NCERT Solutions Class 10 Science Chapter 6 (Hindi Medium) – Control and Coordination

Class 10 Science · Chapter 6 · हिंदी माध्यम

Control and Coordination
26 प्रश्न हल किए गए14 इन-टेक्स्ट + 12 अभ्यास प्रश्नCBSE 2026–27मुफ़्त · लॉगिन ज़रूरी नहीं

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संक्षिप्त उत्तर:

NCERT कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय 6 नियंत्रण एवं समन्वय (Control and Coordination) में कुल 14 इन-टेक्स्ट प्रश्न (तीन पेज-वार सेट — 5 + 5 + 4) और 12 अभ्यास प्रश्न हैं। अध्याय बताता है कि जीव अपने आस-पास के उद्दीपन (stimulus) को कैसे पहचानते हैं और उसकी अनुक्रिया (response) कैसे देते हैं। जंतुओं में यह काम दो तंत्र मिलकर करते हैं — तंत्रिका तंत्र (nervous system) (न्यूरॉन, प्रतिवर्ती चाप, मेरुरज्जु, मस्तिष्क के तीन भाग: अग्रमस्तिष्क, मध्यमस्तिष्क, पश्चमस्तिष्क) और अंतःस्रावी तंत्र (endocrine system) (हॉर्मोन जैसे थायरॉक्सिन, इंसुलिन, एड्रीनलिन, वृद्धि हॉर्मोन, टेस्टोस्टेरॉन, ईस्ट्रोजन)। पादपों में तंत्रिका तंत्र होता ही नहीं, इसलिए वहाँ समन्वय सिर्फ रासायनिक होता है — तत्क्षण गति (छुई-मुई की पत्ती, पानी के आने-जाने से) और वृद्धि-निर्भर गति यानी वृद्धि-अनुवर्तन (प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, जलानुवर्तन, रसायनानुवर्तन) साथ ही पादप हॉर्मोन (ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल)। प्रतिवर्ती क्रिया, प्रतिवर्ती चाप का सही क्रम, और तंत्रिकीय बनाम हॉर्मोनल तुलना — ये तीन चीज़ें परीक्षा में सबसे ज़्यादा पूछी जाती हैं।

नियंत्रण एवं समन्वय (control and coordination) का मतलब है — शरीर के अलग-अलग अंग आपस में बातचीत करके एक साथ, सही समय पर काम करें। आप गर्म प्लेट को छूते हो और हाथ अपने आप हट जाता है; एक पादप की प्रतान (tendril) किसी सहारे के चारों ओर लिपट जाती है — दोनों ही समन्वय हैं, बस क्रियाविधि अलग है। इस अध्याय में हम देखेंगे कि जंतुओं में यह काम विद्युत आवेग (तंत्रिका तंत्र) और रासायनिक संदेशवाहक (हॉर्मोन) दोनों से होता है, जबकि पादप सिर्फ रासायनिक मार्ग पर चलते हैं।

अध्याय 6 सारांश — 5 मिनट रिवीजन

1. उद्दीपन (Stimulus) और अनुक्रिया (Response)

  • उद्दीपन = वातावरण में कोई भी परिवर्तन जिसे शरीर पहचान सकता है (प्रकाश, ध्वनि, ऊष्मा, स्पर्श, गंध, स्वाद, रसायन)।
  • अनुक्रिया = उस उद्दीपन पर शरीर की प्रतिक्रिया।
  • सजीव अपने वातावरण में घट रही घटनाओं से खुद को सुरक्षित रखने के लिए नियंत्रित गति करते हैं — और यह गति वृद्धि से जुड़ी भी हो सकती है और वृद्धि से स्वतंत्र भी।

2. तंत्रिका तंत्र — न्यूरॉन

न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) तंत्रिका तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है — शरीर की सबसे लंबी कोशिका।

  • डेंड्राइट — सूचना (आवेग) ग्रहण करता है। यहीं डेंड्राइट के सिरे पर रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत आवेग बनता है।
  • कोशिका काय (cell body) — आवेग को आगे भेजता है।
  • एक्सॉन — लंबा धागे जैसा भाग; आवेग को कोशिका काय से एक्सॉन के अंत तक ले जाता है।
  • तंत्रिका सिरा / एक्सॉन टर्मिनल — यहाँ विद्युत आवेग रसायन रिलीज़ करता है जो सिनैप्स को पार करते हैं।

3. सिनैप्स

दो न्यूरॉन्स के बीच का गैप सिनैप्स कहलाता है। एक न्यूरॉन का एक्सॉन-सिरा रसायन (न्यूरोट्रांसमीटर) रिलीज़ करता है, जो गैप पार करके अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट में वैसा ही नया विद्युत आवेग शुरू कर देता है। इसी तरह तंत्रिका और पेशी कोशिका के बीच भी समान संधि (junction) होती है — वहीं से पेशी को क्रिया का संकेत मिलता है। सिनैप्स आवेग को सिर्फ एक दिशा में जाने देता है।

4. प्रतिवर्ती क्रिया (Reflex Action) और प्रतिवर्ती चाप (Reflex Arc)

प्रतिवर्ती क्रिया = किसी उद्दीपन के प्रति अचानक, स्वचालित, अनैच्छिक अनुक्रिया — जैसे गर्म वस्तु छूते ही हाथ हटाना।

प्रतिवर्ती चाप का क्रम (याद रखें):

चरणक्या होता है
1. रिसेप्टरत्वचा/अंग में उद्दीपन पहचाना जाता है
2. संवेदी न्यूरॉनआवेग को मेरुरज्जु तक ले जाता है
3. रिले न्यूरॉन (मेरुरज्जु)संकेत को संवेदी से प्रेरक न्यूरॉन तक स्विच करता है
4. प्रेरक न्यूरॉनआवेग को प्रभावक तक ले जाता है
5. प्रभावक (पेशी/ग्रंथि)अनुक्रिया — पेशी सिकुड़ती है

↔ Table ko side me swipe karein

प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में ही पूरा हो जाता है — मस्तिष्क तक जाने का इंतज़ार नहीं करता, इसलिए अनुक्रिया इतनी तेज़ होती है। मस्तिष्क को सूचना ज़रूर जाती है (इसीलिए आपको दर्द महसूस होता है), पर निर्णय मेरुरज्जु ले चुका होता है।

5. मानव मस्तिष्क — तीन मुख्य भाग

भागशामिल हैंमुख्य कार्य
अग्रमस्तिष्कसेरिब्रमसोचने वाला भाग; सुनना, गंध, दृष्टि, स्वाद के अलग-अलग क्षेत्र; संवेदी सूचना की व्याख्या; ऐच्छिक क्रियाओं का निर्णय; भूख का केंद्र
मध्यमस्तिष्कअनैच्छिक क्रियाएँ जैसे पुतली के आकार में परिवर्तन, सिर की प्रतिवर्ती गति
पश्चमस्तिष्कसेरिबेलम, पॉन्स, मेडुलासेरिबेलम — मुद्रा और संतुलन, ऐच्छिक क्रिया की सटीकता; मेडुला — रक्तचाप, लार स्राव, वमन; पॉन्स — अनैच्छिक क्रियाएँ जैसे श्वसन का नियमन

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6. तंत्रिका ऊतक की सुरक्षा

  • मस्तिष्क कपाल (cranium) में बंद रहता है, अंदर मस्तिष्क-मेरु द्रव (cerebrospinal fluid) से भरी झिल्लियाँ शॉक अवशोषक (shock absorber) का काम करती हैं।
  • मेरुरज्जु कशेरुक स्तंभ (vertebral column/backbone) से सुरक्षित रहता है।

7. तंत्रिका ऊतक क्रिया कैसे करवाती है?

पेशी कोशिका में विशेष प्रोटीन होते हैं जो विद्युत आवेग मिलने पर अपना आकार और व्यवस्था बदल लेते हैं — कोशिका छोटी हो जाती है, यानी पेशी सिकुड़ जाती है। इसी से गति होती है।

8. पादपों में समन्वय — दो प्रकार की गतियाँ

प्रकारवृद्धि से स्वतंत्रवृद्धि-निर्भर (वृद्धि-अनुवर्तन)
उदाहरणछुई-मुई (Mimosa) की पत्ती छूने पर बंद होनाप्रतान का सहारे के चारों ओर लिपटना, प्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना
क्रियाविधिकोशिकाओं में पानी की मात्रा बदलने से आकार परिवर्तन — प्रतिवर्तनीयएक ओर अधिक वृद्धि — स्थायी, वापस नहीं होता
गतितेज़धीमी
दिशाउद्दीपन की दिशा से स्वतंत्रउद्दीपन की दिशा से तय

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9. वृद्धि-अनुवर्तन गतियाँ (Tropic movements)

  • प्रकाशानुवर्तन — प्रकाश के प्रत्युत्तर में। प्ररोह धनात्मक प्रकाशानुवर्ती, जड़ ऋणात्मक प्रकाशानुवर्ती।
  • गुरुत्वानुवर्तन — गुरुत्व के प्रत्युत्तर में। जड़ धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती, प्ररोह ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती।
  • जलानुवर्तन — पानी के प्रत्युत्तर में। जड़ें पानी की ओर बढ़ती हैं।
  • रसायनानुवर्तन — रसायन के प्रत्युत्तर में। उदाहरण: पराग नलिका (pollen tube) का बीजांड (ovule) की ओर बढ़ना।

नैस्टिक गति (जैसे छुई-मुई की पत्ती) दिशा-स्वतंत्र होती है — इसलिए वह वृद्धि-अनुवर्तन नहीं है।

10. पादप हॉर्मोन (फाइटोहॉर्मोन)

  • ऑक्सिन — प्ररोह शीर्ष में संश्लेषित होता है; कोशिका दीर्घीकरण करवाता है। प्रकाश पड़ने पर ऑक्सिन छायादार ओर विसरित हो जाता है, वहाँ कोशिकाएँ अधिक लंबी होती हैं, इसलिए पादप प्रकाश की ओर झुक जाता है।
  • जिबरेलिन — तने की वृद्धि में मदद।
  • साइटोकाइनिन — कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है; जहाँ तेज़ी से कोशिका विभाजन हो रहा हो (फल, बीज) वहाँ अधिक सांद्रता।
  • एब्सिसिक अम्ल (ABA) — वृद्धि को अवरोधित करता है; पत्तियों का मुरझाना इसी का प्रभाव है।

11. जंतुओं में हॉर्मोन — अंतःस्रावी तंत्र

  • अंतःस्रावी ग्रंथियाँ नलिकाविहीन (ductless) होती हैं — हॉर्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं, रक्त उसे लक्ष्य अंग तक पहुँचाता है।
  • हॉर्मोन बहुत कम मात्रा में चाहिए होता है, पर समय और मात्रा दोनों सटीक होने चाहिए — इसलिए फीडबैक क्रियाविधि से स्राव नियंत्रित होता है। उदाहरण: रक्त में शर्करा बढ़ी → अग्न्याशय इंसुलिन अधिक बनाता है → शर्करा सामान्य → इंसुलिन स्राव कम।
  • आयोडीन थायरॉक्सिन बनाने के लिए आवश्यक है; कमी से घेंघा (goitre) हो सकता है।
  • वृद्धि हॉर्मोन की कमी से बौनापन (dwarfism), अधिक होने से गिगेंटिज्म।

12. तंत्रिकीय बनाम हॉर्मोनल नियंत्रण — त्वरित तुलना

बिंदुतंत्रिकीयहॉर्मोनल
माध्यमविद्युत आवेग + सिनैप्स पर रसायनरसायन (हॉर्मोन) रक्त के द्वारा
गतिबहुत तेज़धीमी
पहुँचसिर्फ वहाँ जहाँ तंत्रिका पहुँचती हैरक्त के द्वारा पूरे शरीर में
प्रभाव की अवधिअल्पकालिकलंबे समय तक चलता है
अनुक्रियाबिंदु-से-बिंदु, स्थानीयकृतव्यापक

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इन-टेक्स्ट प्रश्न — हल

प्रश्न 1. प्रतिवर्ती क्रिया (reflex action) और चलने (walking) में क्या अंतर है?

प्रतिवर्ती क्रिया किसी उद्दीपन के प्रति एक अचानक, स्वचालित और अनैच्छिक अनुक्रिया है जिसे हम सचेत रूप से नियंत्रित नहीं करते। इसका नियंत्रण मेरुरज्जु (spinal cord) के प्रतिवर्ती चाप (reflex arc) से होता है — संकेत मस्तिष्क तक जाने का इंतज़ार नहीं करता। उदाहरण: पिन चुभने पर हाथ झटक देना।

चलना एक ऐच्छिक क्रिया है — यह सचेत सोच के साथ होता है और इसका नियंत्रण अग्रमस्तिष्क (सेरिब्रम) करता है, जबकि सेरिबेलम इसकी सटीकता और संतुलन संभालता है। आप चलना कब शुरू करना है, कब रुकना है — यह तय कर सकते हो; प्रतिवर्त में यह विकल्प नहीं होता।

प्रश्न 2. दो न्यूरॉन्स के बीच सिनैप्स पर क्या होता है?

सिनैप्स दो न्यूरॉन्स के बीच का एक छोटा-सा गैप है। पहले न्यूरॉन के एक्सॉन टर्मिनल पर पहुँचते ही विद्युत आवेग एक रसायन (न्यूरोट्रांसमीटर) रिलीज़ करवाता है। यह रसायन गैप को पार करके अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट पर पहुँचता है और वहाँ वैसा ही नया विद्युत आवेग शुरू कर देता है।

इसका एक बड़ा फायदा यह है कि आवेग सिर्फ एक ही दिशा में यात्रा करता है — क्योंकि रसायन सिर्फ एक्सॉन-सिरे से रिलीज़ होता है, डेंड्राइट से नहीं।

प्रश्न 3. मस्तिष्क का कौन-सा भाग शरीर की मुद्रा (posture) और संतुलन (equilibrium) बनाए रखता है?

सेरिबेलम — जो पश्चमस्तिष्क का भाग है। यही शरीर की मुद्रा और संतुलन बनाए रखता है और ऐच्छिक क्रियाओं की सटीकता भी संभालता है। इसीलिए सेरिबेलम क्षतिग्रस्त होने पर सीधे चलना या साइकिल चलाना मुश्किल हो जाता है।

प्रश्न 4. हम अगरबत्ती की गंध कैसे पहचानते हैं?

अगरबत्ती के रसायन हवा में फैलते हैं और नाक में मौजूद घ्राण रिसेप्टर उन्हें पहचानते हैं। ये रिसेप्टर एक विद्युत आवेग उत्पन्न करते हैं, जो संवेदी न्यूरॉन के द्वारा अग्रमस्तिष्क के गंध वाले क्षेत्र तक जाता है। अग्रमस्तिष्क उस सूचना की व्याख्या करता है — तब जाकर हमें "अगरबत्ती की खुशबू" महसूस होती है।

प्रश्न 5. प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की क्या भूमिका है?

प्रतिवर्ती क्रिया का निर्णय मस्तिष्क नहीं लेता — वह मेरुरज्जु के प्रतिवर्ती चाप में ही हो जाता है, इसलिए अनुक्रिया इतनी तेज़ होती है। लेकिन मेरुरज्जु से सूचना मस्तिष्क तक भी भेजी जाती है। मस्तिष्क उस सूचना की व्याख्या करता है — इसी वजह से हमें दर्द या गर्मी महसूस होती है, और हम उस स्थिति को याद रखते हैं और आगे के लिए सोच-समझकर कदम उठा पाते हैं।

दूसरे शब्दों में: प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में पूरा होता है, मस्तिष्क को सिर्फ सूचना मिलती है — भले ही अनुक्रिया के बाद।

प्रश्न 1. पादप हॉर्मोन क्या हैं?

पादप हॉर्मोन (फाइटोहॉर्मोन) वे रासायनिक पदार्थ हैं जो पादपों में बहुत कम मात्रा में बनते हैं और वृद्धि, विकास तथा वातावरण की अनुक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ये पादप के एक भाग में बनकर दूसरे भागों तक विसरण (diffusion) से पहुँचते हैं (पादपों में रक्त जैसा परिवहन तंत्र नहीं होता)।

मुख्य उदाहरण: ऑक्सिन (कोशिका दीर्घीकरण), जिबरेलिन (तने की वृद्धि), साइटोकाइनिन (कोशिका विभाजन), और एब्सिसिक अम्ल (वृद्धि को अवरोधित करता है)।

प्रश्न 2. सेंसिटिव प्लांट (छुई-मुई) की पत्तियों की गति प्रकाश की ओर प्ररोह की गति से किस प्रकार भिन्न है?
बिंदुछुई-मुई की पत्तीप्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना
प्रकारनैस्टिक — वृद्धि-स्वतंत्र गतिवृद्धि-अनुवर्तन (प्रकाशानुवर्तन) — वृद्धि-निर्भर
उद्दीपनस्पर्शप्रकाश
दिशाउद्दीपन की दिशा से कोई संबंध नहींउद्दीपन की दिशा ही गति की दिशा तय करती है
क्रियाविधिकोशिकाओं का पानी ग्रहण/त्याग कर आकार बदलनाएक ओर ऑक्सिन अधिक → वहाँ अधिक कोशिका दीर्घीकरण
गति व स्वभावबहुत तेज़, प्रतिवर्तनीय (reversible)धीमी, स्थायी

↔ Table ko side me swipe karein

प्रश्न 3. एक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दीजिए जो वृद्धि को बढ़ावा देता है।

ऑक्सिन — यह प्ररोह शीर्ष में बनता है और कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाकर (कोशिका दीर्घीकरण) वृद्धि को बढ़ावा देता है।

अन्य वृद्धि-प्रवर्तक हॉर्मोन: जिबरेलिन (तने की वृद्धि) और साइटोकाइनिन (कोशिका विभाजन)। वृद्धि को अवरोधित करने वाला हॉर्मोन एब्सिसिक अम्ल है — वह इस उत्तर में नहीं आएगा।

प्रश्न 4. ऑक्सिन किसी आधार (support) के चारों ओर प्रतान (tendril) की वृद्धि को कैसे बढ़ावा देता है?

जब प्रतान किसी आधार को छूता है, तो जो ओर आधार से स्पर्श में है वहाँ का ऑक्सिन हटकर दूसरी (आधार से दूर वाली) ओर चला जाता है। अधिक ऑक्सिन का मतलब है अधिक कोशिका दीर्घीकरण — इसलिए दूर वाली ओर की कोशिकाएँ तेज़ी से लंबी हो जाती हैं और स्पर्श वाली ओर की कोशिकाएँ छोटी रह जाती हैं।

दोनों ओर की वृद्धि में यह अंतर प्रतान को आधार की ओर मोड़ देता है — और वह धीरे-धीरे आधार के चारों ओर लिपट जाता है।

प्रश्न 5. जलानुवर्तन (hydrotropism) प्रदर्शित करने के लिए एक प्रयोग डिज़ाइन कीजिए।

उद्देश्य: यह दिखाना कि जड़ें पानी की दिशा में बढ़ती हैं (जलानुवर्तन)।

सामग्री: एक ट्रे/गमला, सूखी मिट्टी या बालू, कुछ बीज (जैसे मूँग/चना), पानी के लिए एक छोटा छिद्रयुक्त (porous) मिट्टी का बर्तन (या बीकर)।

विधि:

  • ट्रे में बालू/मिट्टी भरकर उसमें कुछ बीज बो दें।
  • बीजों से थोड़ा हटकर एक ओर, पानी से भरा छिद्रयुक्त बर्तन मिट्टी में गाड़ दें। बाकी मिट्टी को सीधे पानी न दें।
  • बीजों को अंकुरित होने दें और कुछ दिनों तक निरीक्षण करें।

प्रेक्षण: प्ररोह ऊपर (गुरुत्व के विरुद्ध) बढ़ता है, लेकिन जड़ें सीधे नीचे न जाकर पानी वाले बर्तन की ओर मुड़कर बढ़ती हैं।

निष्कर्ष: जड़ें पानी के उद्दीपन के प्रति धनात्मक अनुक्रिया करती हैं — यही जलानुवर्तन है।

प्रश्न 1. जंतुओं में रासायनिक समन्वय कैसे होता है?

जंतुओं में रासायनिक समन्वय हॉर्मोनों के द्वारा होता है। अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (जो नलिकाविहीन/ductless होती हैं) हॉर्मोन सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त इसे पूरे शरीर में ले जाता है, लेकिन हॉर्मोन सिर्फ अपने लक्ष्य अंग/ऊतक पर ही असर करता है क्योंकि वहीं उसके रिसेप्टर होते हैं।

उदाहरण: पीयूष ग्रंथि से वृद्धि हॉर्मोन, थायरॉइड से थायरॉक्सिन, अग्न्याशय से इंसुलिन, अधिवृक्क ग्रंथि से एड्रीनलिन। इनकी मात्रा फीडबैक क्रियाविधि से नियंत्रित होती है — जैसे रक्त शर्करा बढ़ने पर अग्न्याशय अधिक इंसुलिन बनाता है और शर्करा सामान्य होते ही स्राव कम कर देता है।

प्रश्न 2. आयोडीनयुक्त नमक का प्रयोग क्यों उचित है?

क्योंकि आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के लिए थायरॉक्सिन हॉर्मोन बनाने में आवश्यक है। थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा उपापचय को नियमित करता है।

अगर भोजन में आयोडीन कम हो तो थायरॉक्सिन कम बनेगा और थायरॉइड ग्रंथि बढ़ सकती है — इस स्थिति को घेंघा (goitre) कहते हैं (गले का सूजना)। आयोडीनयुक्त नमक का प्रयोग करने से यह कमी आसानी से रोकी जा सकती है।

प्रश्न 3. जब एड्रीनलिन रक्त में स्रावित होता है तो हमारा शरीर कैसे अनुक्रिया करता है?

एड्रीनलिन अधिवृक्क ग्रंथियों से सीधे रक्त में छूटता है और आपातकाल (डर, गुस्सा, उत्तेजना) में शरीर को क्रिया के लिए तैयार करता है। रक्त इसे हृदय और अन्य लक्ष्य अंगों तक ले जाता है। इसके प्रभाव:

  • हृदय गति तेज़ हो जाती है — पेशियों तक अधिक ऑक्सीजन पहुँचे।
  • पाचन तंत्र और त्वचा की रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त का अधिक हिस्सा कंकाल पेशियों की ओर विचलित हो जाता है।
  • डायाफ्राम और पसली की पेशियों की तेज़ गति से श्वसन दर बढ़ जाती है।

ये सब मिलकर शरीर को "लड़ो या भागो" (fight or flight) के लिए तैयार कर देते हैं।

प्रश्न 4. मधुमेह के कुछ रोगियों को इंसुलिन के इंजेक्शन देकर उपचार क्यों किया जाता है?

इंसुलिन अग्न्याशय बनाता है और यह रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। कुछ मधुमेह रोगियों में अग्न्याशय पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, इसलिए रक्त शर्करा अधिक रहती है — जो आगे चलकर कई अंगों को नुकसान पहुँचाती है।

ऐसे रोगियों को इंसुलिन इंजेक्शन से दिया जाता है। मुँह से नहीं दिया जाता क्योंकि इंसुलिन एक प्रोटीन है और पाचन तंत्र में पचकर बेकार हो जाता — इंजेक्शन से वह सीधे रक्त में पहुँचकर अपना काम करता है।

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अभ्यास प्रश्न — हल (Q1–Q12)

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से कौन-सा एक पादप हॉर्मोन है? (a) इंसुलिन (b) थायरॉक्सिन (c) ईस्ट्रोजन (d) साइटोकाइनिन

(d) साइटोकाइनिन

साइटोकाइनिन एक पादप हॉर्मोन है जो कोशिका विभाजन (cell division) को बढ़ावा देता है। इंसुलिन (अग्न्याशय), थायरॉक्सिन (थायरॉइड) और ईस्ट्रोजन (अंडाशय) — तीनों जन्तु हॉर्मोन हैं।

प्रश्न 2. दो न्यूरॉन्स के बीच के गैप को कहते हैं (a) डेंड्राइट (b) सिनैप्स (c) एक्सॉन (d) इम्पल्स

(b) सिनैप्स

सिनैप्स पर केमिकल रिलीज़ होकर गैप पार करता है और अगले न्यूरॉन में नया इम्पल्स शुरू करता है।

प्रश्न 3. मस्तिष्क (brain) उत्तरदायी है (a) सोचने के लिए (b) हृदय की धड़कन नियमित करने के लिए (c) शरीर का संतुलन बनाए रखने के लिए (d) उपरोक्त सभी

(d) उपरोक्त सभी

सोचना → अग्रमस्तिष्क (सेरिब्रम); हृदय की धड़कन और रक्तचाप जैसी अनैच्छिक क्रियाएँ → मेडुला (पश्चमस्तिष्क); संतुलन → सेरिबेलम। ये तीनों ही मस्तिष्क के कार्य हैं।

प्रश्न 4. हमारे शरीर में रिसेप्टर्स का क्या कार्य है? उन स्थितियों के बारे में सोचिए जहाँ रिसेप्टर्स ठीक से काम न करें। इससे क्या समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं?

कार्य: रिसेप्टर विशेष कोशिकाएँ/सिरे (tips) होते हैं जो वातावरण से सूचना को पहचानते हैं और उसे विद्युत आवेग (electrical impulse) में बदलकर संवेदी न्यूरॉन (sensory neuron) के द्वारा केंद्रीय तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाते हैं। ये अधिकतर ज्ञानेंद्रियों में पाए जाते हैं:

  • फोटोरिसेप्टर — आँख, प्रकाश
  • फोनोरिसेप्टर — कान, ध्वनि (और संतुलन भी)
  • घ्राण (olfactory) रिसेप्टर — नाक, गंध
  • स्वाद (gustatory) रिसेप्टर — जीभ, स्वाद
  • ताप/स्पर्श रिसेप्टर — त्वचा, ऊष्मा और स्पर्श

अगर रिसेप्टर ठीक से काम न करें: उद्दीपन (stimulus) का पता ही नहीं चलेगा, इसलिए अनुक्रिया (response) भी नहीं बनेगी। शरीर समय रहते खतरे से नहीं बच पाएगी — जैसे गर्म वस्तु को छूने पर हाथ नहीं हटेगा और जल जाएगा, या खराब भोजन की गंध/स्वाद का पता नहीं चलेगा।

उदाहरण स्थिति: मधुमेह (diabetes) के कुछ रोगियों में तंत्रिका क्षति (neuropathy) के कारण पैरों के रिसेप्टर काम करना कम कर देते हैं — उन्हें चोट या जलन का पता ही नहीं चलता और घाव बढ़ जाता है।

प्रश्न 5. एक न्यूरॉन की संरचना बनाइए और उसका कार्य समझाइए।

संरचना (लेबल करने वाले भाग): डेंड्राइट → कोशिका काय (nucleus सहित) → एक्सॉन → तंत्रिका सिरे/एक्सॉन टर्मिनल्स। (चित्र में ये चारों लेबल अवश्य लिखें — अंक इन्हीं पर मिलते हैं।)

कार्य — इम्पल्स की यात्रा:

  • डेंड्राइट के सिरे पर सूचना ग्रहण होती है और एक रासायनिक अभिक्रिया से विद्युत आवेग बनता है।
  • यह आवेग डेंड्राइट से कोशिका काय तक आता है।
  • कोशिका काय से एक्सॉन के द्वारा आवेग एक्सॉन के अंतिम सिरे तक यात्रा करता है।
  • एक्सॉन के अंत पर विद्युत आवेग एक रसायन (chemical) रिलीज़ करवाता है, जो सिनैप्स के गैप को पार करके अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट में वैसा ही नया आवेग शुरू कर देता है।
  • इसी तरह आवेग अंततः पेशी कोशिका या ग्रंथि (प्रभावक/effector) तक पहुँचकर अनुक्रिया करवाता है।
प्रश्न 6. पादपों में प्रकाशानुवर्तन (phototropism) कैसे होता है?

प्रकाशानुवर्तन = प्रकाश के प्रति पादप की वृद्धि-निर्भर (growth-dependent) गति। प्ररोह (shoot) प्रकाश की ओर मुड़ता है (धनात्मक प्रकाशानुवर्तन), जड़ (root) प्रकाश से दूर (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन)।

क्रियाविधि: प्ररोह के शीर्ष पर ऑक्सिन बनता है। जब प्रकाश एक ओर से आता है तो ऑक्सिन प्ररोह की छायादार ओर (जहाँ प्रकाश कम पड़ रहा है) की ओर विसरित (diffuse) हो जाता है। ऑक्सिन कोशिका दीर्घीकरण (cell elongation) करवाता है, इसलिए छायादार ओर की कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं और प्रकाश वाली ओर की कोशिकाएँ छोटी रह जाती हैं।

दोनों ओर की इस असमान वृद्धि के कारण प्ररोह प्रकाश की ओर झुक जाता है। यह गति धीमी और स्थायी होती है।

प्रश्न 7. मेरुरज्जु (spinal cord) की चोट की स्थिति में कौन-कौन से संकेत बाधित होंगे?

मेरुरज्जु शरीर और मस्तिष्क के बीच का मुख्य मार्ग है, और प्रतिवर्ती चाप (reflex arc) भी वहीं पूरा होता है। चोट लगने पर:

  • संवेदी संकेत (sensory signals) — शरीर से मस्तिष्क की ओर जाने वाली सूचना (स्पर्श, दर्द, तापमान) बाधित होगी।
  • प्रेरक संकेत (motor signals) — मस्तिष्क से पेशियों की ओर जाने वाले निर्देश बाधित होंगे, इसलिए ऐच्छिक गति प्रभावित होगी।
  • प्रतिवर्ती क्रियाएँ (reflex actions) — चोट के स्तर से नीचे के प्रतिवर्त काम करना बंद या कम कर देंगे, क्योंकि प्रतिवर्ती चाप का रिले न्यूरॉन मेरुरज्जु में ही होता है।
प्रश्न 8. पादपों में रासायनिक समन्वय (chemical coordination) कैसे होता है?

पादपों में न तो तंत्रिका तंत्र होता है, न ही पेशी कोशिकाएँ — इसलिए उनका पूरा समन्वय रासायनिक होता है, यानी पादप हॉर्मोन (फाइटोहॉर्मोन) के द्वारा।

  • हॉर्मोन पादप के एक भाग में बनता है और विसरण (diffusion) से दूसरे भागों तक पहुँचता है।
  • ऑक्सिन — कोशिका दीर्घीकरण; प्रकाशानुवर्तन और प्रतान (tendril) के लिपटने के पीछे यही है।
  • जिबरेलिन — तने की वृद्धि।
  • साइटोकाइनिन — कोशिका विभाजन; फलों और बीजों जैसे तेज़ी से विभाजित होने वाले क्षेत्रों में अधिक।
  • एब्सिसिक अम्ल — वृद्धि को अवरोधित करता है; पत्तियों का मुरझाना (wilting) इसी का प्रभाव है।

इसके अलावा तत्क्षण अनुक्रियाओं (जैसे छुई-मुई की पत्ती) में कोशिकाएँ अपने अंदर का पानी घटाकर-बढ़ाकर आकार बदल लेती हैं — यह भी रासायनिक/विद्युत-रासायनिक संकेत से ही ट्रिगर होता है।

प्रश्न 9. किसी जीव में नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र की आवश्यकता क्यों है?

किसी भी बहुकोशिकीय जीव में अलग-अलग अंग अलग-अलग कार्य करते हैं। अगर वे आपस में तालमेल न रखें तो शरीर एक इकाई की तरह काम ही नहीं कर पाएगा। नियंत्रण एवं समन्वय तंत्र:

  • वातावरण के परिवर्तनों (उद्दीपनों) को पहचानकर सही और समय पर अनुक्रिया देता है — जिससे जीव खुद को खतरे से बचा सके।
  • सभी अंगों और तंत्रों के कार्य को आपस में समन्वित (synchronise) करता है।
  • शरीर के आंतरिक वातावरण को स्थिर रखता है — जैसे रक्त शर्करा, शरीर का तापमान, रक्तचाप (होमियोस्टेसिस)।
  • वृद्धि, विकास और जनन को नियंत्रित करता है।
प्रश्न 10. अनैच्छिक क्रियाएँ और प्रतिवर्ती क्रियाएँ एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
बिंदुअनैच्छिक क्रियाप्रतिवर्ती क्रिया
नियंत्रण केंद्रमध्यमस्तिष्क और पश्चमस्तिष्क (मेडुला, पॉन्स)मेरुरज्जु (प्रतिवर्ती चाप) — मस्तिष्क के सोचने का इंतज़ार नहीं
उद्दीपनज़रूरी नहीं कि बाहर से कोई अचानक उद्दीपन हो; ये लगातार चलती रहती हैंहमेशा किसी अचानक बाह्य उद्दीपन के प्रत्युत्तर में
स्वभावनिरंतर और नियमितअचानक, एक बार की, बहुत तेज़
उदाहरणहृदय की धड़कन, श्वसन, पाचन का क्रमाकुंचन (peristalsis), रक्तचाप का नियमनगर्म वस्तु छूते ही हाथ हटाना, पिन चुभने पर झटका, तेज़ प्रकाश में पुतली का सिकुड़ना

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नोट: दोनों ही हमारे सचेत नियंत्रण में नहीं होते — फर्क नियंत्रण केंद्र और उद्दीपन के प्रतिरूप का है।

प्रश्न 11. जंतुओं में नियंत्रण एवं समन्वय के लिए तंत्रिकीय (nervous) और हॉर्मोनल क्रियाविधियों की तुलना कीजिए।

समानता: दोनों ही शरीर के अलग-अलग भागों को सूचना भेजकर समन्वय करते हैं, और दोनों में रासायनिक संदेशवाहकों (chemical messengers) की भूमिका है (तंत्रिका तंत्र में सिनैप्स पर)।

बिंदुतंत्रिकीय क्रियाविधिहॉर्मोनल क्रियाविधि
संदेशवाहकविद्युत आवेग (सिनैप्स पर रसायन)हॉर्मोन (रसायन)
परिवहनन्यूरॉन्स के द्वारारक्त के द्वारा
गतिबहुत तेज़धीमी
पहुँचसिर्फ वहीं जहाँ तंत्रिका तंतु पहुँचता है — बिंदु से बिंदु तकपूरे शरीर में, पर प्रभाव सिर्फ लक्ष्य अंग पर
प्रभाव की अवधिबहुत कमलंबे समय तक चलता है
पुनः दोहरावन्यूरॉन को अगला आवेग भेजने से पहले अपनी कोशिका को रीसेट करना पड़ता हैऐसी सीमा नहीं
नियंत्रणमस्तिष्क और मेरुरज्जुअंतःस्रावी ग्रंथियाँ, फीडबैक क्रियाविधि से

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प्रश्न 12. छुई-मुई (सेंसिटिव प्लांट) की गति और हमारे पैरों की गति में क्या अंतर है?
बिंदुछुई-मुई की पत्तीहमारे पैर की गति
स्वभावअनैच्छिक — स्पर्श के प्रत्युत्तर में अपने आपऐच्छिक — हम निर्णय लेकर करते हैं
सम्मिलित तंत्रकोई तंत्रिका तंत्र नहीं, कोई पेशी ऊतक नहींतंत्रिका तंत्र + पेशियाँ
संकेतकोशिका-से-कोशिका विद्युत-रासायनिक संकेत; कोई विशेष तंत्रिका ऊतक नहींमस्तिष्क से प्रेरक न्यूरॉन के द्वारा विद्युत आवेग
क्रियाविधिकोशिकाएँ अपने अंदर का पानी छोड़कर आकार और साइज़ बदल लेती हैं, इसलिए पत्ती मुड़ जाती हैपेशी कोशिकाओं में विशेष प्रोटीन आकार/व्यवस्था बदलते हैं, पेशी सिकुड़ती है
वापसी (reversal)पानी वापस आने पर पत्ती अपनी सामान्य स्थिति में लौट आती हैपेशी शिथिल होकर वापस सामान्य हो जाती है

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महत्वपूर्ण समीकरण — एक नज़र में

जंतु हॉर्मोन — संदर्भ तालिका

हॉर्मोनग्रंथि / स्रोतमुख्य कार्यकमी / असामान्यता
वृद्धि हॉर्मोन (Growth hormone)पीयूष ग्रंथि (Pituitary gland)शरीर की समग्र वृद्धि और विकास को नियमित करता हैकमी से बौनापन (dwarfism); बचपन में अधिक होने से गिगेंटिज्म
थायरॉक्सिनथायरॉइड ग्रंथि (आयोडीन आवश्यक)कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा उपापचय का नियमन — संतुलित वृद्धि के लिएआयोडीन/थायरॉक्सिन की कमी से घेंघा (goitre)
इंसुलिनअग्न्याशय (Pancreas)रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित (कम) करता हैकमी से रक्त शर्करा अधिक — मधुमेह
एड्रीनलिनअधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland)आपातकालीन हॉर्मोन — हृदय गति और श्वसन तेज़, रक्त पेशियों की ओर विचलित (fight-or-flight)
टेस्टोस्टेरॉनवृषण (पुरुष)पुरुष द्वितीयक लैंगिक लक्षण — आवाज़ का भारी होना, चेहरे के बाल
ईस्ट्रोजनअंडाशय (महिला)महिला द्वितीयक लैंगिक लक्षण — स्तन विकास, शरीर के आकार में परिवर्तन

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पादप हॉर्मोन — संदर्भ तालिका

हॉर्मोनकहाँ बनता हैमुख्य कार्ययाद रखने वाली बात
ऑक्सिनप्ररोह शीर्ष (apex)कोशिका दीर्घीकरण — कोशिकाएँ लंबी होती हैंप्रकाशानुवर्तन और प्रतान के लिपटने के पीछे यही है
जिबरेलिनपादप ऊतकतने की वृद्धि में सहायकवृद्धि प्रवर्तक
साइटोकाइनिनतेज़ी से कोशिका विभाजन वाले क्षेत्र — फल, बीजकोशिका विभाजन को बढ़ावा देता हैवृद्धि प्रवर्तक
एब्सिसिक अम्ल (ABA)पादप ऊतकवृद्धि को अवरोधित करता हैपत्तियों का मुरझाना इसका प्रभाव — एकमात्र अवरोधक जो NCERT में है

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वृद्धि-अनुवर्तन गतियाँ (Tropic movements) — एक-पंक्ति तालिका

गतिउद्दीपनप्ररोहजड़
प्रकाशानुवर्तनप्रकाशधनात्मक (प्रकाश की ओर)ऋणात्मक
गुरुत्वानुवर्तनगुरुत्वऋणात्मक (ऊपर)धनात्मक (नीचे)
जलानुवर्तनजलधनात्मक (पानी की ओर)
रसायनानुवर्तनरसायनउदाहरण: पराग नलिका का बीजांड की ओर बढ़ना

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सामान्य गलतियाँ — यहाँ अंक कटते हैं

  1. प्रतिवर्ती चाप (reflex arc) का क्रम उलटा लिख देना। सही क्रम है — रिसेप्टर → संवेदी न्यूरॉन → रिले न्यूरॉन (मेरुरज्जु) → प्रेरक न्यूरॉन → प्रभावक (पेशी)। बहुत से छात्र बीच में मस्तिष्क घुसा देते हैं या संवेदी-प्रेरक को अदल-बदल कर देते हैं। याद रखें: प्रतिवर्ती चाप मेरुरज्जु में ही पूरा होता है; मस्तिष्क को सूचना बाद में ही मिलती है।
  2. वृद्धि-अनुवर्तन (tropism) के धनात्मक/ऋणात्मक को उलटा कर देना। प्ररोह: प्रकाश की ओर (धनात्मक प्रकाशानुवर्तन) और गुरुत्व के विरुद्ध (ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्तन)। जड़: प्रकाश से दूर (ऋणात्मक प्रकाशानुवर्तन) और गुरुत्व की ओर (धनात्मक गुरुत्वानुवर्तन), पानी की ओर (धनात्मक जलानुवर्तन)। ट्रिक — जड़ नीचे और पानी की ओर, प्ररोह ऊपर और प्रकाश की ओर।
  3. छुई-मुई की पत्ती को प्रकाशानुवर्तन/वृद्धि-अनुवर्तन कह देना। वह नैस्टिक गति है — वृद्धि-स्वतंत्र, दिशा-स्वतंत्र, प्रतिवर्तनीय, कोशिकाओं के पानी घटने-बढ़ने से। वृद्धि-अनुवर्तन हमेशा वृद्धि-निर्भर और उद्दीपन की दिशा से तय होता है। परीक्षा में यह अंतर वाला प्रश्न हर साल किसी न किसी रूप में आता है।
  4. आयोडीन और थायरॉक्सिन को एक ही चीज़ समझना। आयोडीन एक तत्व है जो भोजन से मिलता है; थायरॉक्सिन हॉर्मोन है जो थायरॉइड ग्रंथि आयोडीन का उपयोग करके बनाती है। सही कथन: आयोडीन की कमी → थायरॉक्सिन कम → घेंघा। यह मत लिखें कि "आयोडीन की कमी से आयोडीन हॉर्मोन कम हो जाता है"।
  5. इंसुलिन और एड्रीनलिन के कार्य मिला देना। इंसुलिन = अग्न्याशय से, रक्त शर्करा कम करता है, कमी से मधुमेह होता है। एड्रीनलिन = अधिवृक्क ग्रंथि से, आपातकालीन हॉर्मोन, हृदय गति और श्वसन तेज़ करता है। दोनों अलग ग्रंथियाँ, अलग कार्य — एक उपापचय का नियामक है, दूसरा आपातकाल का।
  6. पादप हॉर्मोन की सूची में एब्सिसिक अम्ल को वृद्धि-प्रवर्तक लिख देना। ऑक्सिन, जिबरेलिन और साइटोकाइनिन वृद्धि को बढ़ावा देते हैं; एब्सिसिक अम्ल अकेला अवरोधक है (पत्तियों का मुरझाना)। और "वृद्धि-प्रवर्तक पादप हॉर्मोन का उदाहरण दो" वाले प्रश्न में इंसुलिन/थायरॉक्सिन जैसे जंतु हॉर्मोन बिल्कुल न लिखें — यह MCQ का पसंदीदा जाल (trap) है।

बोर्ड-शैली महत्वपूर्ण प्रश्न

नोट: ये CBSE बोर्ड के पैटर्न पर बने practice questions हैं। ये किसी एक साल का verified previous-year paper नहीं है। असली PYQ के लिए CBSE की official website या अपने school से past papers लें।
  • 1 अंक: दो न्यूरॉन्स के बीच के गैप को क्या कहते हैं, और वहाँ आवेग एक ही दिशा में क्यों यात्रा करता है?
  • 1 अंक: निम्नलिखित में से पादप हॉर्मोन चुनिए — इंसुलिन, थायरॉक्सिन, ईस्ट्रोजन, साइटोकाइनिन।
  • 2 अंक: प्रकाशानुवर्तन और गुरुत्वानुवर्तन में अंतर लिखिए, एक-एक उदाहरण के साथ।
  • 3 अंक: प्रतिवर्ती चाप का लेबल किया हुआ पथ लिखिए और समझाइए कि प्रतिवर्ती क्रिया में निर्णय मेरुरज्जु क्यों लेता है, मस्तिष्क क्यों नहीं।
  • 5 अंक: मानव मस्तिष्क के तीन मुख्य भागों के नाम लिखिए और उनके कार्य बताइए। साथ ही बताइए कि मस्तिष्क और मेरुरज्जु की सुरक्षा कैसे होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रतिवर्ती क्रिया (reflex action) और अनैच्छिक क्रिया (involuntary action) एक ही चीज़ है क्या?

नहीं। दोनों ही हमारे सचेत नियंत्रण में नहीं होते, पर प्रतिवर्ती क्रिया किसी अचानक बाह्य उद्दीपन का बहुत तेज़ प्रत्युत्तर है और मेरुरज्जु के प्रतिवर्ती चाप से नियंत्रित होती है। अनैच्छिक क्रिया जैसे हृदय की धड़कन और श्वसन लगातार चलती रहती हैं और मध्यमस्तिष्क/पश्चमस्तिष्क (मेडुला, पॉन्स) उन्हें नियंत्रित करता है।

प्रतिवर्ती क्रिया में मस्तिष्क की भूमिका है भी या नहीं?

निर्णय मस्तिष्क नहीं लेता — वह मेरुरज्जु में ही हो जाता है, इसलिए अनुक्रिया इतनी तेज़ होती है। लेकिन मेरुरज्जु सूचना मस्तिष्क तक ज़रूर भेजता है। इसी कारण आपको दर्द महसूस होता है और आप उस अनुभव को याद रखते हो।

पादपों में तंत्रिका तंत्र नहीं है तो वे उद्दीपन का प्रत्युत्तर कैसे देते हैं?

पादप विद्युत-रासायनिक संकेतों और रासायनिक हॉर्मोनों का उपयोग करते हैं। तेज़ अनुक्रिया में कोशिकाएँ अपने अंदर का पानी घटाकर-बढ़ाकर आकार बदल लेती हैं, जैसे छुई-मुई की पत्ती। धीमी अनुक्रिया वृद्धि-निर्भर होती है, जैसे ऑक्सिन के कारण प्ररोह का प्रकाश की ओर मुड़ना।

ऑक्सिन असल में करता क्या है?

ऑक्सिन प्ररोह शीर्ष में बनता है और कोशिकाओं की लंबाई बढ़ाता है यानी कोशिका दीर्घीकरण करवाता है। जब प्रकाश एक ओर से आता है तो ऑक्सिन छायादार ओर चला जाता है, वहाँ कोशिकाएँ अधिक लंबी हो जाती हैं, और पादप प्रकाश की ओर झुक जाता है। प्रतान (tendril) के लिपटने में भी यही क्रियाविधि है।

इंसुलिन को गोली की जगह इंजेक्शन से क्यों देते हैं?

इंसुलिन एक प्रोटीन है। अगर मुँह से लिया जाए तो पाचन तंत्र उसे पचा देगा और वह बेकार हो जाएगा। इंजेक्शन से वह सीधे रक्त में पहुँच जाता है और रक्त शर्करा को नियंत्रित कर पाता है।

सिर्फ आयोडीनयुक्त नमक खाने से घेंघा (goitre) सच में रुक जाता है?

थायरॉइड ग्रंथि को थायरॉक्सिन बनाने के लिए आयोडीन चाहिए। भोजन में आयोडीन की कमी से थायरॉक्सिन कम बनता है और ग्रंथि बढ़ सकती है, जिसे घेंघा कहते हैं। आयोडीनयुक्त नमक इस कमी को रोकने का सबसे आसान तरीका है, इसीलिए NCERT भी इसकी सलाह देता है।

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