा ही होता है — उन्हें साफ करने से फ्लेम फिर नीली हो जाती है।
प्रश्न 4. CH3Cl में बंध बनने के आधार पर सहसंयोजक बंध की प्रकृति समझाइए।
कार्बन के पास 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं, हाइड्रोजन के पास 1 और क्लोरीन के पास 7।
CH3Cl में कार्बन अपने 4 इलेक्ट्रॉनों में से:
- 3 इलेक्ट्रॉन तीन हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ साझा करता है → 3 C–H एकल सहसंयोजक बंध। हर हाइड्रोजन का ड्यूप्लेट (2 इलेक्ट्रॉन) पूरा हो जाता है।
- 1 इलेक्ट्रॉन क्लोरीन के साथ साझा करता है → 1 C–Cl एकल सहसंयोजक बंध। क्लोरीन का ऑक्टेट (8 इलेक्ट्रॉन) पूरा हो जाता है।
H – C(H)(H) – Cl (4 एकल सहसंयोजक बंध)
प्रकृति: इसमें कोई इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण नहीं होता, केवल साझाकरण (sharing) होता है — इसलिए यह सहसंयोजक बंध है। हर साझा जोड़ा दोनों परमाणुओं के नाभिक को आकर्षित करता है, जिससे मज़बूत बंध बनता है। चूँकि कोई आयन नहीं बनता, CH3Cl बिजली का चालन नहीं करता और इसका गलनांक/क्वथनांक कम होता है।
प्रश्न 5. निम्न के इलेक्ट्रॉन डॉट संरचना बनाइए: (a) एथेनोइक एसिड (b) H2S (c) प्रोपेनोन (d) F2।
(a) एथेनोइक एसिड, CH3COOH
पहला कार्बन 3 हाइड्रोजन से 3 एकल बंध बनाता है और दूसरे कार्बन से 1 एकल बंध। दूसरा कार्बन एक ऑक्सीजन से द्वि-बंध (2 साझा जोड़े) और दूसरी ऑक्सीजन से एकल बंध बनाता है; उस ऑक्सीजन से एक हाइड्रोजन जुड़ा होता है। द्वि-बंध वाले O पर 2 अकेले जोड़े, –OH वाले O पर 2 अकेले जोड़े।
CH3 – C(=O) – O – H
(b) H2S
सल्फर (2,8,6) के पास 6 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं। यह दो हाइड्रोजन के साथ 2 एकल बंध (2 साझा जोड़े) बनाता है और उसके पास 2 अकेले जोड़े बचते हैं।
H – S – H (S पर 2 अकेले जोड़े)
(c) प्रोपेनोन, CH3COCH3
बीच वाला कार्बन ऑक्सीजन के साथ द्वि-बंध बनाता है और दोनों तरफ के CH3 समूहों से एक-एक एकल बंध। ऑक्सीजन पर 2 अकेले जोड़े।
CH3 – C(=O) – CH3
(d) F2
फ्लोरीन (2,7) के पास 7 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं। दो फ्लोरीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन जोड़ा साझा करके एकल बंध बनाते हैं; हर F पर 3 अकेले जोड़े बचते हैं।
F – F (हर F पर 3 अकेले जोड़े)
प्रश्न 6. समजातीय श्रेणी (homologous series) क्या है? एक उदाहरण से समझाइए।
समजातीय श्रेणी ऐसे कार्बन यौगिकों की श्रेणी है जिसमें सभी सदस्यों में समान फंक्शनल ग्रुप होता है और हर सदस्य अपने पिछले सदस्य से –CH2 इकाई से बढ़ता है।
विशेषताएँ:
- क्रमागत सदस्यों के आण्विक द्रव्यमान का अंतर 14 u होता है।
- सभी सदस्यों के रासायनिक गुण समान होते हैं (क्योंकि फंक्शनल ग्रुप समान है)।
- भौतिक गुण (गलनांक, क्वथनांक, विलेयता) आण्विक द्रव्यमान बढ़ने के साथ धीरे-धीरे बदलते हैं।
- सभी को एक सामान्य सूत्र से दर्शाया जा सकता है।
उदाहरण — एल्केन श्रेणी (सामान्य सूत्र CnH2n+2):
| यौगिक | सूत्र | आण्विक द्रव्यमान (u) |
|---|---|---|
| मीथेन | CH4 | 16 |
| एथेन | C2H6 | 30 |
| प्रोपेन | C3H8 | 44 |
| ब्यूटेन | C4H10 | 58 |
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देखिए — हर बार अंतर 14 u का है।
प्रश्न 7. एथेनॉल और एथेनोइक एसिड को उनके भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर कैसे अलग किया जा सकता है?
भौतिक गुण:
| गुण | एथेनॉल (C2H5OH) | एथेनोइक एसिड (CH3COOH) |
|---|---|---|
| गंध | सुखद गंध | सिरके जैसी तीखी (pungent) गंध |
| गलनांक | 156 K | 290 K — सर्दियों में जम जाता है (ग्लेशियल एसिटिक एसिड) |
| क्वथनांक | 351 K | 391 K |
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रासायनिक गुण:
| टेस्ट | एथेनॉल | एथेनोइक एसिड |
|---|---|---|
| लिटमस टेस्ट | कोई असर नहीं (उदासीन) | नीले लिटमस को लाल कर देता है |
| NaHCO3 / Na2CO3 | कोई अभिक्रिया नहीं | तेज़ बुलबुले (brisk effervescence), CO2 गैस |
| सोडियम धातु | H2 गैस निकलती है | H2 गैस निकलती है (दोनों देते हैं, इसलिए यह विभेदक टेस्ट नहीं है) |
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CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑
सबसे अच्छा टेस्ट: सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट टेस्ट — केवल एथेनोइक एसिड बुलबुले देता है।
प्रश्न 8. पानी में साबुन डालने पर मिसेल (micelle) क्यों बनता है? क्या एथेनॉल जैसे अन्य विलायकों में भी मिसेल बनेगा?
साबुन के अणु के दो अलग-अलग सिरे होते हैं:
- आयनिक सिर (–COO–Na+) — हाइड्रोफिलिक, पानी में घुलता है।
- लंबी हाइड्रोकार्बन पूँछ — हाइड्रोफोबिक, पानी में नहीं घुलती पर तेल/चिकनाई में घुलती है।
जब साबुन पानी में डाला जाता है तो हाइड्रोकार्बन पूँछ पानी से दूर भागती है, इसलिए साबुन के अणु ऐसा गुच्छा (cluster) बना लेते हैं जिसमें पूँछ अंदर की ओर (तेल की ओर) और आयनिक सिर बाहर पानी की ओर होते हैं। इसी गोलाकार गुच्छे को मिसेल कहते हैं।
एथेनॉल में मिसेल नहीं बनेगा। एथेनॉल एक कार्बनिक विलायक है जिसमें साबुन की हाइड्रोकार्बन पूँछ आसानी से घुल जाती है। जब पूँछ विलायक से भागने की कोशिश नहीं करती, तो गुच्छा बनाने की कोई ज़रूरत ही नहीं रहती — इसलिए मिसेल नहीं बनता।
प्रश्न 9. कार्बन और उसके यौगिकों का उपयोग अधिकतर ईंधन के रूप में क्यों किया जाता है?
क्योंकि कार्बन और उसके यौगिक जलने पर बहुत अधिक ऊष्मा और प्रकाश देते हैं। इसके कारण:
- इनका कैलोरी मान (calorific value) उच्च होता है — थोड़ी सी मात्रा से काफी ऊर्जा मिलती है।
- ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई में ये पूरी तरह जलते हैं और सिर्फ CO2 और H2O देते हैं — धुआँ या अवशेष नहीं बचता।
- ये आसानी से उपलब्ध हैं (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, LPG, CNG) और इन्हें संभालना/संग्रहित करना आसान है।
- प्रज्वलन ताप उचित होता है — न इतना कम कि खुद आग पकड़ ले, न इतना ज़्यादा कि जलाना मुश्किल हो।
CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O + heat & light
प्रश्न 10. कठोर जल को साबुन से उपचारित करने पर स्कम (scum) बनने की व्याख्या कीजिए।
कठोर जल (hard water) में कैल्शियम (Ca2+) और मैग्नीशियम (Mg2+) आयनों के लवण घुले होते हैं।
साबुन सोडियम या पोटैशियम का लवण होता है — लंबी शृंखला वाले कार्बोक्सिलिक एसिड का। जब साबुन कठोर जल में डाला जाता है, तो साबुन के ऋणायन इन Ca2+/Mg2+ आयनों के साथ अभिक्रिया करके कैल्शियम और मैग्नीशियम के अघुलनशील लवण बना लेते हैं।
2C17H35COONa + CaCl2 → (C17H35COO)2Ca↓ + 2NaCl
यह अघुलनशील सफेद अवक्षेप पानी की सतह पर सफेद चिपचिपी परत की तरह जम जाता है — इसी को स्कम कहते हैं।
इसकी वजह से साबुन झाग (lather) नहीं दे पाता और काफी साबुन बर्बाद हो जाता है — कपड़े साफ करने के लिए ज़्यादा साबुन लगाना पड़ता है।
प्रश्न 11. साबुन को लिटमस पेपर (लाल और नीला) से जाँचने पर आप क्या परिवर्तन देखेंगे?
साबुन एक प्रबल क्षार (NaOH/KOH) और एक दुर्बल कार्बोक्सिलिक एसिड का लवण है। पानी में घुलने पर यह हाइड्रोलिसिस की वजह से क्षारीय (basic) विलयन देता है।
- लाल लिटमस पेपर → नीला हो जाएगा।
- नीला लिटमस पेपर → नीला ही रहेगा (कोई बदलाव नहीं)।
यही वजह है कि साबुन के विलयन का pH 7 से अधिक होता है और हाथ पर चिकना/फिसलन जैसा महसूस होता है।
प्रश्न 12. हाइड्रोजनीकरण (hydrogenation) क्या है? इसका औद्योगिक उपयोग क्या है?
हाइड्रोजनीकरण वह योगात्मक अभिक्रिया (addition reaction) है जिसमें असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में निकल या पैलेडियम उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन जोड़ा जाता है, जिससे वह संतृप्त बन जाता है।
CH2=CH2 + H2 Ni catalyst→ CH3–CH3
औद्योगिक उपयोग: वनस्पति तेलों को वनस्पति घी में बदलने के लिए। वनस्पति तेलों में असंतृप्त (द्वि-बंध वाली) लंबी शृंखलाएँ होती हैं और वे तरल होते हैं। निकल उत्प्रेरक के साथ हाइड्रोजन प्रवाहित करने पर ये संतृप्त हो जाते हैं और कमरे के तापमान पर ठोस वसा (solid fat) बन जाते हैं।
नोट: स्वास्थ्य के लिए असंतृप्त (वनस्पति) तेल बेहतर माने जाते हैं; संतृप्त वसा अधिक खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता।
प्रश्न 13. निम्नलिखित में से कौन-से हाइड्रोकार्बन योगात्मक अभिक्रिया (addition reaction) करते हैं: C2H6, C3H8, C3H6, C2H2 और CH4।
योगात्मक अभिक्रिया केवल असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (जिनमें द्वि-बंध या त्रि-बंध है) देते हैं।
| यौगिक | प्रकार | योगात्मक अभिक्रिया? |
|---|---|---|
| C2H6 (एथेन) | संतृप्त, CnH2n+2 | नहीं |
| C3H8 (प्रोपेन) | संतृप्त | नहीं |
| C3H6 (प्रोपीन) | असंतृप्त, CnH2n | हाँ |
| C2H2 (एथाइन) | असंतृप्त, CnH2n-2 | हाँ |
| CH4 (मीथेन) | संतृप्त | नहीं |
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उत्तर: C3H6 और C2H2 योगात्मक अभिक्रिया देते हैं। बाकी तीन संतृप्त हैं, वे प्रतिस्थापन अभिक्रिया (substitution reaction) देते हैं।
प्रश्न 14. मक्खन (butter) और खाना पकाने के तेल को रासायनिक रूप से अलग करने के लिए एक परीक्षण बताइए।
मक्खन में मुख्य रूप से संतृप्त वसा होती है, जबकि खाना पकाने के तेल में असंतृप्त वसा होती है। असंतृप्तता परीक्षण से दोनों को अलग किया जा सकता है।
टेस्ट 1 — ब्रोमीन जल परीक्षण: दोनों के नमूनों में अलग-अलग ब्रोमीन जल की कुछ बूँदें डालिए।
- खाना पकाने का तेल — ब्रोमीन जल का नारंगी/भूरा रंग हट जाता है (रंगहीन हो जाता है), क्योंकि द्वि-बंध पर ब्रोमीन जुड़ जाता है।
- मक्खन — रंग वैसा ही रहता है (संतृप्त होने के कारण योगात्मक अभिक्रिया नहीं होती)।
टेस्ट 2 — क्षारीय KMnO4 परीक्षण: खाना पकाने का तेल क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट का बैंगनी रंग रंगहीन कर देता है; मक्खन नहीं करता।
प्रश्न 15. साबुन की सफाई क्रिया (cleaning action) की क्रियाविधि समझाइए।
कपड़ों पर लगी अधिकतर गंदगी तेल या चिकनाई में फँसी होती है, और तेल पानी में घुलता नहीं — इसलिए सिर्फ पानी से गंदगी नहीं निकलती। साबुन का काम यहीं से शुरू होता है।
चरण 1 — साबुन की संरचना: साबुन के अणु के दो सिरे होते हैं — एक हाइड्रोफोबिक हाइड्रोकार्बन पूँछ (तेल में घुलने वाली) और एक हाइड्रोफिलिक आयनिक सिर –COO–Na+ (पानी में घुलने वाला)।
चरण 2 — मिसेल निर्माण: पानी में डालते ही साबुन के अणुओं की पूँछें तैलीय गंदगी के अंदर घुस जाती हैं और आयनिक सिर बाहर पानी की ओर रहते हैं। इस तरह तेल की बूँद के चारों ओर एक गोलाकार गुच्छा बन जाता है — मिसेल।
चरण 3 — रगड़ना (agitation): पीटना, रगड़ना या वॉशिंग मशीन की रगड़ से मिसेल में फँसी गंदगी कपड़े से अलग होकर पानी में आ जाती है।
चरण 4 — इमल्शन और धोना: मिसेल के बाहर के आयनिक सिर एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं, इसलिए तेल की बूँदें फिर से आपस में नहीं जुड़तीं और पानी में इमल्शन के रूप में तैरती रहती हैं। साफ पानी से धोते ही यह सारी गंदगी बह जाती है और कपड़ा साफ हो जाता है।
महत्वपूर्ण समीकरण — एक नज़र में
| अवधारणा / यौगिक | सूत्र / अभिक्रिया | याद रखने की बात |
|---|---|---|
| एल्केन (संतृप्त) | CnH2n+2 | केवल एकल बंध, प्रतिस्थापन अभिक्रिया |
| एल्कीन | CnH2n | एक द्वि-बंध, योगात्मक अभिक्रिया |
| एल्काइन | CnH2n-2 | एक त्रि-बंध, योगात्मक अभिक्रिया |
| चक्रीय संतृप्त (रिंग) | CnH2n | साइक्लोपेंटेन C5H10, साइक्लोहेक्सेन C6H12 |
| समजातीय श्रेणी का अंतर | –CH2, द्रव्यमान अंतर 14 u | रासायनिक गुण समान रहते हैं |
| मीथेन का दहन | CH4 + 2O2 → CO2 + 2H2O | स्वच्छ नीली लौ |
| एथेनॉल का ऑक्सीकरण | CH3CH2OH Alk. KMnO4, Δ→ CH3COOH | ऑक्सीजन जुड़ता है, हाइड्रोजन हटता है |
| हाइड्रोजनीकरण | C2H4 + H2 Ni→ C2H6 | तेल → वनस्पति घी |
| प्रतिस्थापन (क्लोरीनीकरण) | CH4 + Cl2 Sunlight→ CH3Cl + HCl | संतृप्त हाइड्रोकार्बन की अभिक्रिया |
| एथेनॉल + सोडियम | 2Na + 2C2H5OH → 2C2H5ONa + H2↑ | सोडियम एथॉक्साइड + हाइड्रोजन गैस |
| एथेनॉल का निर्जलीकरण | C2H5OH Conc. H2SO4, 443 K→ C2H4 + H2O | H2SO4 = निर्जलीकारक |
| एस्टरीकरण | CH3COOH + C2H5OH Conc. H2SO4→ CH3COOC2H5 + H2O | मीठी गंध वाला एस्टर |
| साबुनीकरण | CH3COOC2H5 + NaOH → CH3COONa + C2H5OH | साबुन बनाने की अभिक्रिया |
| एसिड + क्षार | CH3COOH + NaOH → CH3COONa + H2O | उदासीनीकरण |
| एसिड + कार्बोनेट | 2CH3COOH + Na2CO3 → 2CH3COONa + H2O + CO2↑ | तेज़ बुलबुले — एसिड का टेस्ट |
| एसिड + हाइड्रोजनकार्बोनेट | CH3COOH + NaHCO3 → CH3COONa + H2O + CO2↑ | एल्कोहॉल बनाम एसिड पहचानने का टेस्ट |
| स्कम निर्माण | 2C17H35COONa + CaCl2 → (C17H35COO)2Ca↓ + 2NaCl | कठोर जल में झाग नहीं बनता |
| ग्लेशियल एसिटिक एसिड | शुद्ध CH3COOH, 290 K पर जमता है | सर्दियों में जम जाता है |
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सामान्य गलतियाँ — यहाँ अंक कटते हैं
- एथेन के बंध गिनने में गलती। छात्र सिर्फ C–H बंध गिन लेते हैं और बीच वाला C–C बंध भूल जाते हैं — जवाब 6 लिख देते हैं। सही जवाब 7 है (1 C–C + 6 C–H)। हमेशा कार्बन कंकाल पहले बनाओ, फिर हाइड्रोजन जोड़ो।
- नामकरण में अंतिम 'e' न हटाना। जब सफिक्स स्वर (vowel) से शुरू हो (-ol, -al, -one, -oic acid), तब मूल शृंखला का अंतिम 'e' हटता है। propane + one = propanone, 'propaneone' नहीं। लेकिन हैलोजन प्रत्यय (chloro-, bromo-) में कुछ नहीं हटता — 'chloroethane' सही है।
- सोडियम धातु टेस्ट से एल्कोहॉल और एसिड को अलग करना। यह गलत है — एथेनॉल और एथेनोइक एसिड दोनों सोडियम के साथ H2 गैस देते हैं। विभेदक टेस्ट हमेशा NaHCO3/Na2CO3 है (सिर्फ एसिड बुलबुले देता है) या लिटमस टेस्ट।
- अभिक्रिया की परिस्थितियाँ (conditions) लिखना भूल जाना। तीर के ऊपर उत्प्रेरक/तापमान न लिखने पर अंक कट जाते हैं। हाइड्रोजनीकरण में Ni, एस्टरीकरण में सांद्र H2SO4, निर्जलीकरण में सांद्र H2SO4 + 443 K, प्रतिस्थापन में सूर्य का प्रकाश, ऑक्सीकरण में क्षारीय KMnO4 + ऊष्मा — ये ज़रूरी हैं।
- कठोर जल टेस्ट के लिए डिटर्जेंट बता देना। डिटर्जेंट कठोर और मृदु दोनों पानी में झाग देता है, इसलिए उससे कठोरता का पता नहीं चलता। कठोरता सिर्फ साबुन से जाँची जाती है — कठोर जल में स्कम बनता है, झाग नहीं।
- समावयवियों में एक ही संरचना दो बार लिख देना। पेंटेन के 3 समावयवी पूछे जाने पर छात्र शृंखला को मोड़कर (bend करके) चौथा 'समावयवी' बना देते हैं — पर सिर्फ मोड़ने से संरचना नहीं बदलती। समावयवी तभी अलग है जब कार्बन कंकाल का जुड़ाव पैटर्न अलग हो। पेंटेन = 3, ब्यूटेन = 2, हेक्सेन = 5।
बोर्ड-शैली महत्वपूर्ण प्रश्न
- 1 अंक: किसी एक गुण का नाम बताओ जिसकी वजह से कार्बन बहुत सारे यौगिक बना पाता है, और उसे एक पंक्ति में परिभाषित करो।
- 1 अंक: शुद्ध एथेनोइक एसिड को 'ग्लेशियल एसिटिक एसिड' क्यों कहते हैं?
- 2 अंक: एथेनॉल और एथेनोइक एसिड को रासायनिक रूप से अलग करने का एक टेस्ट उसकी अभिक्रिया के साथ लिखो।
- 3 अंक: हाइड्रोजनीकरण क्या है? उसकी अभिक्रिया लिखो और एक औद्योगिक उपयोग बताओ।
- 3 अंक: समजातीय श्रेणी क्या है? उसकी तीन विशेषताएँ लिखो और एल्केन श्रेणी का उदाहरण दो।
- 5 अंक: (a) साबुन की सफाई क्रिया मिसेल निर्माण की मदद से समझाओ। (b) कठोर जल में साबुन झाग क्यों नहीं देता? अभिक्रिया लिखो। (c) डिटर्जेंट कठोर जल में काम क्यों कर लेता है?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कार्बन आयनिक बंध क्यों नहीं बनाता?
कार्बन के पास 4 संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं। 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके C4- बनाने के लिए 6 प्रोटॉन को 10 इलेक्ट्रॉन धारण करने होंगे, जो मुश्किल है। 4 इलेक्ट्रॉन त्यागकर C4+ बनाने के लिए बहुत ज़्यादा ऊर्जा चाहिए। दोनों रास्ते व्यावहारिक नहीं हैं, इसलिए कार्बन इलेक्ट्रॉन साझा करता है — यानी सहसंयोजक बंध बनाता है।
संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में सबसे आसान फर्क क्या है?
संतृप्त में केवल एकल C-C बंध होते हैं (एल्केन, CnH2n+2) और वे नीली स्वच्छ लौ के साथ जलते हैं, प्रतिस्थापन अभिक्रिया देते हैं। असंतृप्त में द्वि-बंध या त्रि-बंध होता है (एल्केन CnH2n, एल्काइन CnH2n-2), वे पीली धुएँदार लौ देते हैं और योगात्मक अभिक्रिया देते हैं। प्रयोगशाला में परीक्षण: असंतृप्त यौगिक ब्रोमीन जल का रंग हटा देता है, संतृप्त नहीं।
आइसोमर्स कैसे गिने जाते हैं — कोई तरीका है?
पहले सबसे लंबी सीधी शृंखला बनाइए, वह एक आइसोमर। फिर शृंखला एक कार्बन छोटी कीजिए और बचा हुआ CH3 समूह अलग-अलग स्थानों पर लगाइए (शृंखला के अंतिम कार्बन पर मत लगाइए, क्योंकि वह वही सीधी शृंखला बन जाएगी)। ऐसे ही आगे बढ़िए। मीथेन, एथेन और प्रोपेन के कोई आइसोमर नहीं होते। ब्यूटेन = 2, पेंटेन = 3, हेक्सेन = 5।
एथेनॉल और मेथेनॉल में क्या फर्क है?
एथेनॉल C2H5OH है — दो कार्बन वाला एल्कोहॉल, दवाओं और टिंक्चर में विलायक के रूप में इस्तेमाल होता है। मेथेनॉल CH3OH है — एक कार्बन वाला और बहुत ज़्यादा विषैला। मेथेनॉल लीवर में ऑक्सीकृत होकर मेथेनल बनाता है जो कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है, जिससे अंधापन और मृत्यु तक हो सकती है। इसीलिए औद्योगिक स्पिरिट में मेथेनॉल मिलाया जाता है — उसे विकृत स्पिरिट (denatured spirit) कहते हैं ताकि कोई पी न सके।
मिसेल असल में क्या होता है?
मिसेल साबुन के अणुओं का एक गोलाकार गुच्छा है जो पानी में बनता है। इसके अंदर की ओर सारी हाइड्रोकार्बन पूँछें होती हैं जो तैलीय गंदगी को पकड़ लेती हैं, और बाहर की ओर आयनिक सिर होते हैं जो पानी में घुले रहते हैं। इसी वजह से तेल, जो पानी में घुलता ही नहीं, मिसेल के अंदर फँसकर पानी के साथ बह जाता है।
एस्टरीकरण और साबुनीकरण में क्या फर्क है?
एस्टरीकरण में कार्बोक्सिलिक एसिड और एल्कोहॉल सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में मिलकर मीठी गंध वाला एस्टर और पानी बनाते हैं। साबुनीकरण इसका उल्टा है — एस्टर को सोडियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर वापस एल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक एसिड का सोडियम लवण मिलता है, और वही सोडियम लवण ही साबुन है। इसीलिए साबुनीकरण को साबुन बनाने की अभिक्रिया कहते हैं।
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