Class 10 Science · Chapter 9 · हिंदी माध्यम
संक्षिप्त उत्तर:
इस अध्याय में NCERT के 14 अंतर्पाठ (in-text) प्रश्नों (चारों पृष्ठ-वार सेट — गोलीय दर्पण, दर्पण सूत्र व आवर्धन, अपवर्तन व अपवर्तनांक, और लेंस क्षमता) साथ ही 17 अभ्यास प्रश्न — कुल 31 प्रश्न — चरणबद्ध रूप से हल किए गए हैं। हर संख्यात्मक प्रश्न में दी गई राशियाँ, सूत्र, चिह्न परिपाटी के साथ प्रतिस्थापन (substitution), और अंतिम उत्तर सही चिह्न और इकाई के साथ दिया गया है। इसके अलावा: पूरा सारांश (परावर्तन के नियम, अवतल/उत्तल दर्पण की प्रतिबिंब निर्माण तालिकाएँ, अपवर्तन, स्नेल का नियम, लेंस सूत्र, क्षमता), एक सूत्र संदर्भ तालिका, 6 सबसे सामान्य परीक्षा गलतियाँ, बोर्ड-शैली अभ्यास प्रश्न अंक-वार, और 6 FAQ।
पूरा अध्याय सिर्फ दो चीज़ों पर टिका है — चिह्न परिपाटी (sign convention) और दो सूत्र: दर्पण का 1/v + 1/u = 1/f और लेंस का 1/v - 1/u = 1/f। प्रकाश एक सीधी रेखा में चलती है, लेकिन जब वह किसी पॉलिश की गई सतह से टकराती है तो परावर्तित (reflect) होती है, और जब एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है तो अपना रास्ता मोड़ लेती है — यही अपवर्तन (refraction) है। कक्षा 10 में हम गोलीय दर्पण (अवतल और उत्तल) तथा गोलीय लेंस (उत्तल और अवतल) पढ़ते हैं: इनमें प्रतिबिंब कहाँ बनेगा, कैसा बनेगा (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा), और कितना बड़ा बनेगा — यह सब सूत्र से निकालना आना चाहिए। सबसे अधिक अंक संख्यात्मक प्रश्नों (numericals) में कटते हैं, और वजह हमेशा एक ही होती है — चिह्न गलत लग गया। इसलिए इस अध्याय में चिह्न परिपाटी को रटना नहीं, समझ कर याद करना है।
अध्याय 9 सारांश — 5 मिनट रिवीजन
1. प्रकाश और परावर्तन
- प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है जो सीधी रेखा में यात्रा करती है (सरल रेखीय संचरण)।
- जब प्रकाश किसी चिकनी, पॉलिश की गई सतह पर पड़ता है तो वापस लौट आता है — इसे परावर्तन (reflection) कहते हैं।
परावर्तन के दो नियम (Laws of Reflection)
- नियम 1: आपतन कोण (∠i) = परावर्तन कोण (∠r)
- नियम 2: आपतित किरण, परावर्तित किरण, और आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब — तीनों एक ही समतल में होते हैं।
- यह नियम हर परावर्तक सतह पर लागू होते हैं — समतल दर्पण हो या गोलीय।
समतल दर्पण का प्रतिबिंब
- हमेशा आभासी और सीधा
- आकार वस्तु के बराबर (m = +1)
- दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर जितनी वस्तु आगे है
- पार्श्व-प्रतिलोमित (left-right उल्टा)
2. गोलीय दर्पण — मूल शब्दावली
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ध्रुव (P) | दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का केंद्र बिंदु |
| वक्रता केंद्र (C) | उस गोले का केंद्र जिसका दर्पण एक हिस्सा है |
| वक्रता त्रिज्या (R) | P से C तक की दूरी |
| मुख्य फोकस (F) | वह बिंदु जहाँ मुख्य अक्ष के समांतर आने वाली किरणें परावर्तित होकर मिलती हैं (अवतल) या जहाँ से आती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल) |
| फोकस दूरी (f) | P से F तक की दूरी; f = R/2 |
| द्वारक (Aperture) | दर्पण के परावर्तक पृष्ठ का व्यास |
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अवतल दर्पण (अभिसारी)
परावर्तक पृष्ठ अंदर की ओर धँसा हुआ। समांतर किरणों को एक बिंदु पर अभिसरित (converge) करता है। उपयोग: शेविंग मिरर, दंत चिकित्सक का दर्पण, टॉर्च/हेडलाइट का परावर्तक, सौर भट्टी।
उत्तल दर्पण (अपसारी)
परावर्तक पृष्ठ बाहर की ओर उठा हुआ। समांतर किरणों को अपसरित (diverge) करता है। प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा — इसलिए रियर-व्यू मिरर में प्रयोग होता है (विस्तृत दृष्टि क्षेत्र)।
3. अवतल दर्पण — प्रतिबिंब निर्माण तालिका
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर | बहुत छोटा (बिंदु) | वास्तविक, उल्टा |
| C से परे | F और C के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| C पर | C पर | बराबर आकार | वास्तविक, उल्टा |
| F और C के बीच | C से परे | बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| F पर | अनंत पर | बहुत बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| P और F के बीच | दर्पण के पीछे | बड़ा | आभासी, सीधा |
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4. उत्तल दर्पण — प्रतिबिंब निर्माण तालिका
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F पर (दर्पण के पीछे) | बहुत छोटा | आभासी, सीधा |
| अनंत और P के बीच (कहीं भी) | P और F के बीच (पीछे) | छोटा | आभासी, सीधा |
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5. नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (दर्पणों के लिए)
- वस्तु हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखी जाती है — इसलिए u हमेशा ऋणात्मक।
- सारी दूरियाँ ध्रुव (P) से नापी जाती हैं।
- आपतित प्रकाश की दिशा में (दाईं ओर) नापी गई दूरी = धनात्मक; उलटी दिशा (बाईं ओर) = ऋणात्मक।
- मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई = धनात्मक; नीचे की ऊँचाई = ऋणात्मक।
- अवतल दर्पण: f और R ऋणात्मक। उत्तल दर्पण: f और R धनात्मक।
6. प्रकाश का अपवर्तन
- जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे में तिरछा (obliquely) जाता है तो उसका मार्ग मुड़ जाता है — यह अपवर्तन है। कारण: अलग-अलग माध्यम में प्रकाश की चाल अलग होती है।
- विरल → सघन (जैसे हवा से काँच): किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है (r < i)।
- सघन → विरल (काँच से हवा): किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है (r > i)।
- अभिलंब के साथ (i = 0°) आने वाली किरण बिल्कुल नहीं मुड़ती।
- आयताकार काँच की स्लैब में निर्गत किरण आपतित किरण के समांतर निकलती है, बस थोड़ा पार्श्व विस्थापन (lateral displacement) हो जाता है।
अपवर्तन के नियम
- नियम 1: आपतित किरण, अपवर्तित किरण और अभिलंब — एक ही समतल में।
- नियम 2 (स्नेल का नियम): sin i / sin r एक स्थिरांक होता है (दिए गए दो माध्यमों के लिए)।
7. अपवर्तनांक (Refractive Index)
- माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक: n21 = v1/v2 = sin i / sin r
- निरपेक्ष अपवर्तनांक: n = c/v, जहाँ c = 3 × 108 m/s (निर्वात में प्रकाश की चाल)।
- n जितना अधिक, माध्यम उतना प्रकाशिकतः सघन, और उसमें प्रकाश उतनी ही धीमी।
- प्रकाशिक घनत्व ≠ द्रव्यमान घनत्व। केरोसिन का द्रव्यमान घनत्व पानी से कम है, पर प्रकाशिक घनत्व अधिक।
| माध्यम | अपवर्तनांक (लगभग) |
|---|---|
| वायु | 1.0003 |
| पानी | 1.33 |
| केरोसिन | 1.44 |
| तारपीन तेल | 1.47 |
| क्राउन ग्लास | 1.52 |
| हीरा | 2.42 |
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8. गोलीय लेंस
- उत्तल लेंस (अभिसारी): बीच में मोटा, किनारे पर पतला। समांतर किरणों को F पर अभिसरित करता है। f धनात्मक।
- अवतल लेंस (अपसारी): बीच में पतला, किनारे पर मोटा। किरणों को अपसरित करता है। f ऋणात्मक। प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा, छोटा।
- प्रकाशिक केंद्र (O): लेंस का केंद्रीय बिंदु — इससे गुजरने वाली किरण बिना मुड़े निकल जाती है। सारी दूरियाँ O से नापी जाती हैं।
उत्तल लेंस — प्रतिबिंब निर्माण तालिका
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F2 पर | बहुत छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| 2F1 से परे | F2 और 2F2 के बीच | छोटा | वास्तविक, उल्टा |
| 2F1 पर | 2F2 पर | बराबर आकार | वास्तविक, उल्टा |
| F1 और 2F1 के बीच | 2F2 से परे | बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| F1 पर | अनंत पर | बहुत बड़ा | वास्तविक, उल्टा |
| O और F1 के बीच | वस्तु की ही ओर | बड़ा | आभासी, सीधा |
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अवतल लेंस — प्रतिबिंब निर्माण तालिका
| वस्तु की स्थिति | प्रतिबिंब की स्थिति | आकार | प्रकृति |
|---|---|---|---|
| अनंत पर | F1 पर | बहुत छोटा | आभासी, सीधा |
| अनंत और O के बीच | F1 और O के बीच | छोटा | आभासी, सीधा |
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9. लेंस की क्षमता (Power of a Lens)
- क्षमता = लेंस की प्रकाश को मोड़ने की क्षमता। P = 1/f (f मीटर में)।
- SI इकाई = डायोप्टर (D)। 1 D = 1 m-1।
- उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक, अवतल लेंस की ऋणात्मक।
- लेंस संपर्क में रखे जाएँ तो: P = P1 + P2 + P3 + ...
इन-टेक्स्ट प्रश्न — हल
प्रश्न 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस को परिभाषित कीजिए।
अवतल दर्पण पर जब मुख्य अक्ष के समांतर कई किरणें पड़ती हैं, तो परावर्तन के बाद वे सारी किरणें मुख्य अक्ष पर एक ही बिंदु पर आकर मिलती हैं। उस बिंदु को अवतल दर्पण का मुख्य फोकस (F) कहते हैं।
यानी अवतल दर्पण किरणों को अभिसरित (converge) करके जिस बिंदु पर इकट्ठा करता है, वही उसका मुख्य फोकस है। ध्रुव से इस बिंदु तक की दूरी फोकस दूरी (f) कहलाती है, और f = R/2।
f = R / 2
प्रश्न 2. एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। उसकी फोकस दूरी क्या होगी?
दिया गया: R = 20 cm
सूत्र: फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।
f = R / 2
f = 20 / 2 = 10 cm
उत्तर: फोकस दूरी = 10 cm।
नोट: यहाँ दर्पण अवतल है या उत्तल यह बताया नहीं गया है, इसलिए परिमाण 10 cm लिखना ही पर्याप्त है। अगर अवतल होता तो f = -10 cm, और उत्तल होता तो f = +10 cm।
प्रश्न 3. ऐसा दर्पण बताइए जो वस्तु का सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बना सके।
अवतल दर्पण।
कब? जब वस्तु दर्पण के ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच रखी जाए, तब अवतल दर्पण दर्पण के पीछे एक आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बनाता है।
इसी वजह से शेविंग मिरर और दंत चिकित्सक के मिरर अवतल होते हैं — चेहरा या दाँत बड़ा दिखता है। उत्तल दर्पण कभी बड़ा प्रतिबिंब नहीं बना सकता, उसका प्रतिबिंब हमेशा छोटा ही होता है।
प्रश्न 4. वाहनों में रियर-व्यू मिरर के रूप में उत्तल दर्पण ही क्यों पसंद किया जाता है?
दो वजह हैं:
- प्रतिबिंब हमेशा सीधा और आभासी बनता है — चाहे वस्तु कितनी भी दूरी पर हो। चालक को पीछे का ट्रैफिक सीधा दिखता है, उल्टा नहीं।
- दृष्टि क्षेत्र (field of view) बहुत विस्तृत होता है — क्योंकि प्रतिबिंब छोटा बनता है, इसलिए एक छोटे दर्पण में भी पीछे का बड़ा क्षेत्र दिख जाता है।
समतल दर्पण का दृष्टि क्षेत्र कम होता है और अवतल दर्पण कभी-कभी वास्तविक, उल्टा प्रतिबिंब बना देता — दोनों ही ड्राइविंग के लिए खतरनाक होते। इसलिए उत्तल ही सुरक्षित विकल्प है।
प्रश्न 5. एक उत्तल दर्पण की वक्रता त्रिज्या 32 cm है। उसकी फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
दिया गया: उत्तल दर्पण, R = +32 cm (उत्तल दर्पण के लिए R धनात्मक होता है)
f = R / 2
f = 32 / 2 = 16 cm
उत्तर: फोकस दूरी = +16 cm (दर्पण के पीछे, इसलिए धनात्मक)।
प्रश्न 6. एक अवतल दर्पण, अपने सामने 10 cm पर रखी वस्तु का तीन गुना बड़ा (magnified) वास्तविक प्रतिबिंब बनाता है। प्रतिबिंब कहाँ बना है?
दिया गया: u = -10 cm (वस्तु हमेशा दर्पण के सामने, इसलिए ऋणात्मक), प्रतिबिंब वास्तविक और 3 गुना बड़ा।
चरण 1 — आवर्धन का चिह्न: वास्तविक प्रतिबिंब हमेशा उल्टा होता है, और उल्टे प्रतिबिंब के लिए आवर्धन ऋणात्मक होता है। इसलिए m = -3 (m = +3 नहीं)।
m = - v / u
-3 = - v / (-10)
-3 = v / 10
v = -30 cm
उत्तर: प्रतिबिंब दर्पण के सामने 30 cm की दूरी पर बनता है (v का ऋणात्मक चिह्न यही बता रहा है)। प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और 3 गुना बड़ा है।
प्रश्न 7. हवा में चल रही एक प्रकाश किरण पानी में तिरछी (obliquely) प्रवेश करती है। क्या किरण अभिलंब की ओर मुड़ेगी या अभिलंब से दूर? क्यों?
किरण अभिलंब की ओर मुड़ेगी।
कारण: पानी हवा की तुलना में प्रकाशिकतः सघन (optically denser) माध्यम है (पानी का n = 1.33, हवा का n ≈ 1.0003)। जब प्रकाश विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाता है तो उसकी चाल कम हो जाती है, और चाल कम होने पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ जाती है।
यानी यहाँ अपवर्तन कोण, आपतन कोण से छोटा होगा: r < i।
प्रश्न 8. प्रकाश हवा से काँच में प्रवेश करता है जिसका अपवर्तनांक 1.50 है। काँच में प्रकाश की चाल क्या होगी? निर्वात में प्रकाश की चाल 3 × 10⁸ m/s है।
दिया गया: n = 1.50, c = 3 × 108 m/s
n = c / v
v = c / n
v = (3 × 108) / 1.50
v = 2 × 108 m/s
उत्तर: काँच में प्रकाश की चाल = 2 × 108 m/s।
ध्यान दीजिए — यह निर्वात की चाल से कम है, जो होना ही चाहिए क्योंकि काँच प्रकाशिकतः सघन है।
प्रश्न 9. तालिका 9.3 से पता कीजिए कि किस माध्यम का प्रकाशिक घनत्व सबसे अधिक है और किसका सबसे कम।
सबसे अधिक प्रकाशिक घनत्व: हीरा (Diamond) — इसका अपवर्तनांक 2.42 है, तालिका में सबसे ऊँचा।
सबसे कम प्रकाशिक घनत्व: वायु (Air) — इसका अपवर्तनांक 1.0003 है, तालिका में सबसे कम।
नियम याद रखिए: जिस माध्यम का अपवर्तनांक अधिक, उसका प्रकाशिक घनत्व अधिक, और उसमें प्रकाश उतनी ही धीरे चलता है।
प्रश्न 10. आपको केरोसिन, तारपीन और पानी दिया गया है। इन तीनों में से किसमें प्रकाश सबसे तेज़ चलता है? तालिका 9.3 की जानकारी का इस्तेमाल कीजिए।
अपवर्तनांक:
- पानी — 1.33
- केरोसिन — 1.44
- तारपीन — 1.47
v = c / n
इस सूत्र में n और v एक-दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) हैं — n जितना कम, v उतना अधिक। तीनों में पानी का n सबसे कम (1.33) है।
उत्तर: प्रकाश पानी (water) में सबसे तेज़ चलता है।
प्रश्न 11. हीरे (diamond) का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि निर्वात में प्रकाश की चाल, हीरे में प्रकाश की चाल से 2.42 गुना अधिक है।
n = c / v = 2.42
v = c / 2.42 ≈ 1.24 × 108 m/s
यानी हीरे के अंदर प्रकाश की चाल लगभग 1.24 × 108 m/s रह जाती है। हीरे का अपवर्तनांक सबसे अधिक होने के कारण ही उसमें प्रकाश बहुत अधिक मुड़ता है और अंदर ही अंदर बार-बार परावर्तित होता है — इसी से हीरा इतना चमकता है।
प्रश्न 12. लेंस की क्षमता के 1 डायोप्टर को परिभाषित कीजिए।
1 डायोप्टर उस लेंस की क्षमता है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो।
P = 1 / f (f मीटर में)
डायोप्टर क्षमता की SI इकाई है, संकेत D। उत्तल (अभिसारी) लेंस की क्षमता धनात्मक होती है और अवतल (अपसारी) लेंस की ऋणात्मक।
प्रश्न 13. एक उत्तल लेंस, एक सुई का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब अपने से 50 cm की दूरी पर बनाता है। यदि प्रतिबिंब वस्तु के बराबर आकार का है, तो सुई लेंस के सामने कहाँ रखी गई है? लेंस की क्षमता भी ज्ञात कीजिए।
दिया गया: v = +50 cm (वास्तविक प्रतिबिंब लेंस की दूसरी ओर बनता है, इसलिए धनात्मक), प्रतिबिंब वस्तु के बराबर आकार का।
चरण 1 — वस्तु की स्थिति: उत्तल लेंस समान-आकार वास्तविक प्रतिबिंब तभी बनाता है जब वस्तु 2F1 पर हो, और तब प्रतिबिंब 2F2 पर बनता है। इसलिए |u| = |v| = 50 cm, और वस्तु बाईं ओर है तो u = -50 cm।
चरण 2 — फोकस दूरी:
1/v - 1/u = 1/f
1/50 - 1/(-50) = 1/f
1/50 + 1/50 = 2/50 = 1/25
f = +25 cm = +0.25 m
चरण 3 — क्षमता:
P = 1 / f = 1 / 0.25
P = +4 D
उत्तर: सुई लेंस से 50 cm सामने रखी गई है, और लेंस की क्षमता +4 D है (धनात्मक, क्योंकि उत्तल लेंस है)।
प्रश्न 14. 2 m फोकस दूरी वाले अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
दिया गया: अवतल लेंस, f = -2 m (अवतल लेंस की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है — यह चिह्न लगाना मत भूलिए)।
P = 1 / f
P = 1 / (-2)
P = -0.5 D
उत्तर: क्षमता = -0.5 D। ऋणात्मक चिह्न पुष्टि करता है कि लेंस अपसारी (अवतल) है।

Poore Class 10 Science ke handwritten colour notes
IITian & district toppers ke banaye short notes — revision-ready, diagram ke saath. Board se pehle poora syllabus 3 din me revise.
अभ्यास प्रश्न — हल (Q1–Q17)
प्रश्न 1. निम्न में से किस वस्तु से लेंस नहीं बनाया जा सकता? (a) जल (b) काँच (c) प्लास्टिक (d) मिट्टी
उत्तर: (d) मिट्टी (Clay)
लेंस बनाने के लिए पदार्थ का पारदर्शी (transparent) होना आवश्यक है, ताकि प्रकाश उसमें से गुजर सके और अपवर्तित हो। जल, काँच और प्लास्टिक — तीनों पारदर्शी हैं, तीनों से लेंस बन सकता है। मिट्टी अपारदर्शी (opaque) है, प्रकाश उसमें से गुजरता ही नहीं, इसलिए उससे लेंस नहीं बन सकता।
प्रश्न 2. एक अवतल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु से बड़ा दिखाई देता है। वस्तु की स्थिति क्या होनी चाहिए? (a) मुख्य फोकस और वक्रता केंद्र के बीच (b) वक्रता केंद्र पर (c) वक्रता केंद्र से परे (d) दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच
उत्तर: (d) दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच
अवतल दर्पण केवल एक ही स्थिति में आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है — जब वस्तु P और F के बीच हो। तब प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, आभासी, सीधा और बड़ा बनता है। बाकी तीनों स्थितियों (F–C के बीच, C पर, C से परे) में प्रतिबिंब हमेशा वास्तविक और उल्टा बनता है।
यही सिद्धांत शेविंग मिरर में प्रयुक्त होता है।
प्रश्न 3. उत्तल लेंस से वस्तु के बराबर आकार का वास्तविक प्रतिबिंब पाने के लिए वस्तु कहाँ रखनी चाहिए? (a) लेंस के मुख्य फोकस पर (b) फोकस दूरी से दुगुनी दूरी पर (c) अनंत (infinity) पर (d) लेंस के प्रकाशिक केंद्र और मुख्य फोकस के बीच
उत्तर: (b) फोकस दूरी से दुगुनी दूरी पर (यानी 2F1 पर)
उत्तल लेंस का नियम है: वस्तु 2F1 पर हो तो प्रतिबिंब 2F2 पर बनता है — वास्तविक, उल्टा और वस्तु के बराबर आकार का।
F पर रखने से प्रतिबिंब अनंत पर जाता है, अनंत पर रखने से प्रतिबिंब F पर बिंदु जैसा बनता है, और O–F के बीच रखने से प्रतिबिंब आभासी हो जाता है।
प्रश्न 4. एक गोलीय दर्पण और एक पतला गोलीय लेंस — दोनों की फोकस दूरी -15 cm है। ये संभवतः हैं: (a) दोनों अवतल (b) दोनों उत्तल (c) दर्पण अवतल पर लेंस उत्तल (d) दर्पण उत्तल पर लेंस अवतल
उत्तर: (a) दोनों अवतल
चिह्न परिपाटी याद कीजिए:
- दर्पण: अवतल का f ऋणात्मक, उत्तल का f धनात्मक → f = -15 cm मतलब अवतल दर्पण।
- लेंस: उत्तल का f धनात्मक, अवतल का f ऋणात्मक → f = -15 cm मतलब अवतल लेंस।
इसलिए दोनों ही अवतल हैं।
प्रश्न 5. आप दर्पण से चाहे कितनी भी दूरी पर खड़े हो जाएँ, आपका प्रतिबिंब हमेशा सीधा ही दिखता है। दर्पण हो सकता है: (a) समतल (b) अवतल (c) उत्तल (d) या तो समतल या उत्तल
उत्तर: (d) या तो समतल या उत्तल
समतल दर्पण हमेशा आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है (m = +1)। उत्तल दर्पण भी हमेशा आभासी और सीधा प्रतिबिंब बनाता है (छोटा, पर सीधा)। दोनों में वस्तु की दूरी चाहे कुछ भी हो, प्रतिबिंब सीधा ही रहता है।
अवतल दर्पण सिर्फ तभी सीधा प्रतिबिंब देता है जब वस्तु P और F के बीच हो — दूरी बढ़ते ही प्रतिबिंब उल्टा हो जाता है। इसलिए अवतल उत्तर नहीं हो सकता।
प्रश्न 6. शब्दकोश में छोटे अक्षर पढ़ने के लिए आप कौन सा लेंस पसंद करेंगे? (a) 50 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस (b) 50 cm फोकस दूरी का अवतल लेंस (c) 5 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस (d) 5 cm फोकस दूरी का अवतल लेंस
उत्तर: (c) 5 cm फोकस दूरी का उत्तल लेंस
दो बातें:
- आवर्धक लेंस (magnifying glass) के लिए उत्तल लेंस ही चाहिए — अवतल लेंस हमेशा छोटा (diminished) प्रतिबिंब बनाता है, अक्षर और छोटे दिखेंगे।
- उत्तल लेंस में फोकस दूरी जितनी कम होगी, क्षमता (P = 1/f) उतनी अधिक और आवर्धन उतना अधिक होगा। 5 cm < 50 cm, इसलिए 5 cm वाला बेहतर है।
वस्तु को लेंस के प्रकाशिक केंद्र और फोकस के बीच रखने पर आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब मिलेगा।
प्रश्न 7. हमें 15 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण से एक वस्तु का सीधा प्रतिबिंब चाहिए। वस्तु की दर्पण से दूरी की सीमा क्या होनी चाहिए? प्रतिबिंब की प्रकृति क्या होगी? प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा होगा या छोटा? किरण आरेख भी बनाइए।
दिया गया: अवतल दर्पण, f = -15 cm
सीमा: अवतल दर्पण सीधा प्रतिबिंब तभी बनाता है जब वस्तु ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच हो। इसलिए वस्तु की दूरी 0 से 15 cm के बीच होनी चाहिए (15 cm से कम)।
0 < |u| < 15 cm
प्रतिबिंब की प्रकृति: आभासी और सीधा (दर्पण के पीछे बनता है, पर्दे पर नहीं आता)।
आकार: वस्तु से बड़ा (enlarged)।
किरण आरेख: वस्तु AB को P और F के बीच रखिए। दो किरणें लीजिए — (i) A से मुख्य अक्ष के समांतर एक किरण जो परावर्तित होकर F से गुजरती हुई प्रतीत होती है, (ii) A से एक किरण जो C की दिशा में जाती हुई दिशा में है और उसी रास्ते वापस आती है। परावर्तित किरणें आगे जाकर मिलती नहीं, इसलिए उन्हें पीछे बढ़ाइए — दर्पण के पीछे मिलकर आभासी, सीधा, बड़ा प्रतिबिंब A'B' बनेगा।
उदाहरण: शेविंग मिरर में चेहरा इसी तरह बड़ा दिखता है।
प्रश्न 8. निम्न स्थितियों में प्रयुक्त होने वाले दर्पण का प्रकार बताइए — (a) कार की हेडलाइट (b) वाहन का साइड/रियर-व्यू मिरर (c) सौर भट्टी। अपने उत्तर का कारण भी दीजिए।
(a) कार की हेडलाइट — अवतल दर्पण
बल्ब को अवतल दर्पण के फोकस पर रखा जाता है। फोकस से निकली किरणें परावर्तित होकर मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती हैं, जिससे एक शक्तिशाली, दूर तक जाने वाला समांतर किरण-पुंज मिलता है।
(b) साइड/रियर-व्यू मिरर — उत्तल दर्पण
उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, और उसका दृष्टि क्षेत्र (field of view) बहुत विस्तृत होता है। चालक को पीछे का बड़ा क्षेत्र एक छोटे दर्पण में ही सीधा दिख जाता है।
(c) सौर भट्टी — अवतल दर्पण (बड़ा अवतल/परवलयिक परावर्तक)
सूर्य से आने वाली समांतर किरणें अवतल दर्पण पर पड़कर फोकस पर अभिसरित हो जाती हैं। उस एक बिंदु पर बहुत अधिक ऊष्मा इकट्ठी हो जाती है, जिससे बहुत ऊँचा तापमान मिलता है।
प्रश्न 9. एक उत्तल लेंस का आधा भाग काले कागज से ढक दिया गया। क्या यह लेंस वस्तु का पूरा प्रतिबिंब बनाएगा? प्रयोग करके जाँचिए। अपने प्रेक्षण समझाइए।
हाँ, लेंस वस्तु का पूरा (complete) प्रतिबिंब बनाएगा।
कारण: वस्तु के प्रत्येक बिंदु से प्रकाश किरणें लेंस के पूरे पृष्ठ पर पड़ती हैं — सिर्फ एक हिस्से पर नहीं। अगर आधा हिस्सा ढक भी दिया जाए, तो बाकी खुले आधे हिस्से से गुजरने वाली किरणें अब भी अपवर्तित होकर उसी जगह मिलेंगी जहाँ पहले मिलती थीं। इसलिए प्रतिबिंब का आकार और स्थिति बिल्कुल वैसे ही रहेंगे, पूरा प्रतिबिंब बनेगा।
फर्क क्या आएगा: लेंस से गुजरने वाली किरणों की संख्या आधी रह जाती है, इसलिए प्रतिबिंब की चमक (intensity) कम हो जाएगी — प्रतिबिंब धुँधला दिखेगा। आकार, रूप या स्थिति पर कोई असर नहीं।
यही बात लेंस के ऊपर वाला आधा या नीचे वाला आधा — दोनों स्थिति में लागू होती है।
प्रश्न 10. 5 cm लंबी एक वस्तु को 10 cm फोकस दूरी वाले अभिसारी लेंस से 25 cm दूर रखा गया है। किरण आरेख बनाइए और बने प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति निकालिए।
दिया गया: h = +5 cm, u = -25 cm, f = +10 cm (अभिसारी = उत्तल लेंस)
चरण 1 — प्रतिबिंब की स्थिति (लेंस सूत्र):
1/v - 1/u = 1/f
1/v = 1/f + 1/u
1/v = 1/10 + 1/(-25) = 1/10 - 1/25
1/v = (5 - 2)/50 = 3/50
v = 50/3 = +16.7 cm
चरण 2 — आवर्धन:
m = v / u = 16.7 / (-25) = -0.67
चरण 3 — प्रतिबिंब का आकार:
m = h' / h ⟹ h' = m × h
h' = (-0.67) × 5 = -3.3 cm
उत्तर:
- स्थिति: लेंस के दूसरी ओर, 16.7 cm पर (v धनात्मक है इसलिए)
- आकार: 3.3 cm (माइनस चिह्न सिर्फ उल्टा होने का संकेत है)
- प्रकृति: वास्तविक, उल्टा और छोटा (diminished)
किरण आरेख: वस्तु 2F1 (20 cm) से परे है, इसलिए प्रतिबिंब F2 (10 cm) और 2F2 (20 cm) के बीच बनेगा — 16.7 cm बिल्कुल इसी सीमा में है, जो हमारे उत्तर की पुष्टि करता है।
प्रश्न 11. 15 cm फोकस दूरी वाला एक अवतल लेंस, लेंस से 10 cm पर प्रतिबिंब बनाता है। वस्तु लेंस से कितनी दूरी पर रखी है? किरण आरेख बनाइए।
दिया गया: अवतल लेंस, f = -15 cm (अवतल लेंस का f ऋणात्मक)। अवतल लेंस का प्रतिबिंब हमेशा आभासी और वस्तु की ही ओर बनता है, इसलिए v = -10 cm।
1/v - 1/u = 1/f
1/u = 1/v - 1/f
1/u = 1/(-10) - 1/(-15)
1/u = -1/10 + 1/15
1/u = (-3 + 2)/30 = -1/30
u = -30 cm
उत्तर: वस्तु लेंस से 30 cm की दूरी पर रखी है (ऋणात्मक चिह्न बता रहा है कि लेंस की बाईं ओर, यानी आपतित प्रकाश वाली दिशा में है)।
किरण आरेख: वस्तु 30 cm पर, प्रतिबिंब 10 cm पर उसी ओर — आभासी, सीधा और छोटा। दो किरणें लीजिए: (i) समांतर किरण जो अपवर्तित होकर F1 से आती हुई प्रतीत होती है, (ii) प्रकाशिक केंद्र से सीधी गुजरने वाली किरण। इन्हें पीछे बढ़ाकर आभासी प्रतिबिंब मिलेगा।
प्रश्न 12. एक वस्तु 15 cm फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण से 10 cm की दूरी पर रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति निकालिए।
दिया गया: उत्तल दर्पण, f = +15 cm (उत्तल दर्पण का f धनात्मक), u = -10 cm
1/v + 1/u = 1/f
1/v = 1/f - 1/u
1/v = 1/15 - 1/(-10) = 1/15 + 1/10
1/v = (2 + 3)/30 = 5/30 = 1/6
v = +6 cm
आवर्धन:
m = - v / u = - (6) / (-10) = +0.6
उत्तर:
- स्थिति: प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 6 cm पर (v का धनात्मक चिह्न यही बता रहा है)
- प्रकृति: आभासी और सीधा (m धनात्मक है)
- आकार: छोटा — वस्तु का 0.6 गुना (m < 1)
प्रश्न 13. समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन +1 होता है। इसका क्या अर्थ है?
आवर्धन का सूत्र है m = h'/h। यहाँ दो बातें निकलती हैं:
- परिमाण 1 का अर्थ: h' = h, यानी प्रतिबिंब का आकार वस्तु के बिल्कुल बराबर है — न बड़ा, न छोटा।
- धन चिह्न का अर्थ: प्रतिबिंब सीधा (erect) है और आभासी है। (ऋणात्मक m होता तो प्रतिबिंब उल्टा और वास्तविक होता।)
m = h' / h = +1 ⟹ h' = h, प्रतिबिंब सीधा और आभासी
इसीलिए आईना देखते समय हम अपने ही बराबर आकार का, सीधा प्रतिबिंब देखते हैं।
प्रश्न 14. 5.0 cm लंबी एक वस्तु को 30 cm वक्रता त्रिज्या वाले उत्तल दर्पण के सामने 20 cm की दूरी पर रखा गया है। प्रतिबिंब की स्थिति, प्रकृति और आकार निकालिए।
दिया गया: h = +5.0 cm, u = -20 cm, R = +30 cm (उत्तल दर्पण)
चरण 1 — फोकस दूरी:
f = R / 2 = 30 / 2 = +15 cm
चरण 2 — प्रतिबिंब की स्थिति:
1/v + 1/u = 1/f
1/v = 1/15 - 1/(-20) = 1/15 + 1/20
1/v = (4 + 3)/60 = 7/60
v = 60/7 = +8.6 cm
चरण 3 — आवर्धन और आकार:
m = - v / u = - (8.57) / (-20) = +0.43
h' = m × h = 0.43 × 5.0 = +2.2 cm
उत्तर:
- स्थिति: दर्पण के पीछे 8.6 cm पर
- प्रकृति: आभासी और सीधा (v धनात्मक, m धनात्मक)
- आकार: 2.2 cm — छोटा (वस्तु 5.0 cm थी)
प्रश्न 15. 7.0 cm आकार की एक वस्तु को 18 cm फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण के सामने 27 cm पर रखा गया है। पर्दे को दर्पण से कितनी दूरी पर रखें कि तीक्ष्ण (sharp focussed) प्रतिबिंब मिले? प्रतिबिंब का आकार और प्रकृति भी निकालिए।
दिया गया: h = +7.0 cm, u = -27 cm, f = -18 cm (अवतल दर्पण का f ऋणात्मक)
चरण 1 — प्रतिबिंब की स्थिति:
1/v + 1/u = 1/f
1/v = 1/f - 1/u
1/v = 1/(-18) - 1/(-27) = -1/18 + 1/27
1/v = (-3 + 2)/54 = -1/54
v = -54 cm
चरण 2 — आवर्धन और आकार:
m = - v / u = - (-54) / (-27) = -2
h' = m × h = (-2) × 7.0 = -14 cm
उत्तर:
- पर्दे की स्थिति: दर्पण के सामने 54 cm पर (v ऋणात्मक है मतलब प्रतिबिंब वस्तु वाली ओर बनता है — वास्तविक प्रतिबिंब, इसलिए पर्दे पर मिल सकता है)
- आकार: 14 cm (ऋणात्मक चिह्न उल्टा होने का संकेत)
- प्रकृति: वास्तविक, उल्टा और बड़ा (2 गुना बड़ा)
जाँच: f = 18 cm तो C = 36 cm। वस्तु 27 cm पर है — यानी F(18) और C(36) के बीच। सारणी के अनुसार प्रतिबिंब C से परे, वास्तविक, उल्टा और बड़ा होना चाहिए — 54 cm > 36 cm, बिल्कुल सही।
प्रश्न 16. -2.0 D क्षमता वाले लेंस की फोकस दूरी निकालिए। यह किस प्रकार का लेंस है?
दिया गया: P = -2.0 D
P = 1 / f ⟹ f = 1 / P
f = 1 / (-2.0) = -0.5 m
f = -50 cm
उत्तर: फोकस दूरी = -0.5 m (यानी -50 cm)।
क्षमता और फोकस दूरी दोनों ऋणात्मक हैं, इसलिए यह एक अवतल (अपसारी) लेंस है।
प्रश्न 17. एक डॉक्टर ने +1.5 D क्षमता का सुधारक लेंस लिखा है। लेंस की फोकस दूरी निकालिए। यह लेंस अपसारी है या अभिसारी?
दिया गया: P = +1.5 D
P = 1 / f ⟹ f = 1 / P
f = 1 / 1.5 = +0.67 m
f = +66.7 cm (लगभग)
उत्तर: फोकस दूरी = +0.67 m (≈ 66.7 cm)।
क्षमता धनात्मक है, इसलिए यह अभिसारी (उत्तल) लेंस है। ऐसे लेंस दूर-दृष्टि दोष (hypermetropia) ठीक करने के लिए दिए जाते हैं।
महत्वपूर्ण समीकरण — एक नज़र में
सूत्र संदर्भ सारणी
| राशि / संबंध | सूत्र | चिह्न परिपाटी नोट | इकाई |
|---|---|---|---|
| दर्पण सूत्र | 1/v + 1/u = 1/f | सारी दूरियाँ ध्रुव (P) से। u हमेशा ऋणात्मक। अवतल: f, R ऋणात्मक। उत्तल: f, R धनात्मक। | cm या m |
| फोकस दूरी व वक्रता त्रिज्या | f = R/2 (R = 2f) | f और R का चिह्न हमेशा समान होता है (दोनों दर्पण के प्रकार पर निर्भर करते हैं)। | cm या m |
| आवर्धन (दर्पण) | m = -v/u = h'/h | m ऋणात्मक ⟹ वास्तविक + उल्टा। m धनात्मक ⟹ आभासी + सीधा। |m| > 1 बड़ा, |m| < 1 छोटा। | कोई इकाई नहीं |
| लेंस सूत्र | 1/v - 1/u = 1/f | दूरियाँ प्रकाशिक केंद्र (O) से। उत्तल लेंस: f धनात्मक। अवतल लेंस: f ऋणात्मक। u ऋणात्मक। | cm या m |
| आवर्धन (लेंस) | m = v/u = h'/h | दर्पण वाले सूत्र से अलग — यहाँ माइनस चिह्न नहीं लगता। m ऋणात्मक ⟹ वास्तविक, उल्टा। | कोई इकाई नहीं |
| लेंस की क्षमता | P = 1/f | f मीटर में डालना आवश्यक है। उत्तल: P धनात्मक। अवतल: P ऋणात्मक। | डायोप्टर (D) = m-1 |
| संपर्क में लेंस | P = P1 + P2 + P3 + ... | हर लेंस का अपना चिह्न लगाकर जोड़ना है (उत्तल +, अवतल -)। | डायोप्टर (D) |
| निरपेक्ष अपवर्तनांक | n = c/v | c = 3 × 108 m/s। n हमेशा 1 से बड़ा। n अधिक ⟹ प्रकाशिकतः सघन ⟹ प्रकाश धीमा। | कोई इकाई नहीं |
| सापेक्ष अपवर्तनांक | n21 = v1/v2 = n2/n1 | माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष। n12 = 1/n21। | कोई इकाई नहीं |
| स्नेल का नियम (अपवर्तन का द्वितीय नियम) | n21 = sin i / sin r | i = आपतन कोण, r = अपवर्तन कोण — दोनों अभिलंब से नापे जाते हैं, पृष्ठ से नहीं। | डिग्री |
| आपतन व परावर्तन कोण | ∠i = ∠r | दोनों कोण अभिलंब से नापे जाते हैं; आपतित किरण, परावर्तित किरण और अभिलंब एक ही समतल में। | डिग्री |
↔ Table ko side me swipe karein
सामान्य गलतियाँ — यहाँ अंक कटते हैं
- चिह्न परिपाटी लगाना भूल जाना (सबसे बड़ा अंक-हत्यारा)। बहुत से विद्यार्थी सूत्र में सीधा u = 25, f = 18 डाल देते हैं। वस्तु हमेशा दर्पण/लेंस के बाईं ओर होती है, इसलिए u हमेशा ऋणात्मक है। अवतल दर्पण का f ऋणात्मक, उत्तल दर्पण का धनात्मक; उत्तल लेंस का f धनात्मक, अवतल लेंस का ऋणात्मक। संख्यात्मक प्रश्न शुरू करने से पहले दी गई राशियों को चिह्न सहित अलग लिख लीजिए — 'u = -27 cm, f = -18 cm' — फिर ही सूत्र में डालिए।
- दर्पण का सूत्र लेंस पर (या लेंस का दर्पण पर) लगा देना। दर्पण में 1/v + 1/u = 1/f (प्लस) है और लेंस में 1/v - 1/u = 1/f (माइनस)। इसी तरह आवर्धन: दर्पण में m = -v/u (माइनस के साथ) और लेंस में m = v/u (बिना माइनस)। ये चार चीज़ें आपस में मिल जाएँ तो पूरा संख्यात्मक प्रश्न गलत हो जाता है। प्रश्न पढ़ते ही ऊपर लिख लीजिए — 'MIRROR' या 'LENS'।
- अवतल लेंस का f धनात्मक लगाना। प्रश्न में 'concave lens of focal length 15 cm' लिखा हो तो भी सूत्र में f = -15 cm ही जाएगा — 'माइनस' लिखा नहीं होता, आपको लगाना पड़ता है। यही गलती अवतल दर्पण के 'focal length 18 cm' में होती है (f = -18 cm)। नियम: अवतल = ऋणात्मक, उत्तल = धनात्मक — लेंस और दर्पण दोनों में नहीं, ध्यान से — दर्पण में अवतल ऋणात्मक, उत्तल धनात्मक; लेंस में उत्तल धनात्मक, अवतल ऋणात्मक।
- आवर्धन के चिह्न का अर्थ न समझना। m का चिह्न आकार नहीं, प्रकृति बताता है: m ऋणात्मक = प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा; m धनात्मक = प्रतिबिंब आभासी और सीधा। आकार तो |m| से पता चलता है — |m| > 1 बड़ा, |m| < 1 छोटा। 'm = -2' का मतलब प्रतिबिंब छोटा नहीं, बल्कि 2 गुना बड़ा और उल्टा है। और अगर प्रश्न कहे 'real image, 3 times magnified' तो आपको खुद m = -3 लेना है, +3 नहीं।
- क्षमता निकालते समय फोकस दूरी सेंटीमीटर में डाल देना। P = 1/f में f हमेशा मीटर में होनी चाहिए। f = 25 cm है तो पहले 0.25 m बनाइए, फिर P = 1/0.25 = +4 D। सीधा 1/25 कर दिया तो उत्तर 0.04 आ जाएगा — पूरा गलत। और f का चिह्न भी साथ ले जाना है: f = -2 m ⟹ P = -0.5 D।
- उत्तर में चिह्न और इकाई छोड़ देना, और प्रकृति लिखना भूल जाना। 'v = 54' लिखना अधूरा है — सही है 'v = -54 cm, यानी प्रतिबिंब दर्पण के सामने 54 cm पर'। v का चिह्न ही बताता है प्रतिबिंब दर्पण के सामने (वास्तविक) है या पीछे (आभासी)। संख्यात्मक प्रश्न में पूरे अंक तभी मिलते हैं जब आप स्थिति + आकार (इकाई सहित) + प्रकृति (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा, बड़ा/छोटा) — तीनों लिखें।
बोर्ड-शैली महत्वपूर्ण प्रश्न
- 1 अंक: एक अवतल लेंस की फोकस दूरी 25 cm है। उसकी क्षमता डायोप्टर में ज्ञात कीजिए।
- 1 अंक: वाहनों के रियर-व्यू मिरर में उत्तल दर्पण ही क्यों लगाया जाता है? एक कारण लिखिए।
- 2 अंक: नई कार्तीय चिह्न परिपाटी (New Cartesian sign convention) के कोई चार नियम लिखिए जो गोलीय दर्पणों के लिए प्रयुक्त होते हैं।
- 3 अंक: 12 cm फोकस दूरी वाले उत्तल दर्पण के सामने 18 cm पर एक वस्तु रखी है। प्रतिबिंब की स्थिति, आवर्धन और प्रकृति ज्ञात कीजिए।
- 5 अंक: (a) लेंस सूत्र और आवर्धन सूत्र लिखिए। (b) 4 cm की वस्तु 20 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस से 30 cm दूर रखी है — प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति ज्ञात कीजिए। (c) किरण आरेख बनाइए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
दर्पण सूत्र और लेंस सूत्र में चिह्न का अंतर क्यों है?
दर्पण में प्रकाश परावर्तित होकर वापस उसी ओर जाता है जहाँ से आया था, जबकि लेंस में प्रकाश पार निकल जाता है। इसी ज्यामिति के कारण व्युत्पत्ति (derivation) में चिह्न बदल जाता है। व्यावहारिक तरकीब: दर्पण में प्लस (1/v + 1/u = 1/f) और आवर्धन में माइनस (m = -v/u); लेंस में माइनस (1/v - 1/u = 1/f) और आवर्धन में प्लस (m = v/u)। यानी दोनों में एक प्लस और एक माइनस होता है, बस जगह बदल जाती है।
वास्तविक और आभासी प्रतिबिंब में कैसे पहचानें कि कौन सा बना है?
सबसे आसान तरीका उत्तर के चिह्न से है। दर्पण में v ऋणात्मक आए तो प्रतिबिंब दर्पण के सामने बना है — वास्तविक। v धनात्मक आए तो पीछे बना है — आभासी। लेंस में उल्टा है: v धनात्मक मतलब प्रतिबिंब दूसरी ओर बना — वास्तविक; v ऋणात्मक मतलब वस्तु वाली ही ओर बना — आभासी। वास्तविक प्रतिबिंब पर्दे पर पकड़ा जा सकता है और हमेशा उल्टा होता है; आभासी प्रतिबिंब पर्दे पर नहीं आता और हमेशा सीधा होता है।
अवतल दर्पण कभी आभासी प्रतिबिंब बनाता है क्या?
हाँ, सिर्फ एक ही स्थिति में — जब वस्तु दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच हो। तब प्रतिबिंब दर्पण के पीछे आभासी, सीधा और बड़ा बनता है। बाकी हर स्थिति में (F पर, F–C के बीच, C पर, C से परे) प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा ही बनता है। इसी एक अपवाद के कारण शेविंग मिरर और दंत चिकित्सक का दर्पण अवतल होते हैं।
प्रकाशिक घनत्व (optical density) और द्रव्यमान घनत्व (mass density) एक ही चीज़ है क्या?
नहीं, ये दो अलग चीज़ें हैं। प्रकाशिक घनत्व अपवर्तनांक से तय होती है — मतलब उस माध्यम में प्रकाश कितनी धीरे चलता है। द्रव्यमान घनत्व मतलब प्रति इकाई आयतन द्रव्यमान। सबसे अच्छा उदाहरण केरोसिन है: उसका द्रव्यमान घनत्व पानी से कम है (इसलिए पानी पर तैरता है), लेकिन उसका अपवर्तनांक 1.44 है जो पानी के 1.33 से अधिक है — यानी केरोसिन प्रकाशिकतः सघन है।
चिह्न परिपाटी में दूरी कहाँ से नापते हैं, और धनात्मक-ऋणात्मक कैसे तय होता है?
दर्पण में सारी दूरियाँ ध्रुव (P) से नापी जाती हैं और लेंस में प्रकाशिक केंद्र (O) से। आपतित प्रकाश की दिशा (आम तौर पर बाईं से दाईं) में नापी गई दूरी धनात्मक होती है, और उसकी उलटी दिशा में ऋणात्मक। इसी वजह से वस्तु, जो हमेशा बाईं ओर रखी जाती है, उसका u हमेशा ऋणात्मक आता है। मुख्य अक्ष के ऊपर की ऊँचाई धनात्मक, नीचे की ऋणात्मक।
उत्तल लेंस का आधा भाग ढक दें तो आधा प्रतिबिंब बनेगा क्या?
नहीं, पूरा प्रतिबिंब ही बनेगा। वस्तु के हर बिंदु से किरणें लेंस के पूरे पृष्ठ पर पड़ती हैं, इसलिए खुले आधे हिस्से से गुजरने वाली किरणें भी उसी जगह मिलकर पूरा प्रतिबिंब बना देती हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि किरणों की संख्या आधी रहने से प्रतिबिंब की चमक कम हो जाएगी — प्रतिबिंब थोड़ा धुँधला दिखेगा, पर उसका आकार, रूप और स्थिति बिल्कुल नहीं बदलेगी।
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