NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 10 (Hindi Medium) – The Human Eye and the Colourful World

Class 10 Science · Chapter 10 · हिंदी माध्यम

The Human Eye and the Colourful World
17 प्रश्न हल किए गए4 इन-टेक्स्ट + 13 अभ्यास प्रश्नCBSE 2026–27मुफ़्त · लॉगिन ज़रूरी नहीं

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संक्षिप्त उत्तर:

इस अध्याय के complete NCERT solutions यहाँ हैं — 4 अंतर्पाठ्य प्रश्न (page-end set) और 13 अभ्यास प्रश्न, सब NCERT के मूल क्रम में। Coverage: मानव नेत्र की संरचना और समंजन क्षमता, निकट बिंदु और दूर बिंदु, तीनों सामान्य दोष (myopia, hypermetropia, presbyopia) उनके सुधार सहित, लेंस क्षमता के 4 numericals (−5.5 D / +1.5 D फोकस दूरी, दूर बिंदु 80 cm, निकट बिंदु 1 m, और 1.2 m दूर बिंदु वाला अंतर्पाठ्य numerical), काँच के प्रिज्म से अपवर्तन और वर्ण-विक्षेपण, स्पेक्ट्रम का पुनर्संयोजन (recombination), इंद्रधनुष, वायुमंडलीय अपवर्तन (तारों का टिमटिमाना, सूर्योदय जल्दी और सूर्यास्त देर से), और प्रकाश का प्रकीर्णन (Tyndall effect, नीला आकाश, लाल सूर्य, अंतरिक्ष यात्री को काला आकाश)। साथ में दृष्टि-दोष संदर्भ सारणी, 6 सामान्य परीक्षा गलतियाँ, बोर्ड-शैली अभ्यास प्रश्न और 6 FAQs।

मानव नेत्र (human eye) एक प्राकृतिक कैमरा है जिसका लेंस अपनी वक्रता (curvature) बदलकर फोकस दूरी (focal length) परिवर्तित करता है — और जब यही समायोजन विफल हो जाता है, तब चश्मे (spectacles) की आवश्यकता पड़ती है।

यह अध्याय दो भागों में चलता है। पहला भाग आँख का है: नेत्र लेंस कैसे सिलियरी पेशियों (ciliary muscles) की मदद से फोकस दूरी बदलता है (समंजन क्षमता / power of accommodation), और जब यह तंत्र विफल होता है तो myopia, hypermetropia या presbyopia बन जाता है — जिनका सुधार अवतल (concave) या उत्तल (convex) लेंस से होता है। दूसरा भाग "रंगबिरंगा संसार" (colourful world) का है: प्रिज्म से श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (dispersion), इंद्रधनुष (rainbow), वायुमंडल की वजह से होने वाला अपवर्तन (तारों का टिमटिमाना, सूर्य का वास्तविक सूर्योदय से ~2 मिनट पहले दिखाई देना) और प्रकाश का प्रकीर्णन (scattering) (आकाश नीला क्यों, डूबता हुआ सूर्य लाल क्यों)।

Numerical की दृष्टि से पूरा अध्याय एक ही सूत्र पर टिका है — लेंस सूत्र से फोकस दूरी निकालो और P = 1/f (f मीटर में) से क्षमता। चिह्न परिपाटी (sign convention) ही असली अंक तय करती है: अवतल लेंस की क्षमता हमेशा ऋणात्मक (minus), उत्तल लेंस की हमेशा धनात्मक (plus)

अध्याय 10 सारांश — 5 मिनट रिवीजन

1. मानव नेत्र — संरचना और कार्य

  • कॉर्निया (Cornea) — आँख के आगे का पारदर्शी उभार। प्रकाश जब वायु से कॉर्निया में प्रवेश करता है तो सबसे अधिक अपवर्तन (refraction) यहीं होता है (maximum bending)।
  • आइरिस (Iris) — रंगीन भाग; पुतली के आकार को नियंत्रित करता है, यानी कितनी रोशनी अंदर आएगी। तेज़ रोशनी में पुतली छोटी, अंधेरे में बड़ी।
  • पुतली (Pupil) — आइरिस के बीच का काला छिद्र जिससे प्रकाश अंदर जाता है।
  • नेत्र लेंस (Eye lens) — तंतुमय (fibrous), जेली जैसा उत्तल लेंस। यह प्रतिबिंब को तीक्ष्ण फोकस करता है और सूक्ष्म समायोजन (fine adjustment) देता है (पूरा मोड़ नहीं, वह कॉर्निया करता है)।
  • सिलियरी पेशियाँ (Ciliary muscles) — लेंस की वक्रता (curvature) बदलकर फोकस दूरी बदलती हैं।
  • रेटिना (Retina) — प्रकाश-संवेदी पर्दा जहाँ वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बनता है। इसमें rods (मंद प्रकाश) और cones (रंग) होते हैं।
  • दृक तंत्रिका (Optic nerve) — संकेत को मस्तिष्क तक ले जाती है; मस्तिष्क प्रतिबिंब को सीधा (erect) समझता है।

2. समंजन क्षमता (Power of accommodation)

  • नेत्र लेंस की फोकस दूरी समायोजित करने की क्षमता = समंजन क्षमता (power of accommodation)
  • दूर की वस्तु देखते समय: सिलियरी पेशियाँ ढीली (relaxed) → लेंस पतला → फोकस दूरी बड़ी
  • पास की वस्तु देखते समय: सिलियरी पेशियाँ सिकुड़ती (contract) → लेंस मोटा → फोकस दूरी छोटी
  • लेंस अपनी जगह नहीं बदलता (कैमरे की तरह आगे-पीछे नहीं खिसकता) — सिर्फ curvature बदलता है। प्रतिबिंब दूरी (लेंस से रेटिना) स्थिर रहती है।
  • फोकस दूरी एक सीमा से अधिक कम नहीं हो सकती, इसलिए 25 cm से पास की वस्तु सामान्य नेत्र स्पष्ट रूप से नहीं देख सकता।

3. निकट बिंदु और दूर बिंदु

  • निकट बिंदु (near point / least distance of distinct vision) = वह न्यूनतम दूरी जहाँ तक आँख बिना तनाव के स्पष्ट देख सकती है। सामान्य युवा वयस्क के लिए 25 cm
  • दूर बिंदु (far point) = अधिकतम दूरी जहाँ तक स्पष्ट दिखाई देता है। सामान्य नेत्र के लिए अनंत (infinity)
  • दृष्टि परास (range of vision) = 25 cm से अनंत तक।

4. दृष्टि दोष और उनका सुधार

  • निकट-दृष्टि दोष (Myopia / near-sightedness) — पास की वस्तु दिखती है, दूर की धुंधली। दूर बिंदु अनंत से कम हो जाता है। प्रतिबिंब रेटिना से पहले बनता है। कारण: नेत्र लेंस की curvature अधिक (फोकस दूरी कम) या नेत्रगोलक लंबा हो जाना। सुधार: अवतल (diverging) लेंस जिसकी फोकस दूरी = व्यक्ति का दूर बिंदु (ऋण चिह्न के साथ)। क्षमता ऋणात्मक
  • दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia / far-sightedness) — दूर की वस्तु दिखती है, पास की धुंधली। निकट बिंदु 25 cm से दूर चला जाता है। प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। कारण: फोकस दूरी अधिक लंबी या नेत्रगोलक छोटा। सुधार: उत्तल (converging) लेंस, क्षमता धनात्मक
  • जरा-दृष्टि दोष (Presbyopia) — उम्र के साथ सिलियरी पेशियाँ कमज़ोर + लेंस की लचीलापन कम → समंजन क्षमता घट जाती है। निकट बिंदु दूर खिसक जाता है। कभी-कभी myopia और hypermetropia दोनों एक साथ होते हैं — तब bi-focal लेंस लगता है: ऊपरी भाग अवतल (दूर के लिए), निचला भाग उत्तल (पढ़ने के लिए)।
  • आजकल इन दोषों को contact lenses या शल्य (laser) विधियों से भी ठीक किया जाता है।

5. काँच के प्रिज्म से अपवर्तन (Refraction through a glass prism)

  • प्रिज्म की दो अपवर्तक सतहों के बीच का कोण = प्रिज्म कोण (angle of prism, A)
  • किरण दो बार मुड़ती है — पहले प्रिज्म में प्रवेश करते समय अभिलंब की ओर, फिर बाहर निकलते समय अभिलंब से दूर।
  • आपाती किरण (incident ray) और निर्गत किरण (emergent ray) के बीच का कोण = विचलन कोण (angle of deviation, D)
  • काँच की सिल्ली (glass slab) में निर्गत किरण आपाती किरण के समांतर होती है, प्रिज्म में नहीं — क्योंकि प्रिज्म की दो सतहें समांतर नहीं होतीं। यही dispersion का कारण बनता है।

6. श्वेत प्रकाश का वर्ण-विक्षेपण (Dispersion of white light)

  • श्वेत प्रकाश का अपने सात घटक रंगों में विभाजित होना = वर्ण-विक्षेपण (dispersion)
  • स्पेक्ट्रम का क्रम: बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल (VIBGYOR)
  • कारण: अलग-अलग रंगों के लिए काँच का अपवर्तनांक अलग होता है, इसलिए हर रंग अलग कोण से मुड़ता है।
  • लाल सबसे कम मुड़ता है, बैंगनी सबसे अधिक। (लाल की तरंगदैर्घ्य सबसे बड़ी, बैंगनी की सबसे छोटी।)
  • न्यूटन का प्रयोग: एक प्रिज्म से स्पेक्ट्रम बनाया, फिर दूसरा प्रिज्म उल्टा रखकर सब रंगों को वापस मिला दिया → श्वेत प्रकाश। इससे सिद्ध हुआ कि सूर्य का प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना है।
  • इंद्रधनुष (Rainbow) = वर्षा के बाद हवा में लटके पानी की छोटी बूँदों में होने वाला प्राकृतिक स्पेक्ट्रम। बूँद में होता है: अपवर्तन → पूर्ण आंतरिक परावर्तन → फिर अपवर्तन। इंद्रधनुष हमेशा सूर्य की विपरीत दिशा में दिखाई देता है।

7. वायुमंडलीय अपवर्तन (Atmospheric refraction)

  • वायुमंडल की अलग-अलग परतों का तापमान और घनत्व अलग है, इसलिए अपवर्तनांक भी अलग है — और यह लगातार बदलता रहता है।
  • तारों का टिमटिमाना: तारा एक बिंदु स्रोत है। इसका प्रकाश वायुमंडल से गुज़रते समय निरंतर अपवर्तित होता है, इसलिए आभासी स्थिति और आभासी चमक थोड़ी-थोड़ी बदलती रहती है — कभी तेज़, कभी मंद → टिमटिमाना।
  • ग्रह नहीं टिमटिमाते: ग्रह पृथ्वी के बहुत पास है, इसलिए वह एक विस्तारित स्रोत (extended source) है = बहुत सारे बिंदु स्रोतों का समूह। सबके flickering का औसत शून्य हो जाता है, कुल चमक स्थिर रहती है।
  • सूर्योदय जल्दी और सूर्यास्त देर से: वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य हमें वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले दिखाई दे जाता है, और सूर्यास्त के ~2 मिनट बाद तक दिखाई देता रहता है — यानी दिन लगभग 4 मिनट लंबा लगता है। क्षितिज पर सूर्य की चकती (disc) चपटी (flattened) भी दिखाई देती है।

8. प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of light)

  • बहुत छोटे कणों से प्रकाश का हर दिशा में फैलना = प्रकीर्णन (scattering)
  • टिंडल प्रभाव (Tyndall effect) — कोलॉइड या निलंबन (suspension) से गुज़रते प्रकाश के पथ का दिखाई देना। उदाहरण: घने जंगल में पेड़ों के बीच से आती सूर्य की किरणों की beam, धुएँ भरे कमरे में छोटे छेद से आती रोशनी।
  • प्रकीर्णन की मात्रा कण के आकार पर निर्भर करती है: बहुत छोटे कण अधिकांशतः छोटी तरंगदैर्घ्य (नीला) प्रकीर्णित करते हैं, बड़े कण सभी तरंगदैर्घ्य प्रकीर्णित करते हैं (इसलिए रंग सफेद लगता है — जैसे बादल)।
  • आकाश नीला क्यों: हवा के अणु छोटे होते हैं — वे नीले (कम तरंगदैर्घ्य) को लाल से कहीं अधिक प्रकीर्णित करते हैं, और यही बिखरा हुआ नीला प्रकाश हमें हर तरफ से आता है।
  • अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला: ऊपर वायुमंडल नहीं है → प्रकीर्णन नहीं → आकाश काला।
  • सूर्योदय/सूर्यास्त पर सूर्य लाल: उस समय सूर्य के प्रकाश को वायुमंडल की सबसे लंबी परत पार करनी पड़ती है। नीला और छोटी तरंगदैर्घ्य वाला प्रकाश रास्ते में ही प्रकीर्णित हो जाता है, केवल लंबी तरंगदैर्घ्य वाला लाल प्रकाश हम तक पहुँचता है। दोपहर में सूर्य सिर के ऊपर होता है, पथ छोटा, कम प्रकीर्णन → सूर्य सफेद दिखाई देता है।
  • खतरे के संकेत लाल क्यों: लाल की तरंगदैर्घ्य सबसे लंबी → सबसे कम प्रकीर्णित होती है → कोहरे/धुंध में भी दूर से दिखाई देती है।

9. त्वरित पुनरावलोकन सारणी (Quick recap table)

परिघटना (Phenomenon)कारण
आकाश नीलाप्रकीर्णन (छोटे अणु नीला अधिक प्रकीर्णित करते हैं)
सूर्योदय/सूर्यास्त पर सूर्य लालप्रकीर्णन (लंबा पथ, नीला निकल जाता है)
तारों का टिमटिमानावायुमंडलीय अपवर्तन (बिंदु स्रोत)
सूर्योदय जल्दी / सूर्यास्त देर सेवायुमंडलीय अपवर्तन
इंद्रधनुषवर्ण-विक्षेपण + जल की बूँदों में आंतरिक परावर्तन
धुंध में प्रकाश की किरण दिखनाटिंडल प्रभाव (प्रकीर्णन)

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इन-टेक्स्ट प्रश्न — हल

प्रश्न 1. नेत्र की समंजन क्षमता (power of accommodation) से क्या तात्पर्य है?

समंजन क्षमता (power of accommodation) = नेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके द्वारा वह अपनी फोकस दूरी समायोजित कर लेता है, ताकि पास और दूर — दोनों की वस्तुएँ रेटिना पर स्पष्ट रूप से फोकस हो जाएँ।

यह कार्य सिलियरी पेशियाँ (ciliary muscles) करती हैं:

  • दूर की वस्तु देखते समय सिलियरी पेशियाँ ढीली (relax) हो जाती हैं → लेंस पतला → फोकस दूरी बढ़ जाती है।
  • पास की वस्तु देखते समय सिलियरी पेशियाँ सिकुड़ती (contract) हैं → लेंस मोटा → फोकस दूरी घट जाती है।

याद रखो — लेंस अपनी curvature बदलता है, अपनी स्थिति (position) नहीं। लेंस से रेटिना की दूरी स्थिर है।

प्रश्न 2. एक निकट-दृष्टि दोष (myopic) वाले व्यक्ति को 1.2 m से अधिक दूरी की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। सही दृष्टि पाने के लिए प्रयुक्त सुधारक लेंस किस प्रकार का होना चाहिए?

व्यक्ति निकट-दृष्टि दोषयुक्त (myopic) है — उसका दूर बिंदु 1.2 m है, अनंत नहीं। सुधार के लिए अवतल (diverging) लेंस चाहिए, जो अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिंब व्यक्ति के दूर बिंदु (1.2 m) पर बना दे। तब उसकी आँख उस प्रतिबिंब को आराम से देख लेगी।

दिया है: वस्तु अनंत पर, u = −∞; प्रतिबिंब दूर बिंदु पर, v = −1.2 m

ऐसे मामले में लेंस की फोकस दूरी = दूर बिंदु (ऋण चिह्न के साथ):

f = −1.2 m

P = 1/f = 1/(−1.2) = −0.83 D

उत्तर: अवतल लेंस, फोकस दूरी 1.2 m, क्षमता −0.83 D (लगभग)। ऋण चिह्न पुष्टि करता है कि लेंस अवतल है।

प्रश्न 3. सामान्य दृष्टि वाले मानव नेत्र का दूर बिंदु (far point) और निकट बिंदु (near point) क्या है?

सामान्य दृष्टि वाले नेत्र के लिए:

  • निकट बिंदु (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी) = 25 cm — इससे पास की वस्तु बिना तनाव के स्पष्ट नहीं दिखती।
  • दूर बिंदु = अनंत (infinity) — कितनी भी दूर की वस्तु स्पष्ट दिख सकती है।

यानी सामान्य नेत्र की दृष्टि परास 25 cm से अनंत तक है।

प्रश्न 4. एक विद्यार्थी को अंतिम पंक्ति में बैठकर श्यामपट्ट (blackboard) पढ़ने में कठिनाई होती है। बच्चे को कौन-सा दोष हो सकता है? इसे कैसे ठीक किया जा सकता है?

बच्चे को दूर की वस्तु (श्यामपट्ट) धुंधली दिखाई दे रही है, पास की वस्तु (कॉपी) ठीक दिखती है — यह निकट-दृष्टि दोष (myopia / near-sightedness / short-sightedness) है।

कारण: या तो नेत्र लेंस की curvature बढ़ गई है (फोकस दूरी बहुत कम), या नेत्रगोलक (eyeball) लंबा हो गया है। दोनों स्थितियों में दूर की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना से पहले बन जाता है।

सुधार: उपयुक्त क्षमता का अवतल (diverging) लेंस पहनाना। यह किरणों को रेटिना तक पहुँचने से पहले थोड़ा अपसरित (diverge) कर देता है, जिससे प्रतिबिंब पीछे खिसककर ठीक रेटिना पर बनता है।

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अभ्यास प्रश्न — हल (Q1–Q13)

प्रश्न 1. मानव नेत्र (human eye) विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं पर, नेत्र लेंस (eye lens) की फोकस दूरी को समंजित करके, फोकस कर सकता है। यह किसके कारण होता है? (a) presbyopia (b) accommodation (c) निकट-दृष्टि (near-sightedness) (d) दूर-दृष्टि (far-sightedness)

उत्तर: (b) accommodation (समंजन क्षमता)

Ciliary muscles लेंस की curvature बदलकर focal length adjust करते हैं — इसी क्षमता को power of accommodation कहते हैं। बाकी तीनों options defects हैं, ability नहीं।

प्रश्न 2. मानव नेत्र वस्तु का प्रतिबिंब किस भाग पर बनाता है? (a) कॉर्निया (cornea) (b) आइरिस (iris) (c) पुतली (pupil) (d) रेटिना (retina)

उत्तर: (d) रेटिना (retina)

Retina light-sensitive screen है जहाँ वास्तविक और उल्टा (real aur inverted) प्रतिबिंब बनता है। कॉर्निया refraction करता है, आइरिस पुतली का आकार नियंत्रित करता है, पुतली सिर्फ एक opening है — प्रतिबिंब कोई नहीं बनाता।

प्रश्न 3. सामान्य दृष्टि वाले एक युवा वयस्क के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (least distance of distinct vision) लगभग कितनी होती है? (a) 25 m (b) 2.5 cm (c) 25 cm (d) 2.5 m

उत्तर: (c) 25 cm

यही निकट बिंदु (near point) है। इकाई से ध्यान से पढ़ो — 25 cm, 25 m नहीं।

प्रश्न 4. नेत्र लेंस की फोकस दूरी में परिवर्तन किसकी क्रिया के कारण होता है? (a) पुतली (pupil) (b) रेटिना (retina) (c) सिलियरी पेशियाँ (ciliary muscles) (d) आइरिस (iris)

उत्तर: (c) सिलियरी पेशियाँ (ciliary muscles)

Ciliary muscles सिकुड़कर या ढीली होकर लेंस की curvature (मोटाई) बदलते हैं, जिससे focal length बदलती है।

प्रश्न 5. एक व्यक्ति को दूर दृष्टि (distant vision) ठीक करने के लिए −5.5 डाइऑप्टर क्षमता वाले लेंस की आवश्यकता होती है। निकट दृष्टि (near vision) को ठीक करने के लिए उसे +1.5 डाइऑप्टर क्षमता वाले लेंस की आवश्यकता होती है। (i) दूर दृष्टि और (ii) निकट दृष्टि को ठीक करने के लिए आवश्यक लेंस की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।

(i) दूर दृष्टि (Distant vision)

दिया है: P = −5.5 D

P = 1/f ⇒ f = 1/P

f = 1/(−5.5) = −0.1818 m

f = −0.18 m = −18.2 cm (लगभग)। ऋणात्मक फोकस दूरी ⇒ अवतल लेंस (concave lens) — सही है, क्योंकि दूर दृष्टि का दोष myopia होता है।

(ii) निकट दृष्टि (Near vision)

दिया है: P = +1.5 D

f = 1/P = 1/(+1.5) = +0.667 m

f = +0.67 m = +66.7 cm (लगभग)। धनात्मक फोकस दूरी ⇒ उत्तल लेंस (convex lens) — निकट दृष्टि का दोष hypermetropia/presbyopia होता है।

टिप्पणी: इस व्यक्ति को दोनों दोष हैं, इसलिए व्यवहारिक रूप में bi-focal लेंस उपयोग होगा।

प्रश्न 6. एक निकट-दृष्टि दोष (myopic) वाले व्यक्ति का दूर बिंदु (far point) आँख के सामने 80 cm है। इस समस्या को ठीक करने के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति और क्षमता क्या है?

प्रकृति: myopia ठीक करने के लिए अवतल (concave) लेंस चाहिए।

दिया है:

  • वस्तु अनंत पर ⇒ u = −∞
  • प्रतिबिंब दूर बिंदु पर बनना चाहिए ⇒ v = −80 cm = −0.8 m

लेंस सूत्र:

1/v − 1/u = 1/f

1/(−0.8) − 1/(−∞) = 1/f

−1.25 − 0 = 1/f ⇒ f = −0.8 m

क्षमता:

P = 1/f = 1/(−0.8) = −1.25 D

उत्तर: अवतल लेंस, फोकस दूरी −0.8 m (−80 cm), क्षमता −1.25 D

प्रश्न 7. एक चित्र बनाकर दिखाइए कि हाइपरमेट्रोपिया (hypermetropia) को कैसे ठीक किया जाता है। एक हाइपरमेट्रोपिक नेत्र का निकट बिंदु 1 m है। इस दोष को ठीक करने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता क्या है? मान लीजिए सामान्य नेत्र का निकट बिंदु 25 cm है।

चित्र (describe करके बनाओ): तीन भाग बनाओ — (a) hypermetropic नेत्र: 25 cm पर रखी वस्तु की किरणें रेटिना के पीछे converge होती दिखाओ; (b) दोष का कारण; (c) ठीक किया गया नेत्र: आँख के सामने एक उत्तल लेंस (convex lens) लगाओ जो 25 cm वाली वस्तु का आभासी प्रतिबिंब (virtual image) 1 m पर (आँख की ही तरफ) बनाता है, और अब आँख उस प्रतिबिंब को रेटिना पर फोकस कर लेती है।

दिया है:

  • वस्तु सामान्य निकट बिंदु पर ⇒ u = −25 cm = −0.25 m
  • प्रतिबिंब दोषयुक्त नेत्र के निकट बिंदु पर (आभासी, उसी ओर) ⇒ v = −100 cm = −1 m

लेंस सूत्र:

1/v − 1/u = 1/f

1/(−1) − 1/(−0.25) = 1/f

−1 + 4 = 1/f ⇒ 1/f = 3

f = 1/3 m = +0.33 m = +33.3 cm

क्षमता:

P = 1/f = 1/(1/3) = +3.0 D

उत्तर: +3.0 D क्षमता का उत्तल लेंस (फोकस दूरी +0.33 m)।

प्रश्न 8. सामान्य नेत्र 25 cm से पास रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से क्यों नहीं देख पाता?

वस्तु जितनी पास आती है, उसका प्रतिबिंब रेटिना पर फोकस करने के लिए नेत्र लेंस की फोकस दूरी उतनी ही छोटी करनी पड़ती है — यानी सिलियरी पेशियों को और अधिक सिकुड़कर लेंस को और मोटा बनाना पड़ता है।

लेकिन सिलियरी पेशियों के सिकुड़ने की एक सीमा है। 25 cm के बाद लेंस की फोकस दूरी और कम नहीं हो पाती, इसलिए प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बनता — वह रेटिना के पीछे बनने लगता है और वस्तु धुंधली (blurred) दिखाई देती है। जबरदस्ती देखने की कोशिश में आँख में तनाव होता है।

इसी 25 cm को निकट बिंदु (near point) या स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कहते हैं।

प्रश्न 9. जब हम किसी वस्तु की आँख से दूरी बढ़ाते हैं, तो आँख में प्रतिबिंब दूरी (image distance) का क्या होता है?

आँख में प्रतिबिंब दूरी नहीं बदलती — वह स्थिर रहती है, क्योंकि नेत्र लेंस और रेटिना के बीच की दूरी स्थिर है। प्रतिबिंब हमेशा रेटिना पर ही बनना चाहिए।

जो चीज़ बदलती है वह है फोकस दूरी: वस्तु दूर जाते ही सिलियरी पेशियाँ ढीली हो जाती हैं, लेंस पतला हो जाता है और फोकस दूरी बढ़ जाती है — ताकि प्रतिबिंब फिर भी ठीक रेटिना पर ही बने।

(अगर प्रश्न को साधारण लेंस की तरह सोचें तो प्रतिबिंब का आकार छोटा हो जाता है, पर आँख में v स्थिर ही रहता है।)

प्रश्न 10. तारे क्यों टिमटिमाते (twinkle) हैं?

तारा बहुत दूर है, इसलिए वह हमें एक बिंदु स्रोत (point source of light) जैसा लगता है।

तारे का प्रकाश जब पृथ्वी के वायुमंडल से गुज़रता है तो हर परत का अपवर्तनांक (refractive index) अलग होने के कारण वह लगातार अपवर्तित (refract) होता रहता है, और वायुमंडल की स्थिति (तापमान, घनत्व) भी लगातार बदलती रहती है। इसलिए तारे की आभासी स्थिति (apparent position) थोड़ी-थोड़ी shift होती रहती है।

जब हम तक पहुँचने वाले प्रकाश की मात्रा बदलती है, तारा कभी थोड़ा bright लगता है कभी थोड़ा dim — यही टिमटिमाना (twinkling) है।

प्रश्न 11. समझाइए कि ग्रह (planets) क्यों नहीं टिमटिमाते।

ग्रह पृथ्वी के बहुत ज़्यादा पास हैं, इसलिए वे बिंदु स्रोत नहीं बल्कि विस्तारित स्रोत (extended source) की तरह व्यवहार करते हैं — यानी बहुत सारे बिंदु स्रोतों का समूह।

हर बिंदु स्रोत अपने आप flicker करता है, लेकिन सबके flickering का औसत शून्य (average nil) हो जाता है — किसी बिंदु की रोशनी कम हो रही होती है तो किसी की ज़्यादा। कुल परिणाम: ग्रह से आने वाली कुल रोशनी स्थिर रहती है, इसलिए ग्रह टिमटिमाते नहीं हैं

प्रश्न 12. सुबह जल्दी सूर्य लालिमायुक्त (reddish) क्यों दिखाई देता है?

सूर्योदय (और सूर्यास्त) के समय सूर्य क्षितिज (horizon) के पास होता है, इसलिए उसके प्रकाश को वायुमंडल की सबसे लंबी मोटाई पार करके हम तक आना पड़ता है।

इतने लंबे रास्ते में छोटी तरंगदैर्घ्य वाला नीला प्रकाश (blue light) अधिकांशतः प्रकीर्णित होकर निकल जाता है, और सिर्फ लंबी तरंगदैर्घ्य वाला लाल प्रकाश (red light) सीधा हम तक पहुँचता है — इसलिए सूर्य लाल/नारंगी दिखाई देता है।

इसके विपरीत, दोपहर में सूर्य सिर के ऊपर होता है, प्रकाश का वायुमंडलीय पथ सबसे छोटा होता है, प्रकीर्णन कम होता है — इसलिए सूर्य सफेद दिखाई देता है।

प्रश्न 13. किसी अंतरिक्ष यात्री (astronaut) को आकाश नीले के बजाय काला क्यों दिखाई देता है?

आकाश का नीला रंग प्रकाश के प्रकीर्णन (scattering of light) के कारण है — हवा के छोटे अणु नीले (कम तरंगदैर्घ्य) प्रकाश को अधिक प्रकीर्णित करते हैं, और वही बिखरा हुआ नीला प्रकाश हर तरफ से हम तक आता है।

अंतरिक्ष यात्री जब बहुत ऊँचाई पर या अंतरिक्ष में होता है, वहाँ वायुमंडल ही नहीं होता — प्रकीर्णन करने वाले अणु नहीं हैं। इसलिए उसके पास केवल वही प्रकाश पहुँचता है जो सीधा सूर्य या तारों से आ रहा हो, बाकी दिशा से कुछ नहीं आता — और आकाश काला दिखाई देता है।

महत्वपूर्ण समीकरण — एक नज़र में

दृष्टि दोष — संदर्भ सारणी (Defects of Vision — Reference Table)

दोष कारण प्रतिबिंब कहाँ बनता है सुधारक लेंस क्षमता का चिह्न
निकट-दृष्टि दोष (Myopia)
(near-sightedness)
दूर धुंधला
नेत्र लेंस की curvature अधिक (फोकस दूरी कम) या नेत्रगोलक लंबा रेटिना से पहले (आगे) अवतल (Concave) (diverging)
f = दूर बिंदु (− चिह्न के साथ)
ऋणात्मक (−)
दूर-दृष्टि दोष (Hypermetropia)
(far-sightedness)
पास धुंधला
नेत्र लेंस की फोकस दूरी अधिक लंबी या नेत्रगोलक छोटा रेटिना के पीछे उत्तल (Convex) (converging) धनात्मक (+)
जरा-दृष्टि दोष (Presbyopia)
(old-age vision)
सिलियरी पेशियाँ कमज़ोर + नेत्र लेंस की लचीलापन कम → समंजन क्षमता घट गई पास की वस्तु का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे उत्तल; अगर myopia भी हो तो bi-focal (ऊपर अवतल, नीचे उत्तल) धनात्मक (+) reading भाग के लिए

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मुख्य मान — सामान्य नेत्र

राशिमान
निकट बिंदु (स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी)25 cm (0.25 m)
दूर बिंदु (Far point)अनंत (∞)
दृष्टि परास (Range of vision)25 cm → अनंत
एक छोटे बच्चे का निकट बिंदु (लगभग)लगभग 7–8 cm
सूर्योदय जल्दी / सूर्यास्त देर से (वायुमंडलीय अपवर्तन)लगभग 2 मिनट दोनों तरफ
रेटिना पर प्रतिबिंबवास्तविक और उल्टा

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सूत्र (Formulas)

सूत्रप्रयोग / टिप्पणी
P = 1/fलेंस की क्षमता। f अवश्य मीटर में डालो। इकाई = डाइऑप्टर (D)
1/v − 1/u = 1/fलेंस सूत्र। चिह्न परिपाटी: u हमेशा ऋणात्मक, आभासी प्रतिबिंब (लेंस की उसी ओर) का v ऋणात्मक।
Myopia: f = −(दूर बिंदु मीटर में)वस्तु अनंत पर, प्रतिबिंब दूर बिंदु पर।
Hypermetropia: u = −0.25 m, v = −(निकट बिंदु मीटर में)वस्तु सामान्य निकट बिंदु पर, आभासी प्रतिबिंब दोषयुक्त निकट बिंदु पर।

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सामान्य गलतियाँ — यहाँ अंक कटते हैं

  1. Myopia और hypermetropia के लेंस उल्टे लिख देना। सबसे common गलती है। तरकीब याद रखो — Myopia = Minus = अवतल (concave)। Myopia में प्रतिबिंब रेटिना से पहले बन रहा है, तो किरणों को थोड़ा अपसरित (diverge) करना है → अवतल लेंस। Hypermetropia में प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बन रहा है, तो किरणों को और अभिसरित (converge) करना है → उत्तल लेंस, क्षमता धनात्मक।
  2. लेंस क्षमता का चिह्न या इकाई गलत। दो अलग गलतियाँ एक साथ होती हैं — (a) अवतल लेंस की क्षमता +1.25 D लिख देना (हमेशा −1.25 D होगी), और (b) फोकस दूरी cm में रखकर P = 1/f कर देना। P = 1/f में f मीटर में ही चाहिए। f = −80 cm को पहले −0.8 m बनाओ, तब P = −1.25 D। उत्तर के साथ D (डाइऑप्टर) लिखना मत भूलो।
  3. यह कहना कि नेत्र लेंस आगे-पीछे खिसककर फोकस करता है। यह कैमरे में होता है। मानव नेत्र में लेंस की स्थिति (position) स्थिर है — सिलियरी पेशियाँ लेंस की curvature (मोटाई) बदलती हैं, जिससे फोकस दूरी परिवर्तित होती है। प्रतिबिंब दूरी (लेंस से रेटिना) स्थिर रहती है।
  4. Dispersion और scattering को मिला देना। ये अलग phenomena हैं। Dispersion (वर्ण-विक्षेपण) = श्वेत प्रकाश का अपने रंगों में विभाजित होना क्योंकि हर रंग का अपवर्तनांक अलग है (प्रिज्म, इंद्रधनुष)। Scattering (प्रकीर्णन) = प्रकाश का छोटे कणों से हर दिशा में फैलना (नीला आकाश, लाल सूर्य, Tyndall effect)। "आकाश नीला है क्योंकि dispersion होता है" — यह गलत है।
  5. टिमटिमाने का कारण scattering बता देना। तारों का टिमटिमाना वायुमंडलीय अपवर्तन (atmospheric refraction) के कारण है (बदलता हुआ अपवर्तनांक → आभासी स्थिति और चमक बदलती है), scattering के कारण नहीं। इसी तरह सूर्योदय जल्दी होना भी अपवर्तन है, scattering नहीं।
  6. Hypermetropia numerical में u और v उल्टे रख देना। सही सेटअप: वस्तु सामान्य निकट बिंदु पर रखो → u = −25 cm; प्रतिबिंब दोषयुक्त नेत्र के निकट बिंदु पर बनाओ, और वह आभासी है इसलिए v भी ऋणात्मक → v = −100 cm। बहुत विद्यार्थी v को +100 cm (+1 m) लिख देते हैं, जिससे 1/f = 1 + 4 = 5 आ जाता है और उत्तर +5.0 D निकलता है — जबकि सही उत्तर +3.0 D है।

बोर्ड-शैली महत्वपूर्ण प्रश्न

नोट: ये CBSE बोर्ड के पैटर्न पर बने practice questions हैं। ये किसी एक साल का verified previous-year paper नहीं है। असली PYQ के लिए CBSE की official website या अपने school से past papers लें।
  • 1 अंक: मानव नेत्र में प्रतिबिंब किस भाग पर बनता है, और उसकी प्रकृति (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा) क्या होती है?
  • 2 अंक: Myopia और hypermetropia में दो अंतर लिखो — प्रतिबिंब कहाँ बनता है और सुधार के लिए कौन-सा लेंस उपयोग होता है।
  • 3 अंक: एक निकट-दृष्टि दोषयुक्त (myopic) व्यक्ति का दूर बिंदु 50 cm है। सुधार के लिए आवश्यक लेंस की प्रकृति, फोकस दूरी और क्षमता ज्ञात करो। किरण चित्र (ray diagram) भी बनाओ (दोष और सुधार दोनों)।
  • 3 अंक: प्रिज्म से श्वेत प्रकाश के वर्ण-विक्षेपण को नामांकित चित्र (labelled diagram) की सहायता से समझाओ। बताओ कि लाल प्रकाश सबसे कम और बैंगनी सबसे अधिक क्यों मुड़ता है, और न्यूटन ने recombination से क्या सिद्ध किया।
  • 5 अंक: (a) समंजन क्षमता (power of accommodation) क्या है और इसमें सिलियरी पेशियों की क्या भूमिका है? (b) एक hypermetropic नेत्र का निकट बिंदु 75 cm है — 25 cm पर पढ़ने के लिए आवश्यक लेंस की क्षमता ज्ञात करो। (c) सूर्यास्त के समय सूर्य लाल क्यों दिखाई देता है, जबकि दोपहर में सफेद?

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Myopia और hypermetropia में लेंस याद रखने का कोई आसान तरीका है?

हाँ — 'Myopia = Minus'। Myopia का सुधारक लेंस अवतल (concave) होता है और उसकी क्षमता हमेशा ऋणात्मक (minus) होती है। जो बचा, वह hypermetropia = उत्तल (convex) = plus। एक और तरीका: myopia में प्रतिबिंब रेटिना से पहले बन रहा है, तो उसे पीछे धकेलना है, इसके लिए किरणों को अपसरित (diverge) करो (अवतल लेंस)। Hypermetropia में प्रतिबिंब पीछे बन रहा है, तो उसे आगे लाना है, इसके लिए अभिसरित (converge) करो (उत्तल लेंस)।

P = 1/f में f cm में डाल सकते हैं क्या?

बिल्कुल नहीं। डाइऑप्टर की परिभाषा ही यह है कि f मीटर में हो। अगर f = 50 cm है तो पहले उसे 0.5 m बनाओ, फिर P = 1/0.5 = +2 D। अगर cm डालोगे तो उत्तर 100 गुना गलत आएगा — और यह numerical में सबसे ज़्यादा अंक काटने वाली गलती है।

Presbyopia और hypermetropia क्या एक ही चीज़ है?

नहीं। दोनों में पास की वस्तु धुंधली दिखती है और दोनों में उत्तल लेंस लगता है, इसलिए भ्रम होता है। पर कारण अलग है: hypermetropia नेत्रगोलक (eyeball) के छोटे होने या लेंस की फोकस दूरी लंबी होने से होता है और किसी भी उम्र में हो सकता है। Presbyopia उम्र बढ़ने से होता है — सिलियरी पेशियाँ कमज़ोर हो जाती हैं और लेंस की लचीलापन (flexibility) खत्म हो जाती है, यानी समंजन क्षमता (accommodation power) ही कम हो जाती है।

आकाश नीला है तो सूर्य डूबते समय लाल क्यों हो जाता है — दोनों में तो प्रकीर्णन ही है?

प्रकीर्णन दोनों में है, बस देखने का कोण अलग है। दिन में हम आकाश की तरफ देखते हैं और हमें वह नीला प्रकाश दिखता है जो प्रकीर्णित होकर बगल से हम तक आया। सूर्यास्त पर हम सीधा सूर्य की तरफ देखते हैं — और उस सीधी किरण-पुंज में से नीला प्रकाश लंबे वायुमंडलीय पथ में प्रकीर्णित होकर निकल चुका होता है, सिर्फ लाल बचा रहता है। इसलिए प्रकीर्णित प्रकाश नीला है पर संचरित (transmitted) प्रकाश लाल।

इंद्रधनुष (rainbow) में हमेशा लाल ऊपर और बैंगनी नीचे क्यों होता है?

जल की बूँद (water droplet) में प्रकाश पहले अपवर्तित होता है, फिर अंदर पूर्ण आंतरिक परावर्तन (total internal reflection) होता है, फिर बाहर निकलते समय दोबारा अपवर्तित होता है। इस प्रक्रिया में लाल प्रकाश बूँद से लगभग 42 डिग्री पर और बैंगनी लगभग 40 डिग्री पर आँख तक पहुँचता है। अधिक कोण वाला लाल प्रकाश ऊँची स्थिति वाली बूँदों से आता है, इसलिए primary rainbow में लाल चाप सबसे ऊपर और बैंगनी सबसे नीचे दिखाई देता है।

बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से कौन-से topics सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं?

व्यावहारिक रूप से हर साल दोहराए जाने वाले core topics: (1) समंजन क्षमता (power of accommodation) और सिलियरी पेशियों की भूमिका, (2) तीनों दोषों का कारण + सुधार + किरण चित्र (ray diagram), (3) लेंस क्षमता के numericals (P = 1/f), (4) dispersion और न्यूटन का recombination प्रयोग, (5) प्रकीर्णन-आधारित reasoning प्रश्न — नीला आकाश, लाल सूर्य, अंतरिक्ष यात्री को काला आकाश, खतरे का संकेत लाल — और (6) वायुमंडलीय अपवर्तन से तारों का टिमटिमाना और सूर्योदय जल्दी होना। चित्र (diagrams) ज़रूर अभ्यास करो, क्योंकि दोषों वाले प्रश्नों में चित्र अलग से माँगे जाते हैं।

Class 10 Science — सभी अध्याय (हिंदी)

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