Class 10 Science · Chapter 7 · हिंदी माध्यम
संक्षिप्त उत्तर:
NCERT कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 7 जीव जनन कैसे करते हैं? के संपूर्ण समाधान — 12 इन-टेक्स्ट प्रश्न (तीनों पेज-वार सेट) और 11 अभ्यास प्रश्न, सभी NCERT के सही क्रम में, सरल हिंदी व्याख्या के साथ। अध्याय में शामिल है: जनन में DNA प्रतिलिपिकरण की भूमिका और विविधता क्यों बनती है; अलैंगिक जनन के सभी तरीके — विखंडन (बाइनरी और मल्टीपल), विखंडन (fragmentation), पुनर्जनन, बडिंग, बीजाणु निर्माण, वर्धी प्रजनन और ऊतक संवर्धन; पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन — पुष्प के भाग, परागण (स्व और पर), निषेचन, बीज और फल बनना, अंकुरण; मानव जनन — यौवनारंभ के परिवर्तन, पुरुष और स्त्री जनन तंत्र, निषेचन, प्लेसेंटा से भ्रूण का पोषण, मासिक धर्म; और जनन स्वास्थ्य — गर्भनिरोधन के तरीके (बैरियर, हार्मोनल, IUD/कॉपर-टी, शल्य चिकित्सा), STDs, और स्त्री भ्रूण हत्या का मुद्दा। साथ में अलैंगिक जनन तरीकों की संदर्भ तालिका, 6 सामान्य परीक्षा गलतियाँ, बोर्ड-शैली अभ्यास प्रश्न और FAQs।
जनन ही एक ऐसी जीवन प्रक्रिया (life process) है जो व्यक्तिगत जीव के अपने अस्तित्व (survival) के लिए आवश्यक नहीं है — लेकिन जाति (species) के अस्तित्व के लिए बिल्कुल आवश्यक है। पोषण, श्वसन, उत्सर्जन — ये सब अगर रुक जाएँ तो जीव मर जाता है। जनन रुक जाए तो जीव जीवित रहता है, पर उसकी जाति समाप्त हो जाती है। इसलिए NCERT इस अध्याय को एक साधारण प्रश्न से शुरू करता है: जनन कैसे होता है, और जो संतान बनती है वह जनक जैसी बिल्कुल क्यों नहीं होती?
इसका उत्तर DNA में है। हर जनन से पहले कोशिका अपने DNA की प्रतिलिपि (copy) बनाती है। यह प्रतिलिपिकरण काफी सटीक है — इसलिए संतति (offspring) जनक जैसी दिखती है — पर 100% सटीक नहीं। छोटी-छोटी विविधताएँ (variations) रह जाती हैं। अलैंगिक जनन (asexual reproduction) में केवल एक जनक होता है, इसलिए संतति बिल्कुल जनक जैसी होती है — विविधता न के बराबर। लैंगिक जनन (sexual reproduction) में दो जनकों का DNA मिलता है, इसलिए विविधता काफी अधिक। और यही विविधता जाति को बदलते हुए पर्यावरण में बचाती है — विकास (evolution) का कच्चा माल है।
अध्याय का बाकी हिस्सा इसी विचार को विस्तार में ले जाता है — पहले एककोशिकीय जीवों (single organisms) के अलैंगिक तरीके, फिर पुष्पी पौधों (flowering plants) का लैंगिक जनन, फिर मानव जनन तंत्र, और अंत में जनन स्वास्थ्य (reproductive health)।
अध्याय 7 सारांश — 5 मिनट रिवीजन
1. जनन और DNA प्रतिलिपिकरण
- जनन = जीव द्वारा अपने जैसा नया जीव बनाना। यह व्यक्तिगत जीव के अस्तित्व के लिए आवश्यक नहीं, पर जाति के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
- कोशिका के केंद्रक (nucleus) में DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) होता है — यही सूचना स्रोत है जो शरीर डिज़ाइन (ब्लूप्रिंट) तय करता है।
- जनन की मूल घटना = DNA की प्रतिलिपि बनाना। इसके साथ कोशिका अपने अंगकों (organelles) और कोशिकीय उपकरण की भी एक अतिरिक्त प्रतिलिपि बनाती है, फिर कोशिका दो में बँट जाती है।
- DNA प्रतिलिपिकरण कभी भी पूर्णतः सटीक नहीं होती — छोटी विविधताएँ आती हैं। ज़्यादा बड़ा परिवर्तन हो जाए तो नई DNA प्रतिलिपि जीवित नहीं रह पाती और कोशिका मर जाती है।
2. विविधता (variation) का महत्व
- हर जाति एक विशेष निकेत (niche) (आवास + भूमिका) में रहती है। निकेत कभी भी बदल सकता है — तापमान, जल स्तर, भोजन आपूर्ति।
- अगर पूरी जनसंख्या बिल्कुल एक जैसी हो और पर्यावरण बहुत बदल जाए, तो पूरी जनसंख्या समाप्त हो सकती है (जैसे गर्मी-संवेदनशील बैक्टीरिया + वैश्विक तापमान वृद्धि)।
- अगर विविधताएँ हैं, तो कुछ जीव नई परिस्थितियों में जीवित रह जाते हैं → जाति बच जाती है।
- याद रखें: विविधता जाति के लिए फायदेमंद है; हर व्यक्तिगत जीव के लिए आवश्यक रूप से फायदेमंद नहीं (कुछ विविधताएँ बेकार या हानिकारक भी हो सकती हैं)।
- विविधता ही विकास (evolution) का आधार है।
3. अलैंगिक जनन — तरीके
- विखंडन (fission) — एककोशिकीय जीवों में। कोशिका दो या अधिक भागों में बँट जाती है।
- बाइनरी फिशन: एक कोशिका से दो संतति कोशिकाएँ। अमीबा (किसी भी तल से), लीशमैनिया (कोड़े के आधार से निश्चित तल से), पैरामीशियम, बैक्टीरिया।
- मल्टीपल फिशन: एक कोशिका एक साथ बहुत सारी संतति कोशिकाओं में टूटती है। प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी)। सिस्ट के अंदर होता है — अनुकूल परिस्थितियाँ आने पर सिस्ट टूट जाता है।
- विखंडन (fragmentation) — सरल बहुकोशिकीय जीव टूटकर टुकड़ों में बँट जाता है, हर टुकड़ा बढ़कर नया जीव बनता है। उदाहरण: स्पाइरोगायरा।
- पुनर्जनन (regeneration) — कट जाने पर जीव कटे हुए हिस्से से पूरा जीव बना लेता है। विशिष्ट कोशिकाएँ बढ़कर अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएँ और ऊतक बनाती हैं। उदाहरण: हाइड्रा, प्लैनेरिया। यह सामान्य जनन नहीं है — यह केवल तब काम आता है जब जीव आकस्मिक रूप से कट जाए।
- बडिंग (budding) — जनक शरीर पर एक छोटी बड (कली) निकलती है, बढ़कर अलग हो जाती है। उदाहरण: हाइड्रा (पुनर्योजी कोशिकाओं से), यीस्ट।
- बीजाणु निर्माण (spore formation) — राइज़ोपस (ब्रेड मोल्ड) में हाइफी के ऊपर स्पोरैंजिया (डंठल पर गोला) बनते हैं, जिनमें बीजाणु (spores) होते हैं। बीजाणुओं पर मोटी दीवार होती है जो उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में बचाती है। नम सतह मिलते ही अंकुरित हो जाते हैं।
- वर्धी प्रजनन (vegetative propagation) — पौधों में जड़, तना, पत्ती जैसे वर्धी भागों से नया पौधा बनना।
- जड़ें: शकरकंद, डहेलिया | तने: आलू (आँखों से), अदरक, गन्ना | पत्तियाँ: ब्रायोफिलम (पत्ती के गड्ढों में कलियाँ)
- कृत्रिम तरीके: लेयरिंग, ग्राफ्टिंग, कलम, और ऊतक संवर्धन।
- ऊतक संवर्धन (tissue culture) — पौधे की बढ़ती नोक से ऊतक/कोशिकाएँ लेकर पोषक माध्यम में उगाते हैं → कैलस (callus) बनता है → हार्मोन माध्यम में डालने पर छोटे पौधे बन जाते हैं → गमले में स्थानांतरित। सजावटी पौधों में आम।
4. वर्धी प्रजनन के लाभ
- केला, संतरा, गुलाब, चमेली — इनमें व्यवहार्य बीज नहीं या बहुत कम बनते हैं, इसलिए वर्धी प्रजनन ही एकमात्र तरीका है।
- नए पौधे बीज से उगने वाले पौधों की तुलना में जल्दी फूल और फल देते हैं।
- सभी पौधे आनुवंशिक रूप से जनक के समरूप प्रतिलिपि (क्लोन) होते हैं — वांछित गुण ठीक-ठीक संरक्षित रहते हैं।
5. लैंगिक जनन — मूल विचार
- दो जीवों का DNA मिलता है → संतति में नए संयोजन → अधिक विविधता।
- अगर दोनों जनक अपना पूरा DNA दे दें तो हर पीढ़ी में DNA दोगुना हो जाता। इसलिए जनन कोशिकाओं (युग्मक/gametes) में DNA की आधी मात्रा होती है। निषेचन पर दोनों आधे-आधे मिलकर पूरा सेट बनाते हैं।
- युग्मक: एक छोटा और गतिशील (नर युग्मक), दूसरा बड़ा और भोजन संचित करने वाला + स्थिर (स्त्री युग्मक)।
6. पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन
- पुष्प की 4 व्हर्ल्स: सीपल, पेटल, स्टेमन, कार्पेल।
- स्टेमन = नर भाग। एंथर (परागकण बनाता है, पीला चूर्ण) + फिलामेंट।
- कार्पेल/पिस्टिल = स्त्री भाग। स्टिग्मा (ऊपर, चिपचिपा — पराग यहाँ आता है) + स्टाइल (नली) + ओवरी (आधार, जिसके अंदर ओव्यूल्स होते हैं; हर ओव्यूल में एक अंड कोशिका)।
- एकलिंगी पुष्प: केवल स्टेमन या केवल कार्पेल (पपीता, तरबूज)। द्विलिंगी पुष्प: दोनों (गुड़हल, सरसों)।
- परागण (pollination) = पराग का एंथर से स्टिग्मा तक पहुँचना।
- स्व-परागण: उसी पुष्प या उसी पौधे के दूसरे पुष्प पर।
- पर-परागण: दूसरे पौधे के पुष्प पर — माध्यम: हवा, पानी, जानवर (कीट, पक्षी)।
- निषेचन (fertilisation) = नर युग्मक और स्त्री युग्मक (अंडा) का संलयन → युग्मनज (zygote)। पराग स्टिग्मा पर अंकुरित होकर पराग नली (pollen tube) बनाता है जो स्टाइल से होकर ओव्यूल तक पहुँचता है।
- निषेचन के बाद: युग्मनज → भ्रूण (embryo); ओव्यूल → बीज (seed); ओवरी → फल (fruit)। पेटल, सीपल, स्टेमन, स्टाइल आमतौर पर सूखकर गिर जाते हैं।
- अंकुरण (germination) = बीज से नया पौधा निकलना (बीजपत्र भोजन आपूर्ति करते हैं)।
7. मनुष्यों में जनन — यौवनारंभ
- मनुष्य लैंगिक जनन करते हैं। जनन परिपक्वता की आयु = यौवनारंभ (puberty) (किशोरावस्था)।
- दोनों में सामान्य परिवर्तन: बगल और जननांग क्षेत्र में पतले बाल, हाथ/पैर/चेहरे पर भी बाल, त्वचा का तैलीय होना, मुहासे।
- लड़कियों में: स्तन का आकार बढ़ना और स्तन की त्वचा का गहरा होना, मासिक धर्म शुरू होना।
- लड़कों में: चेहरे पर बाल (दाढ़ी/मूँछ) आना, आवाज़ का भारी (deep) होना, लिंग (penis) का कभी-कभी बड़ा होना।
8. पुरुष जनन तंत्र
| भाग | कार्य |
|---|---|
| टेस्टिस (स्क्रोटम में, शरीर के बाहर) | शुक्राणु बनाते हैं; टेस्टोस्टेरोन हार्मोन बनाते हैं (नर लैंगिक हार्मोन → शुक्राणु उत्पादन + यौवनारंभ के परिवर्तन)। बाहर इसलिए ताकि तापमान शरीर से कम रहे — शुक्राणु निर्माण के लिए आवश्यक। |
| वास डेफेरेंस | शुक्राणुओं को टेस्टिस से आगे ले जाता है; यूरेथ्रा से मिलकर सामान्य मार्ग बनाता है। |
| सेमिनल वेसिकल्स | शुक्राणुओं को द्रव देते हैं — पोषण (फ्रुक्टोज़) और गति आसान। |
| प्रोस्टेट ग्रंथि | सेमिनल वेसिकल्स के साथ द्रव मिलाती है → शुक्राणु + द्रव = वीर्य (semen)। इससे शुक्राणु परिवहित हो पाते हैं और सक्रिय रहते हैं। |
| यूरेथ्रा/लिंग | वीर्य (और मूत्र) का सामान्य मार्ग; वीर्य को स्त्री शरीर में पहुँचाता है। |
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9. स्त्री जनन तंत्र
| भाग | कार्य |
|---|---|
| ओवरी (दो) | अंडा (ovum) बनाती हैं — लड़की के जन्म के समय ही हज़ारों अपरिपक्व अंडे उपस्थित होते हैं। यौवनारंभ के बाद हर महीने एक ओवरी एक परिपक्व अंडा छोड़ती है। स्त्री हार्मोन (एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन) भी बनाती हैं। |
| फैलोपियन ट्यूब/अंडवाहिनी | अंडे को ओवरी से यूटरस तक ले जाती है। निषेचन यहीं होता है। |
| यूटरस (गर्भाशय) | निषेचित अंडा (युग्मनज) यहाँ प्रत्यारोपित होता है और भ्रूण विकसित होता है। |
| सर्विक्स | यूटरस का नीचे का मुख, जो योनि में खुलता है। |
| योनि | शुक्राणु यहाँ से प्रवेश करते हैं; जन्म के समय शिशु यहीं से बाहर आता है। |
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10. निषेचन, प्लेसेंटा और मासिक धर्म
- यौन संसर्ग के दौरान वीर्य योनि में जाता है। शुक्राणु ऊपर जाकर फैलोपियन ट्यूब में अंडे से मिलते हैं → निषेचन → युग्मनज।
- युग्मनज विभाजित होकर भ्रूण बनता है, यूटरस में उतरता है और यूटरस की मोटी परत में प्रत्यारोपित (implant) हो जाता है।
- प्लेसेंटा — भ्रूण और यूटरस दीवार के बीच का चकती जैसा विशेष ऊतक। भ्रूण की तरफ विली होते हैं जो सतही क्षेत्र बढ़ाते हैं; माँ की तरफ रक्त स्थान होते हैं जो विली को घेरे रहते हैं।
- माँ के रक्त से ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन भ्रूण तक जाते हैं।
- भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थ प्लेसेंटा के माध्यम से माँ के रक्त में स्थानांतरित होकर निकल जाते हैं।
- माँ के अंदर विकास का समय (गर्भावधि) लगभग नौ महीने। यूटरस के लयबद्ध संकुचन (contraction) से शिशु जन्म होता है।
- मासिक धर्म — हर महीने यूटरस की परत निषेचित अंडे को प्राप्त करने के लिए मोटी और स्पंजी हो जाती है (रक्त आपूर्ति के साथ)। अगर निषेचन नहीं होता, तो इस परत की आवश्यकता नहीं रहती — वह धीरे-धीरे टूटकर रक्त और म्यूकस के रूप में योनि से बाहर आती है। यह चक्र लगभग 28 दिन का होता है, रक्तस्राव ~2-8 दिन। पहली बार यौवनारंभ पर शुरू होती है, रजोनिवृत्ति पर रुकती है।
11. जनन स्वास्थ्य (reproductive health)
- यौन संचारित रोग (STDs):
- जीवाणुजनित (bacterial) — सूजाक (gonorrhoea), सिफलिस (syphilis)
- विषाणुजनित (viral) — मस्से (warts), HIV-AIDS (यह अन्य माध्यमों से भी फैलता है)
- गर्भनिरोधन के तरीके:
- बैरियर विधियाँ: कंडोम (पुरुष), सर्विकल कैप/डायफ्राम (स्त्री) — शुक्राणु को अंडे तक पहुँचने से रोकते हैं। कंडोम STDs से भी बचाता है।
- रासायनिक/हार्मोनल विधियाँ: मौखिक गोलियाँ — हार्मोनल संतुलन बदलकर अंडोत्सर्ग (ovulation) रोकती हैं। साइड इफेक्ट हो सकते हैं।
- इंट्रा-यूटेराइन डिवाइस (IUD): कॉपर-टी/लूप — यूटरस में लगाया जाता है, गर्भधारण रोकता है। कुछ महिलाओं में साइड इफेक्ट (जलन, रक्तस्राव)।
- शल्य चिकित्सा विधियाँ: पुरुषों में वेसेक्टॉमी (वास डेफेरेंस अवरुद्ध/काटना), स्त्रियों में ट्यूबेक्टॉमी (फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध/काटना)। स्थायी हैं; सुरक्षित हैं पर ठीक से न किए जाने पर संक्रमण का खतरा।
- गर्भनिरोधन अपनाने के कारण: परिवार का आकार नियंत्रण, माँ का स्वास्थ्य और दो बच्चों के बीच अंतर, STDs से सुरक्षा, जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण।
- स्त्री भ्रूण हत्या (female foeticide) — जन्मपूर्व लिंग निर्धारण करके स्त्री भ्रूण को गिराना। यह गैर-कानूनी (illegal) है और इससे लिंगानुपात (sex ratio) बिगड़ता है। जनन स्वास्थ्य का यह एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है।
12. जनन और जनसंख्या स्थिरता
- जनन से ही एक जाति पीढ़ी दर पीढ़ी जारी रहती है — मर रहे जीवों की जगह नए जीव लेते हैं, इसलिए जनसंख्या का आकार स्थिर रहता है।
- DNA प्रतिलिपिकरण विश्वसनीय होने के कारण शरीर डिज़ाइन की समानता बनी रहती है — जाति की पहचान बनी रहती है।
- साथ ही थोड़ी विविधता आती रहती है, जो जाति को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने देती है।
इन-टेक्स्ट प्रश्न — हल
प्रश्न 1. जनन में DNA प्रतिलिपिकरण (copying) का क्या महत्व है?
DNA (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) कोशिका के केंद्रक (nucleus) में होता है और यही सूचना स्रोत (information source) है जो शरीर के डिज़ाइन का ब्लूप्रिंट रखता है। जनन के समय DNA की प्रतिलिपि बनना इसलिए आवश्यक है:
- इससे संतति (offspring) को जनक जैसा शरीर डिज़ाइन मिलता है — जाति की पहचान पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती है।
- हर कोशिका को अपने एक पूर्ण DNA सेट की आवश्यकता होती है ताकि वह प्रोटीन बना सके और ठीक से कार्य कर सके।
- DNA प्रतिलिपिकरण कभी 100% सटीक नहीं होती — इसलिए छोटी-छोटी विविधताएँ (variations) आती हैं। यही विविधताएँ जाति के अस्तित्व और विकास (evolution) का आधार हैं।
यानी DNA प्रतिलिपिकरण एक साथ दो काम करती है — समानता भी देती है और विविधता भी।
प्रश्न 2. विविधता (variation) जाति के लिए लाभदायक क्यों है, पर व्यक्तिगत जीव के लिए आवश्यक रूप से नहीं?
हर जाति (species) एक विशेष निकेत (niche) (आवास + उसकी भूमिका) में रहती है। यह निकेत कभी भी बदल सकता है — तापमान बढ़ सकता है, पानी सूख सकता है, भोजन समाप्त हो सकता है।
- जाति के लिए फायदेमंद: अगर जनसंख्या में विविधताएँ हैं, तो नई परिस्थितियाँ आने पर कुछ जीव ऐसे होंगे जो उन परिस्थितियों में जीवित रह लेंगे। इससे पूरी जाति समाप्त होने से बच जाती है। जैसे ताप-प्रतिरोधी विविधता वाले बैक्टीरिया वैश्विक तापमान बढ़ने पर बच जाते हैं।
- व्यक्तिगत जीव के लिए आवश्यक रूप से फायदेमंद नहीं: कोई भी एक विविधता उस विशेष जीव के लिए उपयोगी, बेकार या हानिकारक — कुछ भी हो सकती है। एक विविधता तभी 'उपयोगी' कहलाती है जब पर्यावरण उसे अनुकूल हो। पर्यावरण न बदले तो वह विविधता व्यक्ति को कोई लाभ नहीं देती।
इसलिए विविधता का लाभ जनसंख्या स्तर पर दिखता है, व्यक्तिगत स्तर पर नहीं।
प्रश्न 1. बाइनरी फिशन (binary fission) मल्टीपल फिशन (multiple fission) से कैसे अलग है?
| बाइनरी फिशन | मल्टीपल फिशन |
|---|---|
| जनक कोशिका दो संतति कोशिकाओं में बँटती है। | जनक कोशिका एक साथ बहुत सारी संतति कोशिकाओं में बँटती है। |
| नाभिक पहले एक बार विभाजित होता है, फिर कोशिकाद्रव्य (cytoplasm) बँटता है। | नाभिक बार-बार विभाजित होकर कई नाभिक बनाता है, फिर हर नाभिक के चारों ओर कोशिकाद्रव्य बँट जाता है। |
| सामान्यतः अनुकूल परिस्थितियों में होता है। | अक्सर प्रतिकूल परिस्थितियों में सिस्ट (cyst) के अंदर होता है; परिस्थितियाँ ठीक होने पर सिस्ट टूटकर सभी संतति कोशिकाएँ छोड़ता है। |
| उदाहरण: अमीबा, लीशमैनिया, पैरामीशियम, बैक्टीरिया | उदाहरण: प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) |
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प्रश्न 2. बीजाणु (spore) द्वारा जनन करने से जीव को क्या लाभ होगा?
बीजाणु निर्माण (जैसे राइज़ोपस — ब्रेड मोल्ड) से जीव को ये लाभ मिलते हैं:
- एक बार में बहुत अधिक संख्या में बीजाणु बनते हैं (स्पोरैंजिया के अंदर), इसलिए जनन दर बहुत अधिक होती है।
- बीजाणुओं पर मोटी सुरक्षात्मक दीवार होती है जो उन्हें गर्मी, सूखा और अन्य प्रतिकूल परिस्थितियों में मरने से बचाती है — जीव बुरा समय झेल लेता है।
- बीजाणु बहुत हल्के होते हैं, इसलिए हवा से दूर तक फैल जाते हैं — नए आवास मिल जाते हैं और प्रतिस्पर्धा कम होती है।
- नम सतह मिलते ही अंकुरित होकर नया जीव बन जाते हैं।
प्रश्न 3. क्या आप सोच सकते हैं कि अधिक जटिल जीव पुनर्जनन (regeneration) द्वारा नए जीव क्यों नहीं बना सकते?
जटिल (उच्च) जीवों में पुनर्जनन से पूरा नया जीव नहीं बन सकता, क्योंकि:
- उनका शरीर डिज़ाइन बहुत जटिल और अत्यधिक विशिष्ट होता है — अलग-अलग अंग अलग-अलग काम करते हैं और एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं (हृदय, मस्तिष्क, फेफड़े, गुर्दे)।
- उनकी कोशिकाएँ विशिष्ट (specialised) हो चुकी होती हैं; वे विभाजित होकर हर प्रकार की कोशिका और अंग बनाने की क्षमता खो देती हैं।
- पुनर्जनन के लिए चाहिए विशिष्ट (undifferentiated) कोशिकाएँ जो हाइड्रा और प्लैनेरिया जैसे सरल जीवों में होती हैं — ये कोशिकाएँ बढ़कर सभी प्रकार की कोशिकाएँ और ऊतक बना लेती हैं।
- जटिल जीव का एक कटा हुआ टुकड़ा अपने आप में पूरा अंग तंत्र नहीं रखता, इसलिए वह जीवित ही नहीं रह सकता।
नोट: जटिल जीवों में घाव भरना (healing) (चोट भरना, त्वचा/यकृत की आंशिक मरम्मत) होता है, पर उससे नया जीव नहीं बनता।
प्रश्न 4. कुछ प्रकार के पौधे उगाने के लिए वर्धी प्रजनन (vegetative propagation) क्यों अपनाया जाता है?
- कई पौधों — केला, संतरा, गुलाब, चमेली — में व्यवहार्य बीज (viable seed) नहीं बनता या बहुत कम बनता है। उन्हें उगाने का एकमात्र व्यावहारिक तरीका वर्धी प्रजनन है।
- ऐसे पौधे बीज से उगने वाले पौधों की तुलना में जल्दी फूल और फल देते हैं, क्योंकि पूरा पौधा शरीर पहले से ही विकसित हो चुका होता है।
- नए पौधे जनक की आनुवंशिक रूप से समरूप क्लोन होते हैं — इसलिए अच्छी गुणवत्ता (स्वाद, रंग, रोग प्रतिरोधकता) ठीक वैसी ही मिलती है।
- कम समय में बड़े पैमाने पर समान पौधे तैयार किए जा सकते हैं (ऊतक संवर्धन, कलम, लेयरिंग, ग्राफ्टिंग)।
प्रश्न 5. DNA प्रतिलिपिकरण (copying) जनन की प्रक्रिया का आवश्यक भाग क्यों है?
DNA ही वह सूचना स्रोत है जिसमें जीव का शरीर डिज़ाइन लिखा होता है। जनन का मतलब ही है अपने जैसा नया जीव बनाना — और यह तभी संभव है जब नई कोशिका को DNA की पूरी प्रतिलिपि मिले।
- DNA प्रतिलिपि बनने से ही संतति में जनक जैसे लक्षण स्थानांतरित होते हैं — जाति की पहचान बनी रहती है।
- हर नई कोशिका को अपना DNA चाहिए ताकि वह अपने प्रोटीन बना सके और कार्यशील रहे। बिना DNA प्रतिलिपि के संतति कोशिका जीवित नहीं रह सकती।
- प्रतिलिपिकरण में होने वाली छोटी त्रुटियाँ/विविधताएँ जाति को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने और विकसित होने का मौका देती हैं।
प्रश्न 1. परागण (pollination) की प्रक्रिया निषेचन (fertilisation) से कैसे अलग है?
| परागण | निषेचन |
|---|---|
| परागकणों का एंथर से स्टिग्मा तक स्थानांतरण (transfer) होना। | नर युग्मक और स्त्री युग्मक (अंडा) का संलयन (fusion)। |
| निषेचन से पहले होता है — एक भौतिक स्थानांतरण प्रक्रिया है। | परागण के बाद होता है — एक कोशिकीय संलयन प्रक्रिया है। |
| बाहरी माध्यमों की आवश्यकता: हवा, पानी, कीट, पक्षी। | कोई बाहरी माध्यम नहीं — यह पराग नली (pollen tube) के अंदर ही होता है। |
| दो प्रकार: स्व-परागण (self-pollination) और पर-परागण (cross-pollination)। | परिणाम: युग्मनज (zygote) बनता है, जो आगे भ्रूण (embryo) बनता है। |
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परागकण स्टिग्मा पर अंकुरित होकर पराग नली (pollen tube) बनाता है, जो स्टाइल से होते हुए ओवरी के ओव्यूल तक पहुँचता है — वहाँ निषेचन होता है।
प्रश्न 2. सेमिनल वेसिकल्स (seminal vesicles) और प्रोस्टेट ग्रंथि (prostate gland) की क्या भूमिका है?
सेमिनल वेसिकल्स और प्रोस्टेट ग्रंथि अपने स्राव (secretions) को वास डेफेरेंस से गुज़रते शुक्राणुओं में मिलाते हैं। शुक्राणु + इन ग्रंथियों का द्रव = वीर्य (semen)।
- यह द्रव शुक्राणुओं को एक तरल माध्यम (liquid medium) देता है जिसमें उनका परिवहन आसान हो जाता है — शुक्राणुओं की गति बेहतर होती है।
- द्रव में पोषण (फ्रुक्टोज़ जैसी शर्करा) होता है जिससे शुक्राणुओं को ऊर्जा मिलती है और वे सक्रिय रहते हैं।
- यह स्त्री जनन मार्ग के अम्लीय (acidic) वातावरण को निष्प्रभावी (neutralise) करने में भी मदद करता है।
प्रश्न 3. यौवनारंभ (puberty) के समय लड़कियों में क्या परिवर्तन देखे जाते हैं?
यौवनारंभ पर लड़कियों में ये परिवर्तन दिखते हैं:
- बगल और जननांग क्षेत्र में पतले बाल आना; हाथों, पैरों और चेहरे पर भी पतले बाल।
- त्वचा का तैलीय (oily) होना और मुहासे (pimples) निकलना।
- स्तन का आकार बढ़ना और स्तन के निपल की त्वचा का रंग गहरा (darker) होना।
- मासिक धर्म शुरू होना (menarche) — ओवरी से हर महीने अंडा निकलना शुरू हो जाता है।
- जनन अंगों का परिपक्व होना; ऊँचाई और शरीर के आकार में बदलाव; भावनात्मक/व्यवहारिक परिवर्तन।
प्रश्न 11. माँ के शरीर के अंदर भ्रूण (embryo) को पोषण कैसे मिलता है?
भ्रूण को पोषण प्लेसेंटा (placenta) के माध्यम से मिलता है।
- प्लेसेंटा एक चकती जैसा विशेष ऊतक (disc-like special tissue) है जो भ्रूण और यूटरस की दीवार के बीच विकसित होता है।
- भ्रूण की तरफ प्लेसेंटा पर विली (villi) (उंगली जैसे प्रवर्ध) होते हैं — इनसे अवशोषण (absorption) का सतही क्षेत्र बहुत बढ़ जाता है।
- माँ की तरफ रक्त स्थान (blood spaces) होते हैं जो इन विली को घेरे रहते हैं।
- माँ के रक्त से ग्लूकोज़ और ऑक्सीजन प्लेसेंटा के माध्यम से भ्रूण तक पहुँचते हैं।
- इसी तरह भ्रूण के अपशिष्ट पदार्थ (waste products) प्लेसेंटा के माध्यम से माँ के रक्त में चले जाते हैं और माँ के शरीर से उत्सर्जित (excrete) हो जाते हैं।
प्रश्न 5. अगर कोई महिला कॉपर-टी (copper-T) का उपयोग कर रही है, तो क्या यह उसे यौन संचारित रोगों (sexually transmitted diseases) से बचाने में मदद करेगी?
नहीं। कॉपर-टी (IUD) केवल एक गर्भनिरोधक उपकरण (contraceptive device) है — यह यूटरस में लगाया जाता है और गर्भधारण रोकता है।
- यह यौन संपर्क के दौरान शरीर के तरल पदार्थों (body fluids) के आदान-प्रदान को नहीं रोकता।
- इसलिए यह सूजाक (gonorrhoea), सिफलिस (syphilis), मस्से (warts) या HIV-AIDS जैसे STDs से कोई सुरक्षा नहीं देता।
- STDs से बचने के लिए बैरियर विधि — कंडोम (condom) का उपयोग आवश्यक है, क्योंकि वही तरल पदार्थों के प्रत्यक्ष संपर्क को रोकता है।

Poore Class 10 Science ke handwritten colour notes
IITian & district toppers ke banaye short notes — revision-ready, diagram ke saath. Board se pehle poora syllabus 3 din me revise.
अभ्यास प्रश्न — हल (Q1–Q11)
प्रश्न 1. अलैंगिक जनन (asexual reproduction) बडिंग (budding) द्वारा होता है:
(a) अमीबा (amoeba) (b) यीस्ट (yeast) (c) प्लाज्मोडियम (plasmodium) (d) लीशमैनिया (leishmania)
उत्तर: (b) यीस्ट (yeast)
यीस्ट में पैरेंट सेल (parent cell) पर एक छोटी बड (bud) निकलती है, जो बढ़कर अलग हो जाती है और नया यीस्ट सेल बन जाती है। कभी-कभी बड्स अलग होने से पहले ही अपनी बड निकाल लेते हैं — चेन बन जाती है।
बाकी विकल्प: अमीबा और लीशमैनिया = बाइनरी फिशन (binary fission); प्लाज्मोडियम = मल्टीपल फिशन (multiple fission)।
प्रश्न 2. निम्न में से कौन-सा मनुष्यों के स्त्री जनन तंत्र (female reproductive system) का भाग नहीं है?
(a) ओवरी (Ovary) (b) यूटरस (Uterus) (c) वास डेफेरेंस (Vas deferens) (d) फैलोपियन ट्यूब (Fallopian tube)
उत्तर: (c) वास डेफेरेंस (Vas deferens)
वास डेफेरेंस पुरुष (male) जनन तंत्र का भाग है — यह शुक्राणुओं (sperms) को टेस्टिस (testes) से यूरेथ्रा (urethra) तक ले जाता है।
ओवरी (अंडा बनाती है), फैलोपियन ट्यूब (अंडे को यूटरस तक ले जाती है, निषेचन का स्थान) और यूटरस (भ्रूण विकसित होता है) — तीनों स्त्री जनन तंत्र के भाग हैं।
प्रश्न 3. एंथर (anther) में होते हैं:
(a) सीपल्स (sepals) (b) ओव्यूल्स (ovules) (c) कार्पेल (carpel) (d) परागकण (pollen grains)
उत्तर: (d) परागकण (pollen grains)
एंथर स्टेमन (stamen) (नर जनन भाग) का ऊपरी हिस्सा है, जिसमें परागकण (pollen grains) बनते हैं — यही पीले रंग का चूर्ण है जिसमें नर युग्मक (male germ cells) होते हैं।
ओव्यूल्स ओवरी के अंदर होते हैं (कार्पेल का हिस्सा), सीपल्स सबसे बाहर की व्हर्ल है, और कार्पेल स्वयं स्त्री जनन भाग है।
प्रश्न 4. लैंगिक जनन (sexual reproduction) के अलैंगिक जनन (asexual reproduction) की तुलना में क्या लाभ हैं?
- अधिक विविधता (variation): DNA दो अलग-अलग जनकों (parents) से आता है, इसलिए संतति (offspring) में जीन्स (genes) के नए संयोजन बनते हैं। अलैंगिक में संतति जनक की लगभग सटीक प्रतिलिपि (copy) होती है।
- बेहतर उत्तरजीविता (survival): विविधता के कारण बदलते पर्यावरण में कुछ जीव जीवित रह जाते हैं — जाति (species) समाप्त होने से बच जाती है।
- विकास (evolution) संभव: लैंगिक जनन से पैदा हुई विविधताएँ प्राकृतिक चयन (natural selection) का कच्चा माल बनती हैं, जिससे नई जातियाँ बन सकती हैं।
- त्रुटियों (errors) का कम संचय: दो जनकों के DNA मिलने से आनुवंशिक दोष (genetic defects) पूरी जनसंख्या में उतनी आसानी से स्थिर नहीं होते।
- दो जनकों के उपयोगी गुण एक ही संतति में आ सकते हैं — बेहतर किस्में (improved varieties) संभव हैं।
प्रश्न 5. मनुष्यों में टेस्टिस (testis) द्वारा किए जाने वाले कार्य क्या हैं?
टेस्टिस (testis का बहुवचन testes) के दो मुख्य कार्य हैं:
- शुक्राणु उत्पादन (sperm production): टेस्टिस नर युग्मक यानी शुक्राणु (sperms) बनाते हैं।
- हार्मोन उत्पादन (hormone production): टेस्टिस टेस्टोस्टेरोन (testosterone) (नर लैंगिक हार्मोन) बनाते हैं, जो (i) शुक्राणु उत्पादन को नियंत्रित करता है और (ii) यौवनारंभ (puberty) के परिवर्तन लाता है — चेहरे पर बाल, आवाज़ का भारी होना, जनन अंगों का विकास।
अतिरिक्त बिंदु: टेस्टिस शरीर गुहा के बाहर स्क्रोटम (scrotum) में होते हैं, क्योंकि शुक्राणु निर्माण के लिए शरीर के तापमान से कम तापमान चाहिए।
प्रश्न 6. मासिक धर्म (menstruation) क्यों होता है?
यौवनारंभ (puberty) के बाद हर महीने एक ओवरी से एक परिपक्व अंडा (mature egg) निकलता है। इसके साथ ही यूटरस की परत निषेचित अंडे (fertilised egg) को प्राप्त करने के लिए मोटी और स्पंजी हो जाती है, और उसमें भरपूर रक्त आपूर्ति (blood supply) विकसित हो जाती है — ताकि भ्रूण (embryo) प्रत्यारोपित (implant) होकर पोषण ले सके।
अगर अंडा निषेचित नहीं होता, तो इस मोटी परत की कोई आवश्यकता नहीं रहती। तब वह परत धीरे-धीरे टूटकर रक्त और म्यूकस (mucous) के रूप में योनि (vagina) से बाहर आती है। इसी को मासिक धर्म (menstruation) कहते हैं।
- चक्र (cycle) लगभग 28 दिन का होता है; रक्तस्राव सामान्यतः 2 से 8 दिन चलता है।
- यह यौवनारंभ पर शुरू होता है (menarche) और रजोनिवृत्ति (menopause) पर बंद हो जाता है।
- यानी मासिक धर्म का मतलब है — उस महीने गर्भधारण (pregnancy) नहीं हुआ।
प्रश्न 7. किसी पुष्प (flower) के अनुदैर्ध्य काट (longitudinal section) का नामांकित चित्र बनाइए।
पुष्प के अनुदैर्ध्य काट में ये भाग नामांकित करने होते हैं (बाहर से अंदर की ओर):
- सीपल (sepal) — सबसे बाहरी हरी व्हर्ल, कली (bud) की सुरक्षा करती है
- पेटल (petal) — रंगीन व्हर्ल, कीटों को आकर्षित करती है
- स्टेमन (stamen) (नर भाग) = एंथर (anther) (परागकण बनाता है) + फिलामेंट (filament) (डंठल)
- कार्पेल / पिस्टिल (carpel/pistil) (स्त्री भाग) = स्टिग्मा (stigma) (चिपचिपा शीर्ष, यहाँ पराग आता है) + स्टाइल (style) (नली जो स्टिग्मा को ओवरी से जोड़ती है) + ओवरी (ovary) (फूला हुआ आधार)
- ओव्यूल (ovule) — ओवरी के अंदर; हर ओव्यूल में एक अंड कोशिका (egg cell, स्त्री युग्मक) होती है
- रिसेप्टेकल / थैलेमस (receptacle/thalamus) — पुष्प का आधार जहाँ सभी व्हर्ल्स जुड़ी होती हैं
चित्र बनाने के सुझाव (अंक बचाने के लिए):
- पेंसिल से साफ, एकल रेखाएँ बनाएँ; शेडिंग न करें।
- ओवरी को कटा हुआ (cut open) दिखाएँ ताकि अंदर के ओव्यूल्स दिखें — अनुदैर्ध्य काट का यही मतलब है।
- लेबल रेखाएँ सीधी और बिना तीर (arrow) के हों; लेबल चित्र के एक ही ओर, क्षैतिज (horizontal) लिखें।
- चित्र के नीचे शीर्षक लिखें: पुष्प का अनुदैर्ध्य काट (Longitudinal section of a flower)।
प्रश्न 8. गर्भनिरोधन (contraception) की विभिन्न विधियाँ क्या हैं?
गर्भनिरोधन के चार मुख्य प्रकार हैं:
| विधि | कैसे काम करती है | उदाहरण |
|---|---|---|
| बैरियर विधि (barrier method) | शुक्राणु को अंडे तक भौतिक रूप से पहुँचने से रोकती है | कंडोम (condom, पुरुष), सर्विकल कैप/डायफ्राम (female) |
| रासायनिक/हार्मोनल विधि | हार्मोनल संतुलन बदलकर अंडोत्सर्ग (ovulation) रोकती है | मौखिक गर्भनिरोधक गोलियाँ (oral pills); इनके साइड इफेक्ट हो सकते हैं |
| इंट्रा-यूटेराइन डिवाइस (IUD) | यूटरस में लगाई जाती है, प्रत्यारोपण/गर्भधारण रोकती है | कॉपर-टी (Copper-T), लूप; कुछ महिलाओं में जलन या रक्तस्राव |
| शल्य चिकित्सा विधि (surgical method) | युग्मकों (gametes) का रास्ता स्थायी रूप से अवरुद्ध करना | वेसेक्टॉमी (vasectomy) (पुरुष — वास डेफेरेंस अवरुद्ध/काटना), ट्यूबेक्टॉमी (tubectomy) (स्त्री — फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध/काटना) |
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महत्वपूर्ण: इन सबमें सिर्फ कंडोम (बैरियर विधि) ही यौन संचारित रोगों (STDs) से भी बचाता है — बाकी विधियाँ केवल गर्भधारण रोकती हैं।
प्रश्न 9. एककोशिकीय (unicellular) और बहुकोशिकीय (multicellular) जीवों में जनन के तरीके कैसे अलग हैं?
| एककोशिकीय जीव | बहुकोशिकीय जीव |
|---|---|
| पूरा जीव ही एक कोशिका है, इसलिए कोशिका विभाजन (cell division) ही जनन है। | शरीर में विशिष्ट कोशिकाएँ, ऊतक (tissues) और अंग (organs) होते हैं; जनन के लिए अलग जनन अंग/ऊतक होते हैं। |
| तरीके: बाइनरी फिशन (अमीबा, लीशमैनिया), मल्टीपल फिशन (प्लाज्मोडियम), बडिंग (यीस्ट)। | तरीके: विखंडन (fragmentation) (स्पाइरोगायरा), पुनर्जनन (regeneration) (प्लैनेरिया, हाइड्रा), बडिंग (हाइड्रा), बीजाणु निर्माण (spore formation) (राइज़ोपस), वर्धी प्रजनन (vegetative propagation) (पौधे), और लैंगिक जनन (पौधे, जंतु, मनुष्य)। |
| सामान्यतः केवल अलैंगिक; प्रक्रिया सरल और तेज़। | अलैंगिक भी हो सकता है और लैंगिक भी; जटिल जीवों में अधिकतर लैंगिक। |
| जनक अपनी पहचान खो देता है (दो संतति कोशिकाएँ बन जाता है)। | जनक अपनी पहचान बनाए रखता है; केवल विशिष्ट कोशिकाएँ/भाग जनन में शामिल होते हैं। |
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प्रश्न 10. जनन (reproduction) जातियों (species) की जनसंख्या (populations) को स्थिरता प्रदान करने में कैसे मदद करता है?
- किसी भी जनसंख्या में जीव लगातार मरते रहते हैं (उम्र, बीमारी, शिकारी)। जनन उनकी जगह नए जीव पैदा करता है — इसलिए जनसंख्या का आकार एक स्थिर सीमा में बना रहता है (जन्म दर और मृत्यु दर का संतुलन)।
- DNA प्रतिलिपिकरण (copying) काफी विश्वसनीय (reliable) है, इसलिए संतति का शरीर डिज़ाइन जनक जैसा ही रहता है — जाति की पहचान और विशेषताएँ पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहती हैं।
- साथ ही प्रतिलिपिकरण में आने वाली छोटी विविधताएँ (variations) जनसंख्या को बदलते पर्यावरण में जीवित रहने योग्य बनाती हैं — पूरी जनसंख्या एक साथ समाप्त नहीं होती।
इसलिए जनन एक साथ संख्या भी बचाता है और जाति का डिज़ाइन भी।
प्रश्न 11. गर्भनिरोधक विधियाँ अपनाने के क्या कारण हो सकते हैं?
- परिवार का आकार नियंत्रण: बच्चों की संख्या और दो बच्चों के बीच का अंतर योजना बनाना, ताकि हर बच्चे का अच्छा पालन-पोषण हो सके।
- माँ का स्वास्थ्य: बार-बार या बहुत जल्दी-जल्दी गर्भधारण माँ के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। गर्भनिरोधन से वह बचाव होता है।
- STDs से सुरक्षा: बैरियर विधि (कंडोम) यौन संचारित रोगों — सूजाक (gonorrhoea), सिफलिस (syphilis), मस्से (warts), HIV-AIDS — से बचाती है।
- जनसंख्या वृद्धि नियंत्रण: तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या संसाधनों (भोजन, पानी, घर, रोज़गार) पर दबाव डालती है; गर्भनिरोधन से जनसंख्या वृद्धि दर नियंत्रित होती है और जीवन स्तर बेहतर होता है।
- अनचाहे गर्भधारण से बचाव: जिससे होने वाली भावनात्मक और सामाजिक समस्याओं से बचा जा सकता है।
महत्वपूर्ण समीकरण — एक नज़र में
अलैंगिक जनन (asexual reproduction) के तरीके — त्वरित संदर्भ तालिका
| तरीका | उदाहरण जीव | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|
| बाइनरी फिशन (binary fission) | अमीबा, लीशमैनिया, पैरामीशियम, बैक्टीरिया | एक जनक कोशिका दो संतति कोशिकाओं में बँटती है। अमीबा में किसी भी तल (plane) से; लीशमैनिया में कोड़े जैसी संरचना के आधार से एक निश्चित तल से। |
| मल्टीपल फिशन (multiple fission) | प्लाज्मोडियम (मलेरिया परजीवी) | नाभिक बार-बार विभाजित होकर एक साथ बहुत सारी संतति कोशिकाएँ बनाता है, अक्सर सिस्ट (cyst) के अंदर — प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने में मदद। |
| विखंडन (fragmentation) | स्पाइरोगायरा | सरल बहुकोशिकीय शरीर टुकड़ों में टूट जाता है; हर टुकड़ा बढ़कर नया जीव बनता है। |
| पुनर्जनन (regeneration) | हाइड्रा, प्लैनेरिया | कटे हुए टुकड़े से पूरा जीव बन जाता है। विशिष्ट (undifferentiated) कोशिकाएँ बढ़कर सभी ऊतक बनाती हैं। यह जानबूझकर किया गया जनन नहीं, आकस्मिक कटने पर होता है। |
| बडिंग (budding) | हाइड्रा, यीस्ट | जनक शरीर पर एक बड (bud) निकलती है, बढ़ती है और अलग होकर नया जीव बन जाती है। जनक जीवित रहता है। |
| बीजाणु निर्माण (spore formation) | राइज़ोपस (ब्रेड मोल्ड) | हाइफी (hyphae) पर स्पोरैंजिया (sporangia) (डंठल पर गोला) बनते हैं जिनमें बीजाणु (spores) होते हैं। बीजाणुओं पर मोटी दीवार — प्रतिकूल परिस्थितियों में बचे रहते हैं, हवा से दूर तक फैलते हैं। |
| वर्धी प्रजनन (प्राकृतिक) | आलू और अदरक (तना), शकरकंद और डहेलिया (जड़), ब्रायोफिलम (पत्ती के गड्ढे) | जड़, तना या पत्ती जैसे वर्धी भागों (vegetative parts) से नया पौधा। संतति = जनक की क्लोन (clone); फूल/फल जल्दी आते हैं। |
| वर्धी प्रजनन (कृत्रिम) | गन्ना, गुलाब, अंगूर, आम | कलम (cutting), लेयरिंग (layering), ग्राफ्टिंग (grafting) — बीज के बिना, वांछित किस्म को ठीक-ठीक संरक्षित करते हुए प्रवर्धन। |
| ऊतक संवर्धन (tissue culture) | सजावटी पौधे (आर्किड आदि) | बढ़ती हुई नोक (growing tip) की कोशिकाओं को पोषक माध्यम में उगाकर कैलस (callus) बनाते हैं → हार्मोन माध्यम में पौधे → गमले में स्थानांतरित। बहुत सारे समान पौधे, कम जगह और कम समय में। |
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एक पंक्ति का नियम: अलैंगिक जनन में केवल एक जनक होता है, युग्मक (gametes) नहीं बनते, और संतति आनुवंशिक रूप से जनक की समरूप क्लोन होती है — इसलिए विविधता (variation) न के बराबर।
सामान्य गलतियाँ — यहाँ अंक कटते हैं
- बडिंग (budding) और विखंडन (fragmentation) को मिला देना। बडिंग में जनक शरीर पर एक छोटी नई वृद्धि (bud) उगती है जो बढ़कर अलग होती है — जनक पूरी तरह सलामत रहता है (यीस्ट, हाइड्रा)। विखंडन में जनक का अपना शरीर ही टुकड़ों में टूट जाता है और हर टुकड़ा नया जीव बनता है (स्पाइरोगायरा)। याद रखें: बडिंग = कुछ नया निकला; विखंडन = पुराना टूटा।
- परागण (pollination) और निषेचन (fertilisation) को एक मान लेना। परागण केवल पराग का एंथर से स्टिग्मा तक स्थानांतरण है — यह एक भौतिक प्रक्रिया है जिसमें हवा/पानी/कीटों की आवश्यकता पड़ती है। निषेचन नर और स्त्री युग्मकों का संलयन (fusion) है जो ओव्यूल के अंदर होता है और युग्मनज (zygote) बनाता है। परागण पहले, निषेचन बाद में। दोनों को अदल-बदल कर लिखने पर पूरे अंक कट जाते हैं।
- ओवरी और ओव्यूल की लेबलिंग उल्टी कर देना। ओवरी कार्पेल का फूला हुआ आधार (base) है; ओव्यूल्स ओवरी के अंदर होते हैं और हर ओव्यूल में एक अंड कोशिका होती है। निषेचन के बाद: ओव्यूल → बीज और ओवरी → फल। छात्र अक्सर 'ओवरी → बीज' लिख देते हैं। चित्र में ओवरी को काटकर दिखाना ज़रूरी है वरना ओव्यूल्स लेबल ही नहीं हो पाते।
- बाइनरी और मल्टीपल फिशन के अंतर को सिर्फ 'दो बनाम बहुत' तक सीमित रखना। उत्तर में यह भी लिखें कि मल्टीपल फिशन में नाभिक पहले बार-बार विभाजित होता है फिर कोशिकाद्रव्य बँटता है, और यह अक्सर सिस्ट के अंदर प्रतिकूल परिस्थितियों में होता है। उदाहरण ज़रूर दें — अमीबा/लीशमैनिया (बाइनरी) और प्लाज्मोडियम (मल्टीपल)। सिर्फ परिभाषा लिखने पर आधे अंक मिलते हैं।
- वास डेफेरेंस को स्त्री तंत्र में और फैलोपियन ट्यूब को पुरुष तंत्र में लिख देना। वास डेफेरेंस = पुरुष (शुक्राणुओं को टेस्टिस से यूरेथ्रा तक ले जाता है)। फैलोपियन ट्यूब (oviduct) = स्त्री (अंडे को ओवरी से यूटरस तक ले जाती है, और निषेचन यहीं होता है, यूटरस में नहीं)। एक और आम गलती: 'निषेचन यूटरस में होता है' — नहीं, यूटरस में केवल प्रत्यारोपण (implantation) और विकास होता है।
- कॉपर-टी को STD से बचाने वाला मान लेना, और 'गर्भनिरोधन = सिर्फ गोलियाँ' समझना। कॉपर-टी एक IUD है — केवल गर्भधारण रोकता है, STDs से कोई सुरक्षा नहीं देता। सिर्फ बैरियर विधि (कंडोम) ही STDs से बचाती है, क्योंकि वही शरीर के तरल पदार्थों के प्रत्यक्ष आदान-प्रदान को रोकती है। गर्भनिरोधन की सभी चार विधियाँ (बैरियर, हार्मोनल/रासायनिक, IUD, शल्य चिकित्सा) उदाहरण सहित लिखनी चाहिए — वेसेक्टॉमी पुरुषों में और ट्यूबेक्टॉमी महिलाओं में, इन्हें भी उल्टा लिख देना बहुत आम गलती है।
बोर्ड-शैली महत्वपूर्ण प्रश्न
- 1 अंक: पुष्प के उस भाग का नाम बताइए जहाँ नर युग्मक (male gametes) बनते हैं, और उस भाग का जहाँ स्त्री युग्मक (female gamete) उपस्थित होता है।
- 1 अंक: प्लाज्मोडियम (Plasmodium) में अलैंगिक जनन का कौन-सा तरीका दिखता है, और यह अमीबा (Amoeba) से कैसे अलग है?
- 2 अंक: केला, संतरा, गुलाब और चमेली जैसे पौधों के लिए वर्धी प्रजनन (vegetative propagation) को क्यों प्राथमिकता दी जाती है? दो कारण दीजिए।
- 3 अंक: मनुष्यों में प्लेसेंटा (placenta) की संरचना और कार्य समझाइए। इसके लिए बड़ा सतही क्षेत्र (surface area) क्यों महत्वपूर्ण है?
- 3 अंक: गर्भनिरोधन (contraception) की किन्हीं तीन विधियों की सूची बनाइए। बताइए इनमें से कौन-सी यौन संचारित रोगों से भी बचाती है, और कारण दीजिए।
- 5 अंक: पुष्प के अनुदैर्ध्य काट (longitudinal section) का नामांकित चित्र बनाइए और पुष्पी पौधों में निषेचन की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए। निषेचन के बाद ओव्यूल और ओवरी का क्या होता है, यह भी बताइए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जनन को जीवन प्रक्रिया (life process) क्यों कहते हैं जबकि इसके बिना भी जीव जीवित रह सकता है?
जनन व्यक्तिगत जीव के अपने अस्तित्व (survival) के लिए आवश्यक नहीं है — एक जीव बिना जनन किए पूरी ज़िंदगी जी सकता है। लेकिन इससे जाति (species) आगे नहीं बढ़ेगी। जनन को जीवन प्रक्रिया इसलिए माना जाता है क्योंकि इसके बिना कोई भी जाति कुछ ही पीढ़ियों में समाप्त हो जाएगी। यानी यह व्यक्तिगत स्तर का नहीं, जाति स्तर का उत्तरजीविता (survival) मामला है।
पुनर्जनन (regeneration) और विखंडन (fragmentation) में सटीक अंतर क्या है?
विखंडन में जीव का शरीर अपने आप टुकड़ों में टूट जाता है और हर टुकड़ा नया जीव बन जाता है — यह सामान्य जनन का तरीका है, जैसे स्पाइरोगायरा में। पुनर्जनन में जीव किसी दुर्घटना से कट जाता है, और कटे हुए हिस्से से विशिष्ट कोशिकाएँ बढ़कर (proliferate) पूरा जीव बना लेती हैं — जैसे प्लैनेरिया और हाइड्रा में। पुनर्जनन जनन का नियमित तरीका नहीं है, यह एक मरम्मत/पुनर्निर्माण क्षमता है।
टेस्टिस शरीर के बाहर स्क्रोटम (scrotum) में क्यों होते हैं?
शुक्राणु निर्माण के लिए शरीर के सामान्य तापमान से थोड़ा कम तापमान चाहिए होता है। स्क्रोटम शरीर गुहा के बाहर होने के कारण वहाँ का तापमान शरीर से कुछ डिग्री कम रहता है, जिससे शुक्राणु ठीक से बन पाते हैं और स्वस्थ रहते हैं। अगर टेस्टिस शरीर के अंदर होते तो शुक्राणु उत्पादन प्रभावित होती।
निषेचन (fertilisation) कहाँ होता है — यूटरस में या फैलोपियन ट्यूब में?
निषेचन फैलोपियन ट्यूब (oviduct) में होता है। ओवरी से निकला अंडा फैलोपियन ट्यूब में आता है, और वहीं शुक्राणु से मिलता है। निषेचन के बाद बना युग्मनज (zygote) विभाजित होते हुए यूटरस में उतरता है, जहाँ वह यूटरस की मोटी परत में प्रत्यारोपित (implant) होता है और भ्रूण के रूप में विकसित होता है। यानी निषेचन फैलोपियन ट्यूब में, विकास यूटरस में।
अगर अंडा निषेचित नहीं होता तो क्या होता है?
हर महीने यूटरस की परत निषेचित अंडे को प्राप्त करने के लिए मोटी और स्पंजी हो जाती है और उसमें खूब रक्त आपूर्ति विकसित हो जाती है। अगर अंडा निषेचित नहीं होता, तो इस परत की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और वह धीरे-धीरे टूटकर रक्त और म्यूकस के रूप में योनि से बाहर आ जाती है। इसी को मासिक धर्म (menstruation) कहते हैं। यह चक्र लगभग 28 दिन का होता है।
सभी गर्भनिरोधक विधियाँ STDs से क्यों नहीं बचातीं?
STDs — जैसे सूजाक (gonorrhoea), सिफलिस (syphilis), मस्से (warts) और HIV-AIDS — यौन संपर्क के दौरान शरीर के तरल पदार्थों (body fluids) के प्रत्यक्ष आदान-प्रदान से फैलते हैं। गोलियाँ हार्मोन बदलती हैं, कॉपर-टी यूटरस के अंदर काम करता है, और वेसेक्टॉमी/ट्यूबेक्टॉमी युग्मकों का रास्ता बंद करती हैं — इनमें से कोई भी तरल पदार्थों के संपर्क को नहीं रोकता। सिर्फ बैरियर विधि यानी कंडोम ही भौतिक रुकावट बनाता है, इसलिए वही एक विधि है जो गर्भधारण के साथ-साथ STDs से भी बचाती है।
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